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ToggleSRUNKHALA "NAAGKANYA OR SAMBRAT |EPISODE - 1
🎙️ एपिसोड की प्रस्तावना (Episode Start Description):
“जहाँ जंगल की नर्म हवा में छुपे हैं सैकड़ों रहस्य…
एक सम्राट के कदमों ने भाग्य की लकीरों को बदल दिया…
जहाँ एक नागकन्या के हृदय में बसी थी एक अनकही प्रेमगाथा…
और जन्म लिया एक ऐसा पुत्र, जो बना न्याय, शक्ति और कर्म का प्रतीक – जगन्नाथ। श्रृंखला “नागकन्या और सम्राट |EPISODE – 1
यह है एक छुपे हुए प्रेम, एक अद्भुत जन्म और एक युग-पुरुष की कथा…
स्वागत है आपका – ‘नागकन्या और सम्राट : जगन्नाथ की गाथा’ में।
हर भाग लाएगा एक नया रहस्य, एक नई सीख, और एक नई चुनौती…_
श्रृंखला “नागकन्या और सम्राट |EPISODE – 1
तो चलिए, शुरू करते हैं आज का भाग…”
भाग 1: जंगल की वो भेंट
पुराने समय की बात है, पूर्व दिशा के एक विशाल साम्राज्य में सम्राट विक्रमकेतु राज्य करते थे। वह न केवल युद्धकला में निपुण थे, बल्कि न्यायप्रिय, प्रजा के प्रिय और अत्यंत साहसी भी थे। उनकी एक आदत थी – हर पूर्णिमा को वह राज्य के उत्तर दिशा के घने जंगलों में अकेले शिकार के लिए जाते। श्रृंखला “नागकन्या और सम्राट |EPISODE – 1
एक पूर्णिमा की रात थी। चंद्रमा की शीतल चाँदनी जंगल के पत्तों पर चमक रही थी। सम्राट विक्रमकेतु अपने घोड़े पर सवार होकर शिकार के लिए निकले। जंगल में गहराई तक जाने के बाद, अचानक उनकी नज़र एक झील के किनारे पर पड़ी। वहाँ एक सुन्दर कन्या, जल में कमल के फूलों के बीच बैठी, वीणा बजा रही थी। उसका सौंदर्य अप्सराओं को भी लज्जित कर दे — केश चाँदी जैसे, नेत्र नीले जल से भी गहरे, और मुख पर ऐसी शांति कि कोई भी देखता रह जाए।
सम्राट उसे अप्सरा समझ बैठे। वे घोड़े से उतरे और उसकी ओर बढ़े ही थे कि झाड़ियों से दो भयानक बाघ उन पर झपट पड़े।
“र्र्र्र्र्र्र्र्र…” बाघों की दहाड़ से पूरा जंगल गूंज उठा। सम्राट ने तलवार निकाली, परन्तु संख्या और घातकता के सामने वह चोटिल हो गए। तभी वह सुंदर कन्या बिजली जैसी फुर्ती से आगे बढ़ी। उसके हाथ में एक नाग के आकार की छड़ी थी। उसने मन्त्र पढ़े और छड़ी से एक तेज़ प्रकाश निकला जिसने बाघों को भगा दिया।
सम्राट की आँखें अचंभे से फैल गईं। “तुम… कौन हो?” वह कराहते हुए बोले।
नागलता से भेट :
“मेरा नाम नागलता है,” कन्या ने उत्तर दिया और उसकी चोटों का उपचार करने लगी। उसके स्पर्श से जैसे शरीर ही नहीं आत्मा को भी राहत मिलती थी।
अगले कई दिनों तक नागलता ने सम्राट का इलाज किया। धीरे-धीरे उनके बीच आत्मीयता बढ़ी, बातचीत हुई, और बिना जाने-समझे एक गहरा प्रेम जन्म ले चुका था। पर सम्राट को यह ज्ञात नहीं था कि नागलता कोई साधारण कन्या नहीं, बल्कि नागलोक की रक्षक नागकन्या है, जिसे पृथ्वी पर एक रहस्यमय दायित्व पूरा करना था।
कुछ दिन बाद सम्राट ठीक होकर अपने राज्य लौट गए, लेकिन नागलता अकेली नहीं थी। उसकी गोद में अब सम्राट का अंश पलने लगा था — वह बालक जो भविष्य में पृथ्वी के संतुलन का रक्षक बनेगा।
क्या सम्राट विक्रमकेतु को कभी पता चलेगा कि नागलता एक नागकन्या है? और क्या होगा जब नागलोक को इस प्रेम का भान होगा?👉 अगले भाग में पढ़िए:
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