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Toggleवैश्विक भू-राजनीति: 2025 में उभरते रुझान और भारत की भूमिका | Global Geopolitics: Emerging Trends and India’s Role in 2025 .
परिचय
2025 का वर्ष भू-राजनीति के दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ है। वैश्विक शक्ति संतुलन में तेजी से हो रहे बदलाव, क्षेत्रीय तनाव, आर्थिक अनिश्चितताएँ, और उभरती प्रौद्योगिकियों ने विश्व व्यवस्था को नया आकार दिया है।
भारत, जो अब एक उभरती हुई वैश्विक शक्ति के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत कर रहा है, इन बदलावों के केंद्र में है। यह लेख हाल के भू-राजनीतिक रुझानों, उनके भारत पर प्रभाव, और वैश्विक मंच पर भारत की रणनीतिक भूमिका का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है। इसमें भारत-पाकिस्तान तनाव, भारत-चीन संबंध, मध्य पूर्व में अस्थिरता, वैश्विक व्यापार युद्ध, रूस-यूक्रेन संघर्ष, और तकनीकी प्रगति जैसे प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की गई है।
1. भारत-पाकिस्तान तनाव: नया दौर और क्षेत्रीय प्रभाव
भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव 2025 में फिर से गहरा गया है। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए एक आतंकी हमले, जिसमें 26 लोग मारे गए, ने दोनों देशों के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंधों को और जटिल बना दिया। भारत ने इस हमले को पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद से जोड़ा, जिसके परिणामस्वरूप कूटनीतिक तनाव बढ़ गया।
पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज में 2.12% की गिरावट इस तनाव का आर्थिक परिणाम थी। इसके अलावा, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI द्वारा दो आतंकी संगठनों को एकजुट करने की खबरों ने भारत की सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया। पीओके में मोस्ट वांटेड आतंकी मसूद अजहर के खुलेआम घूमने की खबरों ने भारत को और सतर्क कर दिया।
भारत की कूटनीतिक और सैन्य प्रतिक्रिया
भारत ने इन घटनाओं के जवाब में अपनी रक्षा नीति को और सुदृढ़ किया है। सीमा पर ड्रोन और AI-आधारित निगरानी प्रणालियों का उपयोग बढ़ाया गया है। रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में स्वदेशी ड्रोन तकनीक में ₹50,000 करोड़ के निवेश की घोषणा की, जिसका उद्देश्य सीमा सुरक्षा को और मजबूत करना है। इसके साथ ही, भारत ने संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान के आतंकवाद-प्रायोजित गतिविधियों को उजागर करने के लिए कूटनीतिक दबाव बढ़ाया है।
भारत ने अपनी ऊर्जा और रक्षा नीति में रणनीतिक स्वायत्तता पर जोर दिया है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को प्राथमिकता देगा, भले ही इसके लिए रूस या अन्य गैर-पश्चिमी देशों के साथ व्यापार करना पड़े। NATO प्रमुख मार्क रुटे की “100% सेकेंडरी सैंक्शन्स” की धमकी को भारत ने खारिज कर दिया, जिससे भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की झलक मिलती है।
क्षेत्रीय प्रभाव
इस तनाव का दक्षिण एशिया की स्थिरता पर गहरा प्रभाव पड़ा है। अफगानिस्तान में तालिबान शासन के साथ पाकिस्तान के बढ़ते संबंधों ने भारत को अपनी क्षेत्रीय रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया है। भारत ने अफगानिस्तान में मानवीय सहायता और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के माध्यम से अपनी उपस्थिति बनाए रखने की कोशिश की है, लेकिन सुरक्षा चुनौतियाँ बनी हुई हैं।
2. भारत-चीन संबंध: LAC पर तनाव और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा
भारत और चीन के बीच लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव 2025 में भी जारी रहा। हाल के महीनों में, चीन द्वारा 200 वर्ग किमी क्षेत्र में अतिक्रमण की खबरें सामने आई हैं, जिसे भारत ने गंभीरता से लिया है। गलवान घाटी में 2020 के संघर्ष के बाद, जिसमें 20 भारतीय जवान शहीद हुए थे, भारत ने अपनी सैन्य तैयारियों को और मजबूत किया है। 19 दौर की सैन्य वार्ता के बावजूद, कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
भारत की सैन्य और कूटनीतिक रणनीति
भारत ने LAC पर अपनी सैन्य उपस्थिति को और बढ़ाया है। भारतीय सेना ने हाल ही में लद्दाख में 10,000 अतिरिक्त सैनिकों को तैनात किया और उन्नत ड्रोन, सैटेलाइट निगरानी, और साइबर युद्ध क्षमताओं को अपनाया। इसके साथ ही, भारत ने क्वाड (भारत, अमेरिका, जापान, और ऑस्ट्रेलिया) के माध्यम से अपनी रणनीतिक साझेदारियों को मजबूत किया है ताकि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित किया जा सके।
चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के जवाब में, भारत ने क्षेत्रीय कनेक्टिविटी परियोजनाओं, जैसे कि चाबहार बंदरगाह और इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC), में निवेश बढ़ाया है। ये परियोजनाएँ भारत को मध्य एशिया और यूरोप के साथ जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
आर्थिक प्रतिस्पर्धा
भारत और चीन के बीच आर्थिक प्रतिस्पर्धा भी तेज हुई है। 2025 में, भारत ने अपनी आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए कई नीतियाँ लागू की हैं। चीनी आयात पर निर्भरता कम करने के लिए भारत ने इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मास्युटिकल्स जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाया है। हालांकि, चीन के साथ $100 बिलियन से अधिक का व्यापार घाटा भारत के लिए एक चुनौती बना हुआ है।
3. मध्य पूर्व में उथल-पुथल: वैश्विक ऊर्जा संकट
मध्य पूर्व में 2025 में भू-राजनीतिक अस्थिरता चरम पर रही। इजरायल-ईरान तनाव, यमन में हूती विद्रोहियों पर अमेरिकी हवाई हमले, और सीरिया में चल रहे गृहयुद्ध ने क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है। हूती नेता अब्दुल-मलिक अल-हूती ने लाल सागर में शिपिंग लेन को बाधित करने की धमकी दी है, जिसके कारण वैश्विक तेल की कीमतें 10% तक बढ़ गई हैं।
भारत पर प्रभाव
भारत, जो अपनी तेल आपूर्ति का 80% से अधिक मध्य पूर्व से आयात करता है, ने इस संकट के बीच अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए रणनीतिक कदम उठाए हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पूरी ने आश्वासन दिया कि भारत में तेल की आपूर्ति बाधित नहीं होगी।
भारत ने रूस से तेल आयात को 11 महीने के उच्च स्तर 2.08 मिलियन बैरल प्रति दिन तक बढ़ाया है। इसके साथ ही, भारत ने सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे पारंपरिक साझेदारों के साथ दीर्घकालिक अनुबंधों को मजबूत किया है।
भारत की कूटनीति
भारत ने मध्य पूर्व में तटस्थ रुख बनाए रखा है। इजरायल और फिलिस्तीन के बीच तनाव पर भारत ने दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन किया है, जबकि ईरान के साथ अपने आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को बनाए रखा है। चाबहार बंदरगाह परियोजना, जिसमें भारत ने $500 मिलियन का निवेश किया है, भारत को मध्य पूर्व और मध्य एशिया में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक लाभ प्रदान करती है।
4. वैश्विक व्यापार युद्ध: आर्थिक भू-राजनीति
2025 में वैश्विक व्यापार युद्ध ने भू-राजनीति को और जटिल बना दिया। अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते व्यापार तनाव, विशेष रूप से डोनाल्ड ट्रम्प की आक्रामक व्यापार नीतियों के कारण, ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को प्रभावित किया है। चीन ने अमेरिकी सामानों पर 84% प्रतिशोधी टैरिफ लगाए, जिसके जवाब में भारत ने अमेरिका के साथ $500 बिलियन द्विपक्षीय व्यापार के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सकारात्मक बातचीत शुरू की।
भारत की स्थिति
भारत ने इस व्यापार युद्ध में तटस्थ रुख अपनाया है, लेकिन अपनी आर्थिक वृद्धि को बनाए रखने के लिए रणनीतिक कदम उठाए हैं। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने जून 2025 में भारतीय इक्विटी में 14,590 करोड़ रुपये का निवेश किया, जो वैश्विक तरलता और RBI के दर कटौती के कारण संभव हुआ। हालांकि, जुलाई की शुरुआत में 1,421 करोड़ रुपये की निकासी ने बाजार में अस्थिरता को दर्शाया।
भारत ने ASEAN देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया है। इसके साथ ही, भारत ने अपनी डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए 5G और AI तकनीकों में निवेश बढ़ाया है। सिंगापुर के टेमासेक जैसे निवेशकों ने भारत की डिजिटल और सतत विकास परियोजनाओं में $10 बिलियन का निवेश किया है।
5. रूस-यूक्रेन संघर्ष: वैश्विक प्रभाव और भारत की भूमिका
रूस-यूक्रेन युद्ध 2025 में अपने तीसरे वर्ष में प्रवेश कर चुका है, और इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ा है। खाद्य और ऊर्जा की कीमतों में वृद्धि ने विकासशील देशों को विशेष रूप से प्रभावित किया है। भारत ने इस संघर्ष में तटस्थता बनाए रखी है, लेकिन रूस के साथ अपने आर्थिक और रक्षा संबंधों को मजबूत किया है।
भारत की रणनीति
रूसी तेल आयात में वृद्धि और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा की योजना ने भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को रेखांकित किया है। भारत ने रूस के साथ अपनी ऊर्जा साझेदारी को बनाए रखने के लिए यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों को मानने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही, भारत ने G7 और G20 जैसे मंचों पर शांति और वैश्विक खाद्य सुरक्षा जैसे मुद्दों पर जोर दिया है।
भारत की मध्यस्थता की संभावना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस और यूक्रेन के बीच मध्यस्थता की संभावना पर विचार किया है। भारत ने दोनों पक्षों के साथ अपने संबंधों का उपयोग करके शांति वार्ता को बढ़ावा देने की कोशिश की है। हालांकि, इस दिशा में अभी तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।
6. उभरती प्रौद्योगिकी: भू-राजनीति का नया आयाम
AI, ड्रोन, और साइबर युद्ध जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों ने 2025 में भू-राजनीति को एक नया आयाम दिया है। यूरोपीय संघ और उसके सदस्य देश ड्रोन और AI में अनुसंधान और विकास को बढ़ाने के लिए दौड़ में शामिल हो गए हैं। भारत भी इस दौड़ में पीछे नहीं है और अपनी रक्षा और निगरानी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए इन तकनीकों का उपयोग कर रहा है।
भारत का योगदान
भारत ने ड्रोन तकनीक में निवेश बढ़ाया है, विशेष रूप से सीमा निगरानी और आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने हाल ही में एक स्वदेशी AI-आधारित निगरानी प्रणाली विकसित की है, जो वास्तविक समय में सीमा उल्लंघनों का पता लगा सकती है। इसके साथ ही, भारत ने साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नीति को अपडेट किया है।
वैश्विक प्रभाव
उभरती प्रौद्योगिकियों ने भू-राजनीतिक शक्ति संतुलन को प्रभावित किया है। अमेरिका और चीन के बीच AI और क्वांटम कंप्यूटिंग की दौड़ ने वैश्विक प्रौद्योगिकी नेतृत्व के लिए प्रतिस्पर्धा को तेज कर दिया है। भारत ने इस क्षेत्र में अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए स्टार्टअप्स और अनुसंधान संस्थानों को प्रोत्साहित किया है।
7. भारत की आर्थिक संभावनाएँ और वैश्विक स्थिति
वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद, भारत की अर्थव्यवस्था 2025-26 में 6.5% की वृद्धि दर के साथ मजबूत बनी हुई है। कम मुद्रास्फीति, अच्छे मॉनसून, और अनुकूल ब्याज दरों ने इस वृद्धि को समर्थन दिया है। हालांकि, वैश्विक व्यापार तनाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएँ चुनौतियाँ प्रस्तुत करती हैं।
भारत की आर्थिक रणनीति
भारत ने अपनी आर्थिक नीतियों को और लचीला बनाया है। आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत, भारत ने विनिर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा, और डिजिटल अर्थव्यवस्था में निवेश बढ़ाया है। इसके साथ ही, भारत ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए PLI (प्रोडक्शन लिंक्ड इनसेंटिव) योजना को विस्तार दिया है।
वैश्विक मंच पर भारत
भारत ने G20 और BRICS जैसे मंचों पर अपनी नेतृत्वकारी भूमिका को मजबूत किया है। 2025 में G20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी करके भारत ने सतत विकास, जलवायु परिवर्तन, और डिजिटल परिवर्तन जैसे मुद्दों पर वैश्विक चर्चा को आकार दिया है। भारत की यह स्थिति उसे वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण है।
8. जलवायु परिवर्तन और भू-राजनीति
जलवायु परिवर्तन 2025 में भू-राजनीति का एक महत्वपूर्ण कारक बन गया है। बढ़ते तापमान, चरम मौसमी घटनाएँ, और जल संसाधनों की कमी ने कई देशों के बीच तनाव को बढ़ाया है। भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता नदी जल बंटवारे पर विवाद फिर से सुर्खियों में रहा है। इसके साथ ही, भारत ने अपनी जलवायु प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश बढ़ाया है।
भारत की जलवायु रणनीति
भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं में तेजी लाई है। इसके साथ ही, भारत ने वैश्विक जलवायु मंचों पर विकासशील देशों के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता की वकालत की है।
निष्कर्ष
2025 में भू-राजनीति ने वैश्विक व्यवस्था को नया आकार दिया है। भारत, अपनी रणनीतिक स्थिति, आर्थिक मजबूती, और कूटनीतिक स्वायत्तता के साथ, इन बदलावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। भारत-पाकिस्तान तनाव, भारत-चीन संबंध, मध्य पूर्व में अस्थिरता, वैश्विक व्यापार युद्ध, और उभरती प्रौद्योगिकियों के बीच, भारत को अपनी स्वायत्तता और विकास के लक्ष्यों को संतुलित करना होगा।
भविष्य में, भारत की कूटनीति और रणनीतिक साझेदारियाँ वैश्विक मंच पर उसकी स्थिति को और मजबूत करेंगी। भारत को अपनी रक्षा, ऊर्जा, और आर्थिक नीतियों को और लचीला बनाना होगा ताकि वह वैश्विक चुनौतियों का सामना कर सके और एक नेतृत्वकारी शक्ति के रूप में उभर सके।
Global Geopolitics: Emerging Trends and India’s Role in 2025 , India Geopolitics
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