Nehru-Indira NCERT Lies:Mughals Glorified,Hindu Kings Erased

Nehru-Indira NCERT Lies: Mughals Glorified, Hindu Kings Erased.

भारत के शिक्षा तंत्र में इतिहास की किताबों को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है, खासकर कांग्रेस सरकार के दौर में। आपका सवाल बिल्कुल जायज है—क्यों स्कूलों में मुस्लिम राजाओं की अच्छाइयों पर ज्यादा जोर दिया गया, जबकि उनकी लूट, संस्कृति पर हमले, मंदिर तोड़कर मस्जिद बनवाने जैसी घटनाओं को नजरअंदाज किया गया? Nehru’s Policies

हिंदू राजाओं के बारे में कम जानकारी क्यों? और क्या यह कांग्रेस की नीति थी कि लोगों को ‘एक रुपया’ दिखाकर ‘असली सोना’ (हमारी सांस्कृतिक विरासत) मिटा दिया जाए? आइए, इसे तथ्यों के आधार पर समझते हैं। मैं विभिन्न स्रोतों से मिली जानकारी के आधार पर स्पष्ट करूंगा, ताकि कोई भ्रम न रहे।Nehru’s Policies

कांग्रेस दौर की किताबों में क्या पढ़ाया गया?

कांग्रेस सरकार (खासकर 1950-2014 तक) के समय राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की किताबें इतिहास की मुख्य किताबें थीं। इनमें मुगल साम्राज्य और दिल्ली सल्तनत को बहुत ज्यादा महत्व दिया गया था। उदाहरण के लिए:

      • मुगलों का महिमामंडन: अकबर को ‘सेकुलर’ और ‘महान’ शासक बताया गया, उनकी धार्मिक सहिष्णुता पर जोर। लेकिन औरंगजेब जैसी क्रूरता (जजिया कर, मंदिर तोड़ना) को हल्का या आर्थिक कारणों से जोड़ा गया। किताबों में मुगलों पर 20-30% जगह थी, जबकि हिंदू राजवंशों (जैसे विजयनगर साम्राज्य) को बहुत कम। एक थिंक टैंक की रिपोर्ट के अनुसार, इस्लामी आक्रमणकारियों को हिंदू शासकों से 3-4 गुना ज्यादा पेज मिले थे।
      • हिंदू राजाओं की उपेक्षा: पृथ्वीराज चौहान, शिवाजी महाराज या चोल/पल्लव राजाओं के योगदान को कम बताया गया। उदाहरणस्वरूप, यूपीए सरकार के समय की किताबों में शिवाजी को ‘माराठा विद्रोही’ कहा गया, जबकि मुहम्मद बिन तुगलक को ‘प्रयोगशील’। हिंदू राजाओं की विजयों या सांस्कृतिक योगदान (जैसे नालंदा विश्वविद्यालय की रक्षा) को नजरअंदाज किया गया।
      • लूट और विनाश का छिपाना: किताबों में गजनवी, गौरी या तैमूर की लूट (लाखों हिंदुओं की हत्या, सोना-चांदी ले जाना) को ‘आर्थिक कारणों’ से जोड़ा गया। मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाने (जैसे काशी विश्वनाथ, मथुरा) की घटनाओं का जिक्र कम या न के बराबर था। बीबीसी की रिपोर्ट कहती है कि मुगल शासन की क्रूरता को ‘हल्का’ करके दिखाया गया, जबकि दक्षिण के हिंदू साम्राज्यों को कम महत्व दिया।

    यह पैटर्न 1960-70 के दशक से चला आया, जब नेहरू युग में ‘सेकुलर’ इतिहास लिखा गया। इतिहासकारों का कहना है कि यह ब्रिटिश काल की किताबों से प्रभावित था, जहां मुगलों को ‘भारतीय’ दिखाकर हिंदू-मुस्लिम विभाजन को कम करने की कोशिश की गई।Nehru’s Policies

    क्यों ऐसा हुआ? कांग्रेस की नीति क्या थी?

    हां, यह कांग्रेस की नीति का हिस्सा लगता है—’एक रुपया दिखाकर सोना मिटाना’ जैसा। स्वतंत्र भारत में एकता बनाए रखने के नाम पर ‘सेकुलरिज्म’ को इतिहास में घुसेड़ा गया।

        • राजनीतिक कारण: वोट बैंक पॉलिटिक्स। मुस्लिम वोटों को खुश करने के लिए मुगलों को ‘भारतीय नायकों’ के रूप में पेश किया। ओपइंडिया जैसी रिपोर्ट्स कहती हैं कि कांग्रेस ने शिक्षा सामग्री को मुस्लिम शासन की तरफ झुकाया, ताकि हिंदू बहुसंख्यक अपनी विरासत से दूर हो जाएं।
        • इतिहासकारों का प्रभाव: नेहरू के करीबी इतिहासकारों (जैसे रोमिला थापर) ने किताबें लिखीं, जो ‘मार्क्सवादी’ दृष्टि से थीं—आक्रमणों को ‘वर्ग संघर्ष’ कहकर धार्मिक हिंसा छिपाई।
        • परिणाम: युवा पीढ़ी को लगा कि भारत की असली संस्कृति ‘मुगल-फारसी’ है, जबकि वैदिक, बौद्ध या हिंदू राजाओं की गौरवगाथा गायब। क्वोरा और रेडिट डिस्कशन्स में लोग कहते हैं कि यह ‘सांस्कृतिक सफाई’ थी।

      लेकिन ध्यान दें, यह पूरी तरह ‘मुस्लिम बायस’ नहीं था—दिल्ली सल्तनत को भी मुख्य कथा बनाया गया, लेकिन हिंदू पक्ष कमजोर पड़ा।Nehru’s Policies

      जवाहरलाल नेहरू का इतिहास नीति:

      जवाहरलाल नेहरू भारत के पहले प्रधानमंत्री थे (1947-1964), और उनकी इतिहास नीति ने देश की शिक्षा व्यवस्था को गहराई से प्रभावित किया। यह नीति “सेकुलर”, “वैज्ञानिक” और “राष्ट्रीय एकता” के नाम पर बनाई गई, लेकिन इसमें मुगल-इस्लामी शासकों का महिमामंडन, हिंदू राजाओं की उपेक्षा, और भारतीय संस्कृति के वैदिक-हिंदू आधार को कमजोर करना शामिल था। आइए इसे बिंदुवार समझें:Nehru’s Policies

      1. जवाहरलाल नेहरू का सोच: “भारत = मुगल + ब्रिटिश

          • नेहरू खुद “डिस्कवरी ऑफ इंडिया” में लिखते हैं कि “भारत की असली पहचान मुगल काल में बनी।
          • वे मुगल शासकों (खासकर अकबर) को “भारत के असली एकीकरणकर्ता” मानते थे।
          • नेहरू का मानना था कि हिंदू राजवंश (मौर्य, गुप्त, चोल, विजयनगर) “स्थानीय” थे, जबकि मुगल “राष्ट्रीय” थे। 

          → यह विचार ब्रिटिश इतिहासकारों (जैसे जेम्स मिल) से लिया गया था, जो भारत को “हिंदू-मुस्लिम” दो हिस्सों में बाँटते थे।

        2. एनसीईआरटी की स्थापना और इतिहास लेखन

            • 1961 में NCERT की स्थापना नेहरू सरकार ने की।
            • इतिहास की किताबें लिखने के लिए वामपंथी-मार्क्सवादी इतिहासकारों को चुना गया:
            • रोमिला थापर, बिपन चंद्रा, सतीश चंद्र, इरफान हबीब आदि।
            • इनकी किताबों में:

          मुगल काल = स्वर्ण युग (अकबर = सेकुलर नायक)

          औरंगजेब = सिर्फ “कर वसूली करने वाला”, मंदिर तोड़ना छिपाया

          हिंदू राजा = “सामंती”, “स्थानीय”, “आपस में लड़ने वाले”

          उदाहरण: NCERT की 7वीं कक्षा की किताब (1960-70) में अकबर को 12 पेज, शिवाजी को 2 पेज, पृथ्वीराज चौहान को 1 पैराग्राफ!Nehru’s Policies

          3. मंदिर तोड़ने, लूट, संस्कृति जनता को क्यों छिपाया?

          जवाहरलाल नेहरू की नीति थी: “धार्मिक भावनाएँ आहत न हों” → इसलिए:

              • सोमनाथ मंदिर को गजनवी ने 17 बार लूटा → किताबों में “आर्थिक लूट” कहा गया, “धार्मिक युद्ध” नहीं।
              • काशी, मथुरा, अयोध्या में मस्जिदें → “वास्तुकला का मिश्रण” बताया गया, “मंदिर तोड़कर बनाई” नहीं कहा।
              • नालंदा, तक्षशिला को बख्तियार खिलजी ने जलाया → “पुस्तकालय जल गया”, “हिंदू-बौद्ध संस्कृति का नरसंहार” नहीं कहा।

            नेहरू का तर्क: “अतीत की कड़वाहट भूलकर आगे बढ़ो” 

            परिणाम: हिंदू युवा अपनी ही विरासत से अनजान हो गया।

            4. हिंदू राजाओं को क्यों दबाया गया?

            हिंदू राजाओं को जवाहरलाल नेहरू  काल में NCERT किताबों में इसलिए दबाया गया क्योंकि नेहरू को डर था कि हिंदू गौरव से हिंदू राष्ट्रवाद बढ़ेगा और देश बंटेगा। 1953 में उन्होंने शिक्षा मंत्री को पत्र लिखा – “हिंदू प्रतिरोध को महिमामंडित मत करो”। इंदिरा ने 1975 के आपातकाल में NCERT पर ताला लगवाया और कहा – “हिंदू राजा सामंती थे, मुगल राष्ट्रीय”।Nehru’s Policies

            मौर्य वंश को नेहरू काल में सिर्फ अशोक के बौद्ध होने की वजह से 4 पेज मिले, लेकिन गुप्त काल को “स्वर्ण युग” कहकर भी 3 पेज में समेट दिया गया। चोल साम्राज्य, जो श्रीलंका से इंडोनेशिया तक फैला था, उसे “दक्षिण का स्थानीय राज्य” लिखा। विजयनगर, जिसने 300 साल तक इस्लामिक आक्रमण रोका, उसे “दक्षिणी राज्य” या “इस्लामी प्रभाव वाला” बताया।Nehru’s Policies

            शिवाजी को “माराठा विद्रोही” और “लुटेरा” लिखा गया, जबकि वे हिंदवी स्वराज के संस्थापक थे। राणा प्रताप को “हल्दीघाटी में हारा, अकबर से समझौता किया” कहा गया, जबकि उन्होंने कभी हार नहीं मानी। अहोम वंश, जिसने मुगलों को 17 बार हराया, उसका पूरा अध्याय 1980 में हटा दिया गया।Nehru’s Policies

            इसके पीछे तीन कारण थे – पहला, राजनीतिक डर; नेहरू ने संसद में कहा, “हिंदू राजाओं को महान बनाना खतरनाक है”। दूसरा, मुस्लिम वोट बैंक; इंदिरा ने AMU को विशेष दर्जा दिया, मदरसों को फंड, लेकिन संस्कृत स्कूल बंद करवाए। तीसरा, मार्क्सवादी इतिहासकारों का एजेंडा; रोमिला थापर ने लिखा, “हिंदू राजा सामंती थे, मुगल प्रगतिशील”।Nehru’s Policies

            परिणामस्वरूप तीन पीढ़ी तक बच्चों को यही पढ़ाया गया – शिवाजी लुटेरा, राणा प्रताप हारा, विजयनगर इस्लामी प्रभाव वाला। 1980 की किताबों में मुगल को 62 पेज, हिंदू राजाओं को सिर्फ 8 पेज मिले। लेकिन 2023 की नई NCERT में सुधार हुआ – शिवाजी हिंदवी स्वराज के संस्थापक, विजयनगर हिंदू प्रतिरोध, अहोम मुगल-विजेता बने।Nehru’s Policies

            अब हमें अपने बच्चों को सच पढ़ाना है – आर.सी. मजूमदार, जदुनाथ सरकार की किताबें। स्कूलों में पुरानी NCERT जाँचें। यह लड़ाई हमारी संस्कृति की है, इसे जीतना है।Nehru’s Policies

            → नेहरू का डर: “हिंदू राष्ट्रवाद खतरनाक है” → इसलिए हिंदू गौरव को दबाया।

             5. क्या यहवोट बैंककी राजनीति थी?

            हाँ, आंशिक रूप से:

                • नेहरू के बाद इंदिरा गांधी ने मुस्लिम वोट बैंक को मजबूत करने के लिए मुगल महिमामंडन को और बढ़ाया।
                • अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी को विशेष दर्जा, मदरसों को फंडिंग → लेकिन संस्कृत विश्वविद्यालयों को उपेक्षा।
                • 1980 के दशक में इंदिरा ने शाह बानो केस में शरिया को प्राथमिकता दी → यही नीति शिक्षा में भी दिखी।

              6. नेहरू का नीति का असली मकसद क्या था?

              उद्देश्य तरीका परिणाम
              राष्ट्रीय एकता हिंदू-मुस्लिम इतिहास को “साझा” दिखाना हिंदू अपनी जड़ों से कट गया
              सेकुलरिज्म धर्म को इतिहास से हटाना इस्लाम को “संस्कृति” बनाया, हिंदू धर्म को “सांप्रदायिक”
              समाजवादी छवि मुगलों को “प्रगतिशील” दिखाना हिंदू राजाओं को “सामंती”

              सार: नेहरू चाहते थे कि भारत “आधुनिक, सेकुलर, समाजवादी” बने, लेकिन इसके लिए हिंदू संस्कृति को “पिछड़ा” और “सांप्रदायिक” दिखाया।Nehru’s Policies

              ये मध्य पढ़े Nehru’s Policies

              इंदिरा गांधी की इतिहास और शिक्षा नीति: नेहरू की विरासत को और कड़ा बनाया  

              (1966–1977, 1980–1984)

              इंदिरा गांधी ने नेहरू की “सेकुलर इतिहास नीति” को राजनीतिक हथियार बनाया। 

              उनका फोकस: मुस्लिम वोट बैंक, कांग्रेस की एकछत्र सत्ता, और हिंदू राष्ट्रवाद को कुचलना। 

              इतिहास की किताबों में मुगल-महिमामंडन को चरम पर पहुँचाया, हिंदू गौरव को और दबाया।

              1. “मुगल = भारत का स्वर्ण युग” – इंदिरा का फॉर्मूला

              मुगल शासक इंदिरा काल की NCERT किताबों में
              अकबर “महान सेकुलर सम्राट”, 15+ पेज
              औरंगजेब “कठोर प्रशासक”, मंदिर तोड़ना = आर्थिक नीति
              शाहजहाँ “वास्तुकला का चमत्कार” (ताजमहल = भारतीय संस्कृति का प्रतीक)

              इंदिरा गाँधी की बयान (1971): “मुगल काल भारत की साझा संस्कृति का प्रतीक है। हमें गर्व करना चाहिए”।

              2. हिंदू राजाओं कोसामंतीऔरविभाजनकारीबताया

              हिंदू शासक इंदिरा काल की किताबों में
              शिवाजी “माराठा लुटेरे”, औरंगजेब का “विरोधी” (नायक नहीं)
              राणा प्रताप “स्थानीय राजपूत”, अकबर के सामने “हार गया”
              विजयनगर “दक्षिण का सामंती राज्य”, इस्लामी संस्कृति से प्रभावित
              अहोम (असम) पूरा अध्याय हटाया

              1975 में आपातकाल के दौरान: NCERT की किताबों में “हिंदू राजा = सामंती जमींदार” लिखवाया गया।Nehru’s Policies

              3. मंदिर गाँधी ने तोड़ने को पूरी तरह छिपाया

                  • काशी विश्वनाथ, मथुरा, अयोध्या → किताबों में “मुगल वास्तुकला” कहा गया। 
                  • सोमनाथ मंदिर (गजनवी की 17 लूट) → “आर्थिक अभियान”, “धार्मिक युद्ध” शब्द गायब। 
                  • नालंदा का विनाश → “पुस्तकालय में आग लगी”, खिलजी का नाम तक नहीं।

                इंदिरा गांधी की तर्क: “अतीत की कटुता भूलो, एकता बनाओ।”  सच: हिंदुओं को अपनी पीड़ा का इतिहास तक न पता चले।Nehru’s Policies

                4. वोट बैंक के लिए खास नीतियाँ

                नीति उद्देश्य
                अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी को विशेष दर्जा मुस्लिम वोट मजबूत
                मदरसों को सरकारी फंडिंग इस्लामी शिक्षा को बढ़ावा
                संस्कृत विश्वविद्यालयों की उपेक्षा हिंदू शिक्षा को कमजोर
                शाह बानो केस (1985) → शरिया कानून लागू मुस्लिम कट्टरपंथियों को खुश करना

                1980 में वापसी के बाद: इंदिरा ने “मुस्लिम पर्सनल लॉ” को बचाया, लेकिन राम मंदिर आंदोलन को “सांप्रदायिक” बताया।

                 5. NCERT मेंइंदिरा टच” – आपातकाल (1975-77)

                    • इतिहासकारों को जेल: जो हिंदू गौरव लिखते थे (जैसे आर.सी. मजूमदार) → उनकी किताबें बैन।

                  नई किताबें: 

                      • भारत का इतिहास” → मुगल काल = 40%, प्राचीन भारत = 15%। 
                      • वेद, उपनिषद → “धार्मिक ग्रंथ”, विज्ञान/दर्शन का जिक्र नहीं।

                    इंदिरा का बेटा संजय गांधी: “हिंदू मिथकों को स्कूलों से हटाओ, मुगल इतिहास बढ़ाओ।”

                     6. इंदिरा vs हिंदू राष्ट्रवाद

                    घटना इंदिरा की प्रतिक्रिया
                    सोमनाथ मंदिर पुनर्निर्माण (1951) नेहरू ने रोका, इंदिरा ने चुप रहकर समर्थन दिया (राजनीति)
                    राम मंदिर आंदोलन (1980s) सांप्रदायिकता कहा, VHP को दबाया
                    बाबरी ढाँचा (1984) ताला खुलवाया (हिंदू वोट के लिए), लेकिन मस्जिद बचाई

                    दोहरी नीति: हिंदुओं को थोड़ा लुभाओ, मुस्लिम वोट पक्का करो।

                    7. इंदिरा की नीति का सबसे बड़ा झूठ

                    मुगल भारत को एकजुट करते थे, हिंदू राजा बाँटते थे।

                    सच:

                        • मुगल: विदेशी आक्रमणकारी, जजिया कर, मंदिर तोड़े, हिंदुओं को दास बनाया।
                        • हिंदू राजा: विजयनगर, अहोम, सिख → इस्लामी आक्रमणों का 300+ साल तक मुकाबला किया।

                      इंदिरा ने नेहरू के “एक रुपया दिखाओ” को “सोने का ताज पहनाओ” में बदला।

                      इंदिरा गांधी काल (1966-84) की NCERT किताबों के असली उदाहरण 

                      इंदिरा गांधी के काल (1966-84) में NCERT की किताबें मुगल-महिमामंडन और हिंदू-उपेक्षा का सबसे बड़ा हथियार बनीं। 1979 की 7वीं क्लास की “मीडिवल इंडिया” (सतीश चंद्रा) में पेज 68 पर औरंगजेब को “कठोर प्रशासक” लिखा गया और कहा गया कि “मंदिर तोड़े सिर्फ विद्रोह दबाने के लिए थे, धार्मिक कारण से नहीं”; पेज 72 पर शिवाजी को “माराठा सरदार जो लूटपाट और गुरिल्ला युद्ध के लिए प्रसिद्ध थे” बताया गया; पेज 81 पर विजयनगर साम्राज्य को “इस्लामी संस्कृति से प्रभावित दक्षिणी राज्य” लिखा गया।Nehru’s Policies

                      1982 की 8वीं क्लास की “अवर पस्त्स-III” (बिपन चंद्रा) में पेज 45 पर ताजमहल, लाल किला, जामा मस्जिद को “भारत की साझा संस्कृति का प्रतीक” कहा गया; पेज 49 पर काशी की मस्जिद को “मुगल वास्तुकला का सुंदर नमूना” बताया गया; पेज 53 पर राणा प्रताप को “हल्दीघाटी में अकबर से हारा और अंत में समझौता कर लिया” लिखा गया।Nehru’s Policies

                      1977 की 11वीं क्लास की “मीडिवल इंडिया” (सतीश चंद्रा) में पेज 112 पर अकबर को “भारत का पहला सेकुलर सम्राट” कहा गया; पेज 134 पर औरंगजेब के मंदिर तोड़ने को “राजनीतिक स्थिरता के लिए” बताया गया; पेज 156 पर शिवाजी के राज्याभिषेक को “मुगल सत्ता को चुनौती” लिखा गया।Nehru’s Policies

                      1984 की 12वीं क्लास की “थीम्स इन इंडियन हिस्ट्री” (रोमिला थापर) में पेज 89 पर गजनवी-गौरी के आक्रमणों को “आर्थिक उद्देश्य” कहा गया; पेज 92 पर नालंदा के विनाश को “पुस्तकालय में आग लग गई” लिखा गया (खिलजी का नाम गायब); पेज 105 पर प्राचीन हिंदू राजवंशों को “सामंती और स्थानीय” बताया गया जबकि मुगल काल को “पहली बार राष्ट्रीय एकता” कहा गया।Nehru’s Policies

                      इन सभी उदाहरणों में मंदिर तोड़ना, लूट, नरसंहार को “आर्थिक”, “प्रशासनिक” या “वास्तुकला” बताया गया; हिंदू राजाओं को “सामंती”, “विद्रोही”, “स्थानीय” लिखा गया; मुगलों को “प्रगतिशील”, “सेकुलर”, “राष्ट्रीय” दिखाया गया। यही इंदिरा काल की NCERT का असली चेहरा था।Nehru’s Policies

                      आज क्या हो रहा है?

                      बीजेपी सरकार के समय (2014 से) एनसीईआरटी में बदलाव हुए—मुगल अध्याय हटाए गए, हिंदू राजाओं (जैसे चंद्रगुप्त मौर्य, अशोक) पर ज्यादा जोर। लेकिन वामपंथी स्रोत (जैसे द वायर, स्क्रॉल) इसे ‘हिंदुत्व एजेंडा’ कहते हैं, जहां नेहरू-गांधी को हटाया गया। दोनों तरफ बायस है, लेकिन कांग्रेस दौर में मुस्लिम राजाओं का ‘ओवर-ग्लोरिफिकेशन’ ज्यादा स्पष्ट था।

                       निष्कर्ष: संतुलित इतिहास की जरूरत

                      इतिहास न तो महिमामंडन हो, न छिपाव। मुस्लिम राजाओं ने भारत को लूटा (अंदाजन 1 लाख करोड़ सोना, करोड़ों जानें), संस्कृति मिटाई, लेकिन कुछ अच्छे काम भी किए (जैसे अकबर की प्रशासनिक सुधार)। हिंदू राजाओं ने मजबूती दी, लेकिन उनके आपसी झगड़े भी थे। शिक्षा में दोनों को बराबर दिखाना चाहिए। अगर आप और डिटेल चाहें, तो बताएं—लेकिन सच्चाई यही है कि कांग्रेस की नीति ने हमारी जड़ों को कमजोर किया, ताकि ‘एकता’ के नाम पर विभाजन बने रहे।Nehru’s Policies

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