Paralysis Kya Hotaa he or uskaa Kaaran.

Paralysis Kya Hotaa he or uskaa Kaaran

पैरालिसिस (लकवा) क्या है?

पैरालिसिस, जिसे आम भाषा में लकवा या पक्षाघात कहा जाता है, एक गंभीर स्थिति है जिसमें शरीर के किसी हिस्से की मांसपेशियां काम करना बंद कर देती हैं। व्यक्ति उस हिस्से को हिला नहीं पाता, क्योंकि दिमाग से मांसपेशियों तक संदेश पहुंचाने वाली नसें (नर्व्स) खराब हो जाती हैं। इससे हिलने  की ताकत चली जाती है और कभीकभी संवेदना भी खत्म हो जाती है। यह अस्थायी या स्थायी हो सकता है।

पैरालिसिस मुख्यत ४ प्रकार का हे,
  • मोनोप्लेजिया: केवल एक अंग प्रभावित (जैसे एक हाथ)।

  • हेमिप्लेजिया: शरीर की एक तरफ (आधा शरीर)।

  • पैराप्लेजिया: दोनों पैर।

  • क्वाड्रिप्लेजिया: दोनों हाथ-पैर और धड़।

Paralysis Kya Hotaa he or uskaa Kaaran

मोनोप्लेजिया:

मोनोप्लेजिया पैरालिसिस (लकवा) का एक प्रकार है, जिसमें शरीर का केवल एक अंग प्रभावित होता है। जैसे सिर्फ एक हाथ या एक पैर में कमजोरी या लकवा लग जाता है, जबकि बाकी शरीर सामान्य रहता है। व्यक्ति उस एक अंग को हिला नहीं पाता या ताकत कम हो जाती है।Paralysis Kya Hotaa he or uskaa Kaaran.

कारण: दिमाग या नसों में छोटी चोट, स्ट्रोक का हल्का प्रभाव, इंफेक्शन या जन्म से समस्या।

लक्षण: प्रभावित अंग में सुन्नता, झुनझुनी, हिलाने में दिक्कत।

Paralysis Kya Hotaa he or uskaa Kaaran

हेमिप्लेजिया(Hemiplegia):

हेमिप्लेजिया पैरालिसिस (लकवा) का एक आम प्रकार है, जिसमें शरीर की एक पूरी तरफ (दायां या बायां हिस्सा) प्रभावित होता है। इसमें उस तरफ का हाथ, पैर और कभी-कभी चेहरा भी कमजोर हो जाता है या हिलना बंद हो जाता है। व्यक्ति उस तरफ की मांसपेशियों को कंट्रोल नहीं कर पाता। यह दिमाग की समस्या से होता है, क्योंकि दिमाग का एक हिस्सा दूसरे हिस्से को कंट्रोल करता है (क्रॉस कनेक्शन)।Paralysis Kya Hotaa he or uskaa Kaaran.

प्रकार:
  • राइट हेमिप्लेजिया: दिमाग के लेफ्ट साइड डैमेज से, शरीर का दायां हिस्सा प्रभावित।
  • लेफ्ट हेमिप्लेजिया: दिमाग के राइट साइड डैमेज से, शरीर का बायां हिस्सा प्रभावित।

कारण: सबसे मुख्य कारण स्ट्रोक (ब्रेन अटैक) है – दिमाग में खून की नस ब्लॉक होना या फटना। अन्य कारण: ब्रेन इंजरी, ट्यूमर, इंफेक्शन, मल्टीपल स्क्लेरोसिस या जन्म से सेरेब्रल पाल्सी।

लक्षण:
  • प्रभावित तरफ हाथ-पैर में कमजोरी या सुन्नता।
  • चलने में दिक्कत, संतुलन खराब।
  • चेहरा टेढ़ा हो जाना, बोलने में समस्या।
  • कभी दर्द, मांसपेशियां सख्त होना।
Paralysis Kya Hotaa he or uskaa Kaaran

पैराप्लेजिया (Paraplegia):

पैराप्लेजिया लकवा (पैरालिसिस) का एक प्रकार है, जिसमें शरीर के निचले हिस्से (दोनों पैर, कमर से नीचे और कभी पेट का हिस्सा) में लकवा लग जाता है। ऊपरी शरीर (हाथ, छाती) सामान्य रहता है। व्यक्ति पैर हिला नहीं पाता, चल नहीं सकता, लेकिन हाथों से काम कर सकता है। यह रीढ़ की हड्डी (स्पाइनल कॉर्ड) के निचले हिस्से में चोट या डैमेज से होता है।Paralysis Kya Hotaa he or uskaa Kaaran.

प्रकार:
  • कंप्लीट पैराप्लेजिया: निचले हिस्से में पूरी तरह संवेदना और मूवमेंट खत्म।
  • इनकंप्लीट पैराप्लेजिया: थोड़ी बहुत ताकत या संवेदना बाकी रहती है।

कारण: मुख्य रूप से स्पाइनल कॉर्ड इंजरी – एक्सीडेंट, गिरना, चोट लगना। अन्य: ट्यूमर, इंफेक्शन, स्पाइनल स्टेनोसिस या जन्मजात समस्या।

लक्षण:
  • दोनों पैरों में कमजोरी या सुन्नता।
  • चलने में असमर्थता, व्हीलचेयर की जरूरत।
  • मूत्राशय-आंत पर कंट्रोल खराब, दर्द।
Paralysis Kya Hotaa he or uskaa Kaaran

क्वाड्रिप्लेजिया (Quadriplegia):

क्वाड्रिप्लेजिया, जिसे टेट्राप्लेजिया भी कहते हैं, लकवा (पैरालिसिस) का सबसे गंभीर प्रकार है। इसमें शरीर के दोनों हाथ, दोनों पैर और धड़ (ट्रंक) प्रभावित होता है। गर्दन से नीचे का पूरा शरीर कमजोर हो जाता है या हिलना बंद हो जाता है। व्यक्ति हाथ-पैर नहीं हिला पाता, चल नहीं सकता। यह रीढ़ की हड्डी (स्पाइनल कॉर्ड) के ऊपरी हिस्से (गर्दन क्षेत्र) में चोट से होता है।Paralysis Kya Hotaa he or uskaa Kaaran.

प्रकार:

  • कंप्लीट क्वाड्रिप्लेजिया: पूरा निचला शरीर और हाथों में संवेदना व मूवमेंट खत्म।
  • इनकंप्लीट क्वाड्रिप्लेजिया: थोड़ी ताकत या संवेदना बाकी रहती है।

कारण: मुख्य रूप से स्पाइनल कॉर्ड इंजरी गर्दन में – कार एक्सीडेंट, गिरना, स्पोर्ट्स इंजरी। अन्य: ट्यूमर, इंफेक्शन या जन्मजात।

लक्षण:
  • हाथ-पैरों में सुन्नता या कमजोरी।
  • सांस लेने में दिक्कत (अगर ऊंची इंजरी हो)।
  • मूत्राशय-आंत कंट्रोल खराब, दर्द ।
  • व्हीलचेयर पर निर्भरता।
Paralysis Kya Hotaa he or uskaa Kaaran

पैरालिसिस (लकवा) कैसे होता है?

पैरालिसिस मुख्य रूप से नर्व्स (नसों) के डैमेज होने से होता है। नसें दिमाग से मांसपेशियों तक संदेश ले जाती हैं। अगर नसें खराब हो जाएं, तो संदेश नहीं पहुंचता और मांसपेशियां काम करना बंद कर देती हैं। यह दिमाग, रीढ़ की हड्डी या परिधीय नसों में समस्या से हो सकता है।Paralysis Kya Hotaa he or uskaa Kaaran.

मुख्य कारण और उदाहरण:

  1. स्ट्रोक (ब्रेन अटैक): दिमाग में खून की नस ब्लॉक हो जाना (इस्केमिक स्ट्रोक) या फट जाना (हेमोरेजिक स्ट्रोक)। यह सबसे आम कारण है। उदाहरण: हाई ब्लड प्रेशर वाले व्यक्ति को अचानक स्ट्रोक हो जाए, तो शरीर की एक तरफ (हेमिप्लेजिया) लकवा लग सकता है।
Paralysis Kya Hotaa he or uskaa Kaaran
Paralysis Kya Hotaa he or uskaa Kaaran
Paralysis Kya Hotaa he or uskaa Kaaran

2. स्पाइनल कॉर्ड इंजरी: रीढ़ की हड्डी में चोट लगना (एक्सीडेंट, गिरना आदि से)। उदाहरण: कार एक्सीडेंट में कमर की रीढ़ टूट जाए, तो दोनों पैरों में लकवा (पैराप्लेजिया) हो सकता है।

Paralysis Kya Hotaa he or uskaa Kaaran, spinal cord
Paralysis Kya Hotaa he or uskaa Kaaran
Paralysis Kya Hotaa he or uskaa Kaaran
3. अन्य कारण:
  • मल्टीपल स्क्लेरोसिस (MS): इम्यून सिस्टम नसों की कवरिंग (माइलिन) को डैमेज कर देता है। उदाहरण: धीरे-धीरे कमजोरी बढ़ती है, हाथ-पैर सुन्न हो जाते हैं।
  • पोलियो: पोलियो वायरस मोटर नर्व्स को नष्ट कर देता है।
    उदाहरण: बचपन में पोलियो संक्रमण से पैरों में स्थायी लकवा।

  • इंफेक्शन या अन्य: जैसे बेल्स पाल्सी (चेहरे की नस में वायरस संक्रमण)। उदाहरण: चेहरा एक तरफ टेढ़ा हो जाना।

आजकल थोड़ा गिरने से ही कई लोग अचानक पैरालिसिस (लकवा) क्यों हो जाते हैं?

आजकल, खासकर बुजुर्गों में, मामूली गिरने (जैसे घर में फिसलना या सीढ़ी से थोड़ा गिरना) से अचानक हाथ-पैर सुन्न हो जाना या लकवा लग जाना आम हो गया है। लोग सोचते हैं कि सिर्फ गिरने से ही लकवा हो गया, लेकिन असल वजह पहले से मौजूद एक बीमारी है – सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस (गर्दन की हड्डियों का घिसाव)। यह बीमारी उम्र बढ़ने के साथ बहुत आम हो जाती है। Paralysis Kya Hotaa he or uskaa Kaaran.

गर्दन की डिस्क पतली हो जाती हैं, हड्डियां बढ़कर ऑस्टियोफाइट्स (बोन स्पर्स) बन जाती हैं, और लिगामेंट्स मोटे हो जाते हैं। इससे रीढ़ की नस (स्पाइनल कॉर्ड) पर धीरे-धीरे दबाव पड़ता रहता है, लेकिन अक्सर कोई लक्षण नहीं दिखता।

जब व्यक्ति गिरता है, तो गर्दन में हाइपरेक्सटेंशन (पीछे की तरफ झटका) लगता है। पहले से संकीर्ण (narrow) स्पाइनल कैनाल में लिगामेंटम फ्लेवम मुड़कर या डिस्क आगे निकलकर नस को पिंच कर देती है। इससे स्पाइनल कॉर्ड बुरी तरह डैमेज हो जाता है, और अचानक लकवा जैसे लक्षण आ जाते हैं – खासकर हाथ ज्यादा प्रभावित होते हैं (सेंट्रल कॉर्ड सिंड्रोम)। यह कोई नई बात नहीं, लेकिन आजकल ज्यादा दिख रही है क्योंकि:

  • भारत में बुजुर्गों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
  • लाइफस्टाइल बदलने से (कम एक्टिविटी, खराब पोस्चर, मोबाइल-कंप्यूटर का ज्यादा यूज) सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस जल्दी शुरू हो जाता है।
  • गिरने की घटनाएं बढ़ी हैं (घर में फिसलन, कमजोर हड्डियां, बैलेंस की समस्या)।

सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस क्या है और क्यों आम हो गई है?

सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस गर्दन की रीढ़ (सर्वाइकल स्पाइन) का डिजेनरेटिव चेंज है। गर्दन में 7 हड्डियां (वर्टीब्रा) होती हैं, जिनके बीच कुशन जैसे डिस्क होते हैं। उम्र बढ़ने पर:

  • डिस्क में पानी कम हो जाता है, वे पतले और सख्त हो जाते हैं।
  • हड्डियां आपस में रगड़कर बोन स्पर्स बनाती हैं।
  • जोड़ों में आर्थराइटिस हो जाता है।
  • लिगामेंट्स (बंधन) मोटे और सख्त हो जाते हैं।

यह 40-50 साल की उम्र से शुरू हो जाता है, और 60 साल से ऊपर के 85-90% लोगों में पाया जाता है। भारत में यह और आम है क्योंकि:

  • पोषण की कमी, विटामिन D की कमी से हड्डियां कमजोर।
  • ज्यादा देर बैठकर काम करना (ऑफिस, ड्राइविंग)।
  • पहले से सर्वाइकल स्टेनोसिस (जन्म से या डिजेनरेशन से कैनाल संकीर्ण)।

पहले यह बीमारी बिना लक्षण के रहती है (एसिम्प्टोमैटिक)। व्यक्ति को सिर्फ हल्का गर्दन दर्द या स्टिफनेस लगता है, जिसे इग्नोर कर देते हैं। लेकिन स्पाइनल कॉर्ड पर दबाव बढ़ता रहता है – इसे सर्वाइकल स्पॉन्डिलोटिक मायलोपैथी कहते हैं।

गिरने से कैसे ट्रिगर होता है लकवा? (मैकेनिज्म)

बुजुर्ग गिरते समय अक्सर आगे की तरफ गिरते हैं। सिर ठुड्डी से लगती है, गर्दन पीछे की तरफ मुड़ती है – यह हाइपरेक्सटेंशन इंजरी है। पहले से स्पॉन्डिलोसिस में:

  • स्पाइनल कैनाल पहले से संकीर्ण होता है।
  • पीछे का लिगामेंटम फ्लेवम मुड़कर (बकलिंग) कॉर्ड को दबाता है।
  • आगे की तरफ डिस्क या बोन स्पर्स कॉर्ड को पिंच करते हैं।

यह सेंट्रल कॉर्ड सिंड्रोम (CCS) का कारण बनता है – सबसे आम इनकंपलीट स्पाइनल कॉर्ड इंजरी। इसमें:

  • हाथों की मांसपेशियां ज्यादा प्रभावित (क्योंकि कॉर्ड के सेंटर में ऊपरी अंगों के फाइबर्स होते हैं)।
  • पैर कम प्रभावित।
  • सुन्नता, कमजोरी, कभी ब्लैडर कंट्रोल खराब।

मामूली गिरने से ही यह हो जाता है क्योंकि पहले से कॉर्ड “एट रिस्क” होता है। मेडिकल भाषा में: “Minor trauma in preexisting cervical stenosis leads to acute cord compression.”

भारत में क्यों ज्यादा केस?

  • बुजुर्ग आबादी बढ़ रही: 60+ की संख्या तेजी से बढ़ रही, और इनमें स्पॉन्डिलोसिस 90% तक।
  • फॉल्स आम: घर में फिसलन, कम रोशनी, कमजोर मांसपेशियां, दवाइयों से चक्कर।
  • ट्रैफिक और ऊंचाई से गिरना: लेकिन बुजुर्गों में घरेलू फॉल्स ज्यादा।
  • स्टडीज दिखाती हैं: भारत में स्पाइनल कॉर्ड इंजरी में फॉल मुख्य कारण, खासकर बुजुर्गों में सर्वाइकल।
  • पहले डायग्नोसिस नहीं होता, इसलिए गिरने को ही दोष देते हैं।

लक्षण और डायग्नोसिस

गिरने के बाद:
  • हाथ-पैर कमजोर, सुन्न।
  • चलने में दिक्कत, बैलेंस खराब।
  • गर्दन दर्द, कभी ब्लैडर समस्या।

डायग्नोसिस: X-ray, MRI से स्पॉन्डिलोसिस और कॉर्ड कंप्रेशन दिखता है।

Also read anatomy structure WHO

इलाज और रोकथाम

  • तुरंत अस्पताल: सर्जरी अगर जरूरी (डिकंप्रेशन)।
  • फिजियोथेरेपी: सबसे महत्वपूर्ण, कई लोग रिकवर हो जाते हैं।
  • दवाइयां, नेक कलर।
  • रोकथाम: नियमित एक्सरसाइज, अच्छा पोस्चर, विटामिन D, गिरने से बचाव (घर सुरक्षित बनाएं)।
  • गर्दन दर्द को इग्नोर न करें, जल्दी डॉक्टर दिखाएं।

यह स्थिति गंभीर है, लेकिन जागरूकता से बचाव संभव। बुजुर्गों की देखभाल बढ़ाएं, और कोई गिरे तो तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट से जांच कराएं।

Paralysis Kya Hotaa he or uskaa Kaaran

Author

Scroll to Top