🌺 जगन्नाथ का चक्र: कालापहाड़ का विनाश और नवकलेवर का पुनर्जन्म
(Jagannath and Kalapahad History with Nabakalebara )
✨ प्रस्तावना
पुरी का जगन्नाथ मंदिर भारत का सबसे बड़ा जीवंत आस्था केंद्र है। जहां एक तरफ़ कालापहाड़ जैसे आक्रांताओं ने इसकी जड़ों को हिलाने की कोशिश की, वहीं दूसरी ओर हर 12–19 वर्षों में होने वाला नवकलेवर उत्सव इस बात का प्रतीक है कि संस्कृति टूटती नहीं, पुनर्जन्म लेती है। Jagannath and Kalapahad
🔥 कालापहाड़: विनाश का चेहरा
👉कालापहाड़ और नवकलेवर का इतिहास :
कालापहाड़ बंगाल के सुल्तान सुलेमान कररानी का सेनापति था। कुछ लोककथाओं के अनुसार वह पहले हिंदू ब्राह्मण या कायस्थ था, जिसने प्रेम विवाह के लिए इस्लाम स्वीकार कर लिया और “कालापहाड़” बना – एक ऐसा नाम जो आज भी उड़ीसा के जनमानस में भय और क्रोध का प्रतीक है।
External Source:
🔗 कालापहाड़ का ऐतिहासिक दस्तावेज
🔗 Shree Jagannath Official Portal
✅ पुरी मंदिर पर कालापहाड़ का आक्रमण
⚔️ मंदिरों पर हमला
सन 1568 में कालापहाड़ ने पुरी सहित ओडिशा के कई मंदिरों पर हमला किया।
- भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा की मूर्तियाँ तोड़ी गईं
- मूर्तियों को आग में जलाने और नदी में फेंकने का प्रयास किया गया
- सूर्य मंदिर को भी क्षतिग्रस्त किया गया
| घटना | विवरण |
|---|---|
| मूर्ति की सुरक्षा | पुरी के पुजारियों ने मुख्य मूर्तियाँ चिल्का झील के एक द्वीप में छुपाईं । |
| मार्गदर्शक पहचानें | कथाएँ बताती हैं कि कालापाहड़ ने मूर्तियों को नदी के किनारे लाकर आग लगा दी । |
| ब्रह्मपदार्थ की रक्षा | भक्त बीसरा मोहन्ती ने राख से मूल ब्रह्म को एक मृदंग में बचा लिया और उसे कुजंग पहुंचाया । |
| ब्रह्मपदार्थ की पुनःस्थापना | रामचंद्र देव I (1571–72) ने इसका पुन:संस्कार करवाकर पुरी लौटाया । |
🙏 ब्रह्म का बचाव
जब मूर्तियों का नाश किया गया, तब पुजारियों और भक्तों ने “ब्रह्म पदार्थ” को सुरक्षित कर लिया – यह वही दिव्य तत्व है जो भगवान की आत्मा माना जाता है। उसे चुपचाप मृदंग में छुपाकर कुजंग ले जाया गया।
🌿नवकलेवर: पुनर्जन्म का महोत्सव
जगन्नाथ मूर्ति बदलना, नव मूर्ति निर्माण, ब्रह्मा पदार्थ क्या है ?
नवकलेवर का अर्थ है “नया शरीर”। भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहन हर 12-19 वर्षों में नई मूर्तियों में प्रकट होते हैं। यह परिवर्तन जोडा आषाढ़ वर्ष में होता है।
🔍नवकलेवर प्रक्रिया और ब्रह्म का स्थानांतरण
🌿 नवकलेवर: पुनर्जन्म की प्रक्रिया
📅 नवकलेवर क्या है?
“नवकलेवर” का अर्थ है “नया शरीर धारण करना”। यह उत्सव तब मनाया जाता है जब आषाढ़ मास में दो पूर्णिमा आती हैं (प्रत्येक 12–19 वर्षों में)। इसमें भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहन की नई मूर्तियाँ पवित्र नीम वृक्ष से बनाई जाती हैं।
🕉️ 12 पवित्र चरण
- बनजागा यात्रा – पवित्र वृक्षों की खोज
- दरु वृक्ष की पहचान – विशिष्ट चिह्नों से
- वृक्ष का कटाव और मूर्ति निर्माण
- कोइलि वैकुंठ में मूर्तियों की स्थापना
- ब्रह्मपदार्थ का स्थानांतरण – पूर्ण गोपनीयता में
- पुरानी मूर्तियों का विसर्जन
- नव मूर्तियों का सार्वजनिक दर्शन
🔮 ब्रह्म का रहस्य
नवकलेवर का सबसे रहस्यमय चरण होता है – ब्रह्मपदार्थ का एक मूर्ति से दूसरी में स्थानांतरण, जो केवल चार विशेष सेवक पुजारियों द्वारा रात के अंधेरे में, आंखों पर पट्टी और दस्तानों सहित करते हैं। यह दुनिया के सबसे गूढ़ धार्मिक रहस्यों में से एक है।
🔗 पुरी मंदिर का नवकलेवर विवरण
🔄 कालापहाड़ और नवकलेवर: विरोध और विजय
जहां कालापहाड़ विनाश का प्रतीक बना, वहीं नवकलेवर जगन्नाथ संस्कृति का पुनर्जन्म है।
- कालापहाड़ ने मूर्तियाँ जलाईं
- भक्तों ने ब्रह्म को बचाया
- रामचंद्र देव प्रथम ने पुनः मूर्तियाँ बनवाकर प्रतिष्ठा की
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कालापहाड़ और नवकलेवर का इतिहास पुरी के गौरवशाली अतीत का जीवंत प्रमाण है।
पुरी में कालापहाड़ का हमला और नवकलेवर का पुनरुत्थान एक साथ विनाश और पुनर्जन्म का परिचायक हैं।
📣निष्कर्ष
कालापहाड़ ने जो तोड़ा, नवकलेवर ने उसे जोड़ा।
पुरी का जगन्नाथ मंदिर हर बार यही बताता है –
“मैं मूर्ति नहीं, मैं चेतना हूँ,
जो हर युग में फिर से जन्म लूँगा।”
Jagannath and Kalapahad
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