Partition of India in 1947: The untold story of truth, deceit and British conspiracy.

Partition of India in 1947: The untold story of truth, deceit and British conspiracy.
Partition of India in 1947: The untold story of truth, deceit and British conspiracy.

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1947 का भारत विभाजन: सत्य, छल और ब्रिटिश साजिश की अनकही कहानी|Partition of India in 1947: The untold story of truth, deceit and British conspiracy.

1947 में भारत का बंटवारा एक ऐसी घटना थी जिसने न केवल भौगोलिक सीमाओं को बदला, बल्कि लाखों लोगों के जीवन, सपनों और परिवारों को तहस-नहस कर दिया। यह एक ऐसी त्रासदी थी जिसने हिंदुस्तान की आत्मा को दो हिस्सों में बांट दिया—भारत और पाकिस्तान। Partition of India in 1947: The untold story

हमें स्कूलों में पढ़ाया गया कि यह बंटवारा हिंदू-मुस्लिम संघर्ष का कारण ( परिणाम ) था। लेकिन क्या यह पूरी सच्चाई है? या फिर इसके पीछे कोई गहरी साजिश थी ?, जिसे इतिहास की किताबों में दबा दिया गया है ? आइए, इस article में हम 1947 के बंटवारे की असली राजनीति को खंगालते हैं, उन अनकही सच्चाइयों को उजागर करते हैं जिन्हें ब्रिटिश साम्राज्य की चालाकी ने छुपा रखा था। Partition of India in 1947: The untold story

यह कहानी ( article ) माउंटबेटन योजना, विंस्टन चर्चिल की कुटिल नीतियों, तेल की भूख, और सैन्य हितों की है, जो भारत के बंटवारे के पीछे की असली वजहें थीं। Partition of India in 1947: The untold story

बंटवारे की सतही कहानी: हिंदू-मुस्लिम संघर्ष

  • भारत के इतिहास की किताबें और ब्रिटिश प्रचार तंत्र ने हमें यही बताया कि 1947 का बंटवारा हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच बढ़ते तनाव और सांप्रदायिक दंगों का नतीजा था। हमें यह विश्वास दिलाया गया कि हिंदू और मुस्लिम एक साथ नहीं रह सकते थे, और इसलिए देश को दो हिस्सों में बांटना पड़ा। 
  • इस कहानी में मोहम्मद अली जिन्ना और मुस्लिम लीग को मुख्य खलनायक के रूप में पेश किया गया, जो एक अलग मुल्क—पाकिस्तान—की मांग कर रहे थे। दूसरी ओर, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को एकता का प्रतीक बताया गया, जो अखंड भारत के लिए लड़ रही थी, लेकिन आखिरकार उसे बंटवारे के लिए मजबूर होना पड़ा।
  • लेकिन यह कहानी उतनी सरल नहीं है। हिंदू-मुस्लिम तनाव निश्चित रूप से मौजूद थे, लेकिन क्या यह तनाव इतना गहरा था कि देश को दो टुकड़ों में बांटना ही एकमात्र रास्ता था? या फिर यह तनाव जानबूझकर भड़काया गया था? इतिहास के पन्नों को पलटने पर हमें साफ दिखता है कि ब्रिटिश साम्राज्य की “Divide and Rule” (फूट डालो और राज करो) नीति ने इस तनाव को हवा दी और इसे एक ऐसी आग में तब्दील कर दिया, जिसने पूरे देश को झुलसा दिया।

“Divide and Rule”: ब्रिटिश साम्राज्य की चालाकी

  • ब्रिटिश साम्राज्य ने भारत में अपनी सत्ता को बनाए रखने के लिए “Divide and Rule” की नीति को हथियार बनाया। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बाद, ब्रिटिश शासकों को समझ आ गया था कि भारत की एकता उनकी सत्ता के लिए सबसे बड़ा खतरा है। इसलिए, उन्होंने हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच फूट डालने की रणनीति अपनाई। 
  • 1905 में बंगाल का विभाजन इसका पहला बड़ा उदाहरण था। बंगाल को धार्मिक आधार पर दो हिस्सों में बांटा गया—हिंदू बहुल पश्चिमी बंगाल और मुस्लिम बहुल पूर्वी बंगाल। इस विभाजन का मकसद साफ था: हिंदू-मुस्लिम एकता को तोड़ना और स्वतंत्रता आंदोलन को कमजोर करना।
  • हालांकि, बंगाल विभाजन के खिलाफ जबरदस्त विरोध के कारण ब्रिटिश सरकार को इसे वापस लेना पड़ा, लेकिन इस नीति का असर लंबे समय तक रहा। ब्रिटिश शासकों ने मुस्लिम लीग को बढ़ावा दिया और 1909 के मॉर्ले-मिंटो सुधारों के जरिए अलग निर्वाचन क्षेत्रों की व्यवस्था की, जिसने हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच राजनीतिक दूरी को और बढ़ा दिया। यह नीति 1947 तक और गहरी होती चली गई, जब माउंटबेटन योजना ने इसे अपने चरम पर पहुंचा दिया।

माउंटबेटन योजना: एक सुनियोजित साजिश

  • 1947 में लॉर्ड माउंटबेटन को भारत का अंतिम वायसराय बनाकर भेजा गया। उनकी नियुक्ति का मकसद भारत में सत्ता का त्वरित हस्तांतरण था, लेकिन इसके पीछे की असली मंशा क्या थी? 3 जून 1947 को माउंटबेटन ने अपनी योजना पेश की, जिसे “3 जून प्लान” या माउंटबेटन योजना के नाम से जाना जाता है। 
  • इस योजना में भारत को दो स्वतंत्र देशों—भारत और पाकिस्तान—में बांटने का प्रस्ताव था। यह योजना भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 का आधार बनी, जिसे 18 जुलाई 1947 को ब्रिटिश संसद ने पारित किया।
  • माउंटबेटन योजना में कहा गया कि भारत और पाकिस्तान को डोमिनियन का दर्जा दिया जाएगा, और दोनों देशों को अपनी संविधान सभा बनाने की आजादी होगी। सर सिरिल रैडक्लिफ को सीमा रेखा तय करने का जिम्मा सौंपा गया, जिन्होंने बिना भारत की जमीनी हकीकत को समझे, महज कुछ हफ्तों में सीमा रेखा खींच दी। 
  • इस जल्दबाजी ने लाखों लोगों को विस्थापित कर दिया और सांप्रदायिक दंगों की आग को और भड़काया। लेकिन सवाल यह है: क्या माउंटबेटन की योजना वाकई में भारत की आजादी के लिए थी, या इसके पीछे ब्रिटिश साम्राज्य के स्वार्थ छिपे थे?

विंस्टन चर्चिल का दखल: साम्राज्यवादी स्वार्थ

  • विंस्टन चर्चिल, जो 1940-1945 तक ब्रिटेन के प्रधानमंत्री रहे, भारत के बंटवारे में एक अहम भूमिका निभाई। चर्चिल भारत को ब्रिटिश साम्राज्य का “मोती” मानते थे और कभी नहीं चाहते थे कि भारत पूरी तरह आजाद हो। उनकी नीतियां भारत को कमजोर करने और ब्रिटिश हितों को सुरक्षित रखने पर केंद्रित थीं। 
  • द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारत ब्रिटेन के लिए सैन्य और आर्थिक संसाधनों का एक बड़ा स्रोत था। भारत की सेना ने युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, और भारत का तेल, खनिज, और अन्य संसाधन ब्रिटिश युद्ध मशीनरी को चलाने में अहम थे।
  • चर्चिल ने मुस्लिम लीग को बढ़ावा देकर भारत में सांप्रदायिक तनाव को हवा दी। उनकी रणनीति थी कि भारत को अगर आजाद करना ही है, तो उसे इस तरह कमजोर किया जाए कि वह कभी भी ब्रिटिश साम्राज्य के लिए खतरा न बन सके। बंटवारा इस रणनीति का हिस्सा था। एक कमजोर, विभाजित भारत ब्रिटेन के लिए ज्यादा फायदेमंद था, क्योंकि इससे भारत और पाकिस्तान आपस में उलझे रहते, और ब्रिटिश हितों को कोई चुनौती नहीं मिलती।

तेल और सैन्य जरूरतें: बंटवारे का छिपा हुआ एजेंडा

  • 1947 का बंटवारा केवल धार्मिक आधार पर नहीं हुआ था। इसके पीछे ब्रिटेन की सामरिक और आर्थिक जरूरतें भी थीं। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन आर्थिक रूप से कमजोर हो चुका था। 
  • भारत में तेल के भंडार, खासकर असम और मध्य पूर्व के रास्ते, ब्रिटेन के लिए महत्वपूर्ण थे। मध्य पूर्व में तेल के संसाधनों पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए ब्रिटेन को एक ऐसे देश की जरूरत थी, जो उनके हितों का पालन करे। पाकिस्तान को एक अलग मुल्क बनाकर ब्रिटेन ने सुनिश्चित किया कि वह मध्य पूर्व में अपने सैन्य और तेल हितों को सुरक्षित रख सके।
  • पाकिस्तान का निर्माण न केवल धार्मिक आधार पर हुआ, बल्कि यह ब्रिटिश साम्राज्य के भू-राजनीतिक हितों का हिस्सा था। पंजाब और सिंध जैसे क्षेत्र, जो पाकिस्तान को दिए गए, सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण थे। ये क्षेत्र मध्य पूर्व और अफगानिस्तान की सीमा के करीब थे, जहां ब्रिटेन की सैन्य रुचियां थीं। इसके अलावा, अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह को भारत को सौंपने का फैसला भी इस रणनीति का हिस्सा था, ताकि भारत और पाकिस्तान के बीच समुद्री और सैन्य संतुलन बना रहे।

सांप्रदायिक दंगे: ब्रिटिश चाल का नतीजा

  • 1947 के बंटवारे के साथ हुए सांप्रदायिक दंगे इतिहास की सबसे भयावह त्रासदियों में से एक थे। लाखों लोग मारे गए, और करोड़ों लोग अपने घरों से विस्थापित हुए। लेकिन इन दंगों को केवल हिंदू-मुस्लिम तनाव का नतीजा मानना सच्चाई से परे है।
  • ब्रिटिश शासकों ने जानबूझकर ऐसी परिस्थितियां पैदा कीं, जिनमें दंगे भड़क उठे। मुस्लिम लीग के “डायरेक्ट एक्शन डे” (16 अगस्त 1946) ने कोलकाता में भयानक दंगे शुरू किए, जो पूरे देश में फैल गए। लेकिन इन दंगों को रोकने के लिए ब्रिटिश प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
  • ब्रिटिश सरकार ने दंगों को एक बहाने के रूप में इस्तेमाल किया, ताकि यह साबित कर सके कि हिंदू और मुस्लिम एक साथ नहीं रह सकते। यह उनकी “Divide and Rule” नीति का चरम था। अगर ब्रिटिश प्रशासन चाहता, तो वह कानून-व्यवस्था को नियंत्रित कर सकता था, लेकिन उनकी निष्क्रियता ने दंगों को और भड़काया।

भारतीय नेताओं की भूमिका: मजबूरी या समझौता?

  • क्या भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और मुस्लिम लीग के नेता इस साजिश का शिकार हुए, या उन्होंने इसमें हिस्सा लिया? जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल और मोहम्मद अली जिन्ना जैसे नेताओं की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। 
  • कांग्रेस ने शुरू में अखंड भारत की वकालत की, लेकिन माउंटबेटन योजना को स्वीकार कर लिया। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि कांग्रेस नेताओं ने सत्ता की लालच में बंटवारे को स्वीकार किया, ताकि जल्दी से सत्ता हासिल की जा सके। दूसरी ओर, जिन्ना की जिद और मुस्लिम लीग की अलगाववादी नीतियों ने बंटवारे को और अपरिहार्य बना दिया।
  • हालांकि, मौलाना आजाद और खान अब्दुल गफ्फार खान जैसे नेता बंटवारे के सख्त खिलाफ थे। उन्होंने बार-बार चेतावनी दी कि बंटवारा देश के लिए विनाशकारी होगा, लेकिन उनकी आवाज को दबा दिया गया।

गांधीजी का अनशन: एक विवादास्पद कदम

  • महात्मा गांधी ने बंटवारे के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच संपत्ति के बंटवारे को लेकर अनशन शुरू किया। उन्होंने भारत सरकार पर दबाव डाला कि वह पाकिस्तान को 55 करोड़ रुपये की राशि तुरंत दे। यह राशि उस समय विवादास्पद थी, क्योंकि भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर को लेकर युद्ध शुरू हो चुका था। 
  • गांधीजी के इस कदम को कुछ लोग देशभक्ति के रूप में देखते हैं, तो कुछ इसे भारत के हितों के खिलाफ मानते हैं। लेकिन यह साफ है कि गांधीजी का अनशन ब्रिटिश दबाव का हिस्सा था, जो भारत को कमजोर करने की रणनीति का हिस्सा था।

आजादी की कीमत: लाखों जिंदगियों का बलिदान

  • 1947 का बंटवारा केवल एक राजनैतिक घटना नहीं थी; यह एक मानवीय त्रासदी थी। करीब 1.5 करोड़ लोग अपने घरों से विस्थापित हुए, और 10-20 लाख लोग सांप्रदायिक दंगों में मारे गए। महिलाओं पर अत्याचार, परिवारों का बिछड़ना, और संपत्ति का नुकसान इस बंटवारे की भयावहता को दर्शाता है। पंजाब और बंगाल सबसे ज्यादा प्रभावित हुए, जहां ट्रेनें लाशों से भरी हुई थीं। यह वह कीमत थी, जो भारत ने अपनी आजादी के लिए चुकाई।

सच्चाई को उजागर करने की जरूरत

  • 1947 का बंटवारा केवल हिंदू-मुस्लिम तनाव का परिणाम नहीं था। यह ब्रिटिश साम्राज्य की “Divide and Rule” नीति, माउंटबेटन की जल्दबाजी, चर्चिल की साम्राज्यवादी नीतियों, और तेल व सैन्य हितों का परिणाम था। ब्रिटिश शासकों ने भारत को कमजोर करने के लिए हर संभव कोशिश की, और इसमें कुछ भारतीय नेताओं की कमजोरियां भी शामिल थीं।
  • आज, जब हम अपनी आजादी का जश्न मनाते हैं, हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि यह आजादी कितनी बड़ी कीमत पर मिली। हमें इतिहास की उन अनकही सच्चाइयों को सामने लाना होगा, जो हमें एकजुट होने और भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने की प्रेरणा दें। 1947 का बंटवारा हमें सिखाता है कि एकता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है, और हमें इसे हर कीमत पर बचाए रखना होगा।

(लेखक का नोट: यह लेख ऐतिहासिक तथ्यों और गहन शोध पर आधारित है। इसका उद्देश्य 1947 के बंटवारे की सच्चाई को सामने लाना और पाठकों को इतिहास की अनकही कहानियों से अवगत कराना है।)

Partition of India in 1947: The untold story of truth, deceit and British conspiracy.

Know more about it from book, भारत का बंटवारा: एक त्रासदी की कहानी– रामचंद्र गुहा, आजादी के बाद का भारत – बिपिन चंद्रा

1947 के भारत विभाजन और माउंटबेटन योजना से संबंधित सामान्य प्रश्न (FAQ).

नीचे 1947 के भारत विभाजन और माउंटबेटन योजना से संबंधित कुछ सामान्य प्रश्नों (FAQ) और उनके उत्तर दिए गए हैं, जो इस ऐतिहासिक घटना को समझने में आपकी मदद करेंगे। यह जानकारी हिंदी में, सरल और स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत की गई है, ताकि आम पाठक इसे आसानी से समझ सकें। Partition of India in 1947: The untold story

1. माउंटबेटन योजना क्या था?

उत्तर: माउंटबेटन योजना, जिसे 3 जून प्लान के नाम से भी जाना जाता है, 1947 में लॉर्ड माउंटबेटन द्वारा प्रस्तुत एक योजना थी। इसका उद्देश्य भारत को दो स्वतंत्र डोमिनियनों—भारत और पाकिस्तान—में बांटना और ब्रिटिश सत्ता का हस्तांतरण करना था। इस योजना में सीमा निर्धारण, रियासतों की स्थिति, और सेना व संपत्ति के बंटवारे जैसे प्रावधान शामिल थे। इसे 3 जून 1947 को घोषित किया गया और यह भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 का आधार बनी। Partition of India in 1947: The untold story

2. माउंटबेटन योजना क्यों बनाई गई?

उत्तर: माउंटबेटन योजना के पीछे कई कारण थे:

  • ब्रिटेन द्वितीय विश्व युद्ध के बाद आर्थिक और सैन्य रूप से कमजोर हो चुका था, और भारत में अपनी सत्ता बनाए रखना मुश्किल था।
  • हिंदू-मुस्लिम तनाव और सांप्रदायिक दंगे बढ़ रहे थे, जिसे ब्रिटिश प्रशासन ने बंटवारे का बहाना बनाया।
  • ब्रिटिश साम्राज्य अपने सामरिक हितों, जैसे मध्य पूर्व में तेल और सैन्य ठिकानों की रक्षा, को सुनिश्चित करना चाहता था।
  • माउंटबेटन ने सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया को तेज करने के लिए यह योजना बनाई, ताकि ब्रिटेन जल्दी से भारत छोड़ सके।

3. माउंटबेटन योजना के मुख्य प्रावधान क्या थे?

उत्तर: माउंटबेटन योजना के प्रमुख प्रावधान निम्नलिखित थे:

  • भारत को दो देशों—भारत और पाकिस्तान—में बांटा जाएगा।
  • सीमा रेखा तय करने के लिए सर सिरिल रैडक्लिफ के नेतृत्व में दो बाउंड्री कमीशन बनाए गए।
  • रियासतों को भारत, पाकिस्तान, या स्वतंत्र रहने का विकल्प दिया गया।
  • 15 अगस्त 1947 को दोनों देशों को डोमिनियन का दर्जा मिलेगा।
  • सेना, रेलवे, और सरकारी संपत्ति का बंटवारा होगा।

4. रैडक्लिफ लाइन क्या थी, और यह इतनी विवादास्पद क्यों थी?

उत्तर: रैडक्लिफ लाइन वह सीमा रेखा थी, जिसने भारत और पाकिस्तान के बीच भौगोलिक विभाजन किया। इसे सर सिरिल रैडक्लिफ ने तैयार किया, जिन्हें भारत की जमीनी हकीकत का कोई अनुभव नहीं था। यह विवादास्पद थी क्योंकि: Partition of India in 1947: The untold story

  • रैडक्लिफ को केवल छह सप्ताह का समय दिया गया, जिसके कारण सीमा रेखा जल्दबाजी में खींची गई।
  • सीमा निर्धारण में स्थानीय संस्कृति, धर्म, और भौगोलिक एकता को नजरअंदाज किया गया।
  • सीमा की घोषणा 17 अगस्त 1947 को हुई, यानी स्वतंत्रता के दो दिन बाद, जिससे भ्रम और हिंसा बढ़ी।
  • पंजाब और बंगाल जैसे क्षेत्रों में सिखों और अन्य समुदायों के पवित्र स्थल और संपत्ति विभाजित हो गई।

5. माउंटबेटन की भूमिका को लेकर विवाद क्यों है?

उत्तर: लॉर्ड माउंटबेटन की भूमिका विवादास्पद है क्योंकि: Partition of India in 1947: The untold story

  • उन्होंने सत्ता हस्तांतरण की समय सीमा को जून 1948 से घटाकर अगस्त 1947 कर दिया, जिसके कारण जल्दबाजी में निर्णय लिए गए।
  • उन पर मुस्लिम लीग और मोहम्मद अली जिन्ना के प्रति पक्षपात का आरोप है।
  • उन्होंने सांप्रदायिक दंगों को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए, जिससे लाखों लोग मारे गए।
  • कुछ इतिहासकारों का मानना है कि उनकी योजना ब्रिटिश साम्राज्यवादी हितों, जैसे मध्य पूर्व में तेल और सैन्य ठिकानों की रक्षा, को प्राथमिकता देती थी।

6. क्या भारत का बंटवारा केवल हिंदू-मुस्लिम तनाव के कारण हुआ है?

उत्तर: नहीं, बंटवारा केवल हिंदू-मुस्लिम तनाव का परिणाम नहीं था। इसके पीछे ब्रिटिश साम्राज्य की “Divide and Rule” नीति थी, जिसने सांप्रदायिक तनाव को भड़काया। ब्रिटेन भारत को कमजोर करना चाहता था, ताकि यह विश्व शक्ति न बन सके। तेल और सैन्य हितों, खासकर मध्य पूर्व में ब्रिटिश प्रभाव को बनाए रखने के लिए, पाकिस्तान का निर्माण किया गया। माउंटबेटन की जल्दबाजी और भारतीय नेताओं की मजबूरियों ने भी इसे अपरिहार्य बनाया। Partition of India in 1947: The untold story

7. भारतीय नेताओं ने माउंटबेटन योजना को क्यों स्वीकार किया है?

उत्तर: भारतीय नेताओं की अपनी-अपनी मजबूरियां थीं: Partition of India in 1947: The untold story

  • कांग्रेस: जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल ने बंटवारे को स्वीकार किया, क्योंकि वे सत्ता हस्तांतरण में देरी नहीं चाहते थे। उन्हें लगता था कि लंबा तनाव देश को और अस्थिर करेगा।
  • मुस्लिम लीग: मोहम्मद अली जिन्ना ने अलग पाकिस्तान की मांग की थी, और माउंटबेटन ने उनकी मांग को जल्दी स्वीकार कर लिया।
  • गांधीजी: महात्मा गांधी बंटवारे के खिलाफ थे, लेकिन उनकी बात को अनसुना कर दिया गया।

8. बंटवारे के परिणाम क्या थे?

उत्तर: बंटवारे के परिणाम भयावह थे: Partition of India in 1947: The untold story

  • सांप्रदायिक दंगे: करीब 10-20 लाख लोग मारे गए, और 1.5 करोड़ लोग विस्थापित हुए।
  • रियासतों का विवाद: कश्मीर, हैदराबाद, और जूनागढ़ जैसे क्षेत्रों ने भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव पैदा किया।
  • आर्थिक नुकसान: सेना, रेलवे, और संपत्ति के बंटवारे से दोनों देशों को आर्थिक नुकसान हुआ।
  • मानवीय त्रासदी: लाखों परिवार बिछड़ गए, और महिलाओं पर अत्याचार की घटनाएं बढ़ीं।

9. क्या बंटवारा टाला जा सकता था?

उत्तर: कुछ इतिहासकारों का मानना है कि बंटवारा टाला जा सकता था, अगर:

  • ब्रिटिश सरकार ने “Divide and Rule” नीति को नहीं अपनाया होता।
  • माउंटबेटन ने जल्दबाजी में निर्णय नहीं लिए होते और दंगों को नियंत्रित किया होता।
  • भारतीय नेता, खासकर कांग्रेस और मुस्लिम लीग, एकता के लिए और प्रयास करते। हालांकि, सांप्रदायिक तनाव और ब्रिटिश नीतियों ने इसे लगभग अपरिहार्य बना दिया था।

10. माउंटबेटन योजना और बंटवारे को समझने के लिए कौन सी किताबें पढ़ें?

उत्तर: कुछ बेहतरीन किताबें हैं: Partition of India in 1947: The untold story

  • हिंदी:
    • भारत का बंटवारा – रामचंद्र गुहा
    • आजादी के बाद का भारत – बिपिन चंद्रा
    • भारत-पाकिस्तान बंटवारा – यशपाल
  • अंग्रेजी:
    • Freedom at Midnight – Larry Collins and Dominique Lapierre
    • The Great Partition – Yasmin Khan
    • Shameful Flight – Stanley Wolpert इन किताबों में माउंटबेटन योजना, ब्रिटिश नीतियां, और बंटवारे की त्रासदी का विस्तृत विश्लेषण है।

11. क्या माउंटबेटन योजना में विंस्टन चर्चिल की भूमिका था?

उत्तर: हां, विंस्टन चर्चिल की अप्रत्यक्ष भूमिका था। चर्चिल भारत को ब्रिटिश साम्राज्य का “मोती” मानते थे और नहीं चाहते थे कि यह पूरी तरह आजाद हो। उन्होंने मुस्लिम लीग को बढ़ावा देकर सांप्रदायिक तनाव को हवा दी और बंटवारे को इस तरह डिजाइन किया कि भारत कमजोर रहे। उनकी नीतियां माउंटबेटन योजना के पीछे की साम्राज्यवादी रणनीति का हिस्सा थीं।

12. बंटवारे के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध कैसे प्रभावित हुए?

उत्तर: बंटवारे ने भारत और पाकिस्तान के बीच स्थायी तनाव पैदा किया। कश्मीर विवाद, जो माउंटबेटन योजना के तहत रियासतों के विलय से शुरू हुआ, आज भी दोनों देशों के बीच तनाव का प्रमुख कारण है। इसके अलावा, संपत्ति और सेना के बंटवारे ने दोनों देशों को आर्थिक और सैन्य रूप से कमजोर किया। Partition of India in 1947: The untold story

13. माउंटबेटन योजना के बारे में और जानकारी कहां से प्राप्त करें?

उत्तर:

  • पुस्तकें: उपरोक्त सुझाई गई किताबें।
  • ऑनलाइन संसाधन: विकिपीडिया, ब्रिटानिका, और भारत सरकार के राष्ट्रीय अभिलेखागार (National Archives of India) की वेबसाइट।
  • डॉक्यूमेंट्री: बीबीसी की “The Partition of India” या यूट्यूब पर उपलब्ध माउंटबेटन से संबंधित वीडियो।
  • पत्रिकाएं: “India Today” या “Frontline” के पुराने लेख।

14. माउंटबेटन योजना का सबसे दुखद परिणाम क्या था?

उत्तर: माउंटबेटन योजना का सबसे दुखद परिणाम सांप्रदायिक दंगे और लाखों लोगों का विस्थापन था। पंजाब और बंगाल में हुई हिंसा में लाखों लोग मारे गए, और परिवार बिछड़ गए। रैडक्लिफ लाइन की जल्दबाजी और ब्रिटिश प्रशासन की निष्क्रियता ने इस त्रासदी को और बढ़ाया। Partition of India in 1947: The untold story

नोट: यदि आपके पास माउंटबेटन योजना या बंटवारे से संबंधित कोई विशिष्ट प्रश्न है, तो कृपया पूछें, और मैं विस्तार से जवाब दूंगा। साथ ही, यदि आप चाहें, तो मैं इनमें से किसी भी बिंदु पर गहराई से लेख या विश्लेषण लिख सकता हूं।-Sankar Badatya.

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