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Toggleडॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम: सपनों के सौदागर की जीवनी
Dr. APJ Abdul Kalam एक ऐसे इंसान थे जिन्होंने अपनी जिंदगी को सपनों और मेहनत से भर दिया। वे भारत के लिए एक मिसाल हैं, जो दिखाते हैं कि एक साधारण परिवार के बच्चा कैसे देश के सबसे बड़ा वैज्ञानिक और राष्ट्रपति बन सकता है। उन के पूरा नाम अवुल पाकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम था।
लोग उन्हें प्यार से “मिसाइल मैन” या “पीपल्स प्रेसिडेंट” कहते थे। Dr. APJ Abdul Kalam के जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में हुआ था। वे भारत के 11वें राष्ट्रपति बने और 2002 से 2007 तक इस पद पर रहे। लेकिन उनकी जिंदगी सिर्फ पदों की नहीं थी; यह मेहनत, संघर्ष, सपनों और दूसरों को प्रेरित करने की कहानी है।
Dr. APJ Abdul Kalam हमेशा कहते थे कि सपने देखो, क्योंकि सपने ही इंसान को आगे बढ़ाते हैं। वे एक वैज्ञानिक थे जिन्होंने भारत को मिसाइल और अंतरिक्ष के र्यक्रमों में मजबूत बनाया। वे एक लेखक थे जिनकी किताबें लाखों लोगों को प्रेरणा देती हैं। और सबसे ऊपर, वे एक शिक्षक थे जो युवाओं से कहते थे कि तुम देश के भविष्य हो।
इस जीवनी में हम उनके जीवन के हर कोने को छुएंगे – बचपन की गरीबी से लेकर राष्ट्रपति भवन की सादगी तक, और उनके अंतिम पलों तक। हम सरल शब्दों में बात करेंगे, जैसे कोई दोस्त अपनी कहानी सुना रहा हो। Dr. APJ Abdul Kalam की जिंदगी हमें सिखाती है कि मुश्किलें आती हैं, लेकिन हिम्मत से सब संभव है। वे कहते थे, “अगर तुम सूरज की तरह चमकना चाहते हो, तो पहले सूरज की तरह जलो।” चलिए, उनकी कहानी शुरू करते हैं, और यह कहानी लंबी होगी क्योंकि उनकी जिंदगी में इतने सारे सबक हैं कि कम शब्दों में समेटना मुश्किल है।
बचपन और परिवार: सादगी की नींव
Dr. APJ Abdul Kalam के बचपन रामेश्वरम के उस छोटे से द्वीप पर बीता, जहां समुद्र की लहरें हमेशा गूंजती रहती थीं। रामेश्वरम एक पवित्र जगह है, जहां रामेश्वरम मंदिर है और लोग दूर-दूर से आते हैं। Dr. APJ Abdul Kalam के जन्म एक मध्यमवर्गीय मुस्लिम परिवार में हुआ था। उनके पिता जैनुलाब्दीन एक साधारण इंसान थे। वे नाव के मालिक थे और मछुआरों को नाव किराए पर देते थे। पिता जी बहुत मेहनती थे, लेकिन परिवार की कमाई ज्यादा नहीं थी।
Dr. APJ Abdul Kalam के मां आशियम्मा एक दयालु महिला थीं, जो घर संभालती थीं और बच्चों को प्यार से बड़ा करती थीं। Dr. APJ Abdul Kalam परिवार के सबसे छोटे बच्चे थे। उनके चार बड़े भाई थे – मुस्तफा कलाम, के सिम मुहम्मद, मुहम्मद मुथु मीरा लेब्बई मारी के यर और एक बहन थीं, जिन के नाम असिम ज़ोहरा था।
परिवार पहले थोड़ा अमीर था, लेकिन Dr. APJ Abdul Kalam के जन्म के समय गरीबी आ गई थी। घर मिट्टी के था, और खाना सादा – चावल, दाल और कभी-कभी मछली। लेकिन पैसे की कमी कभी Dr. APJ Abdul Kalam को परेशान नहीं करती थी। वे कहते थे कि उनके माता-पिता ने उन्हें जो सिखाया, वह सबसे कीमती था – ईमानदारी, मेहनत और दूसरों की मदद करना।
सुबह-सुबह पिता जी Dr. APJ Abdul Kalam को उठाते और नमाज पढ़ाते। फिर, Dr. APJ Abdul Kalam स्कूल जाते। रास्ते में वे अखबार बेचते थे। हां, सिर्फ आठ-दस साल की उम्र में ही वे परिवार की मदद करने लगे थे। रामेश्वरम के रास्तों पर दौड़ते हुए, अखबार बांटते हुए, DR. A.P.J ABDUL KALAMसोचते थे कि जिंदगी क्या है।
उनके बचपन में कई छोटी-छोटी कहानियां हैं जो उन्हें मजबूत बनाती रहीं। एक बार, समुद्र में तूफान आया और उनके पिता की नाव डूब गई। परिवार मुश्किल में आ गया, लेकिन पिता जी ने हार नहीं मानी। उन्होंने फिर से मेहनत की और नई नाव बनवाई। Dr. APJ Abdul Kalam ने इससे सीखा कि मुश्किलें आती हैं, लेकिन मेहनत से सब ठीक हो जाता है।
रामेश्वरम में विभिन्न धर्मों के लोग रहते थे – हिंदू, मुस्लिम, ईसाई। Dr. APJ Abdul Kalam के दोस्त हिंदू मंदिर जाते और वे मस्जिद। लेकिन खेलते सब साथ थे। एक दोस्त था रामेश्वरम का , जो Dr. APJ Abdul Kalam को पक्षियों की उड़ान दिखाता था । Dr. APJ Abdul Kalam समुद्र किनारे बैठकर पक्षियों को देखते और सोचते, “ये कैसे उड़ते हैं? क्या इंसान भी उड़ सकता है?” यही जिज्ञासा बाद में उन्हें वैज्ञानिक बनाया।
Dr. APJ Abdul Kalam के परिवार में धार्मिक सहिष्णुता थी। पिता जी कहते थे कि सभी धर्म एक ही ईश्वर की ओर ले जाते हैं। मां जी कहानियां सुनातीं, जैसे रामायण की, क्योंकि रामेश्वरम राम से जुड़ा है। Dr. APJ Abdul Kalam को बचपन से ही किताबें पसंद थीं। घर में ज्यादा किताबें नहीं थीं, लेकिन वे जो मिलतीं, पढ़ लेते।
स्कूल की फीस भरने में मुश्किल होती, लेकिन उनके बड़े भाई मदद करते। एक भाई ने तो अपनी घड़ी बेच दी ताकि Dr. APJ Abdul Kalam पढ़ सकें। यह प्यार Dr. APJ Abdul Kalam को हमेशा याद रहा। वे अपनी आत्मकथा “विंग्स ऑफ फायर” में लिखते हैं कि गरीबी ने उन्हें सिखाया कि खुशी पैसे में नहीं, संतोष में है।
बचपन में DR. A.P.J ABDUL KALAMको प्रकृति से प्यार था। समुद्र की लहरें, पक्षी, सूरज की किरणें – सब उन्हें कुछ नया सिखातीं। एक बार, वे अपने टीचर के साथ समुद्र किनारे गए। टीचर ने पक्षी की उड़ान समझाई। DR. A.P.J ABDUL KALAMने पूछा, “सर, इंसान कैसे उड़ेगा?” टीचर ने कहा, “विज्ञान से।” यही बात Dr. APJ Abdul Kalam का दिमाग में घर कर गई थी ।
रामेश्वरम की गलियां, मंदिर की घंटियां, मस्जिद की अजान – सब मिलकर Dr. APJ Abdul Kalam के बचपन रंगीन बनाते थे। लेकिन गरीबी के के रण वे कभी खिलौने नहीं खरीद पाते। वे खुद खिलौने बनाते, जैसे के गज की नाव। यह रचनात्मकता बाद में उनके वैज्ञानिक करियर में के म आई।
Dr. APJ Abdul Kalam के पिता बहुत बुद्धिमान थे, हालांकि पढ़े-लिखे कम। वे लोगों को सलाह देते और कहते, “बेटा, ज्ञान सबसे बड़ा धन है।” मां जी रसोई में के म करतीं और Dr. APJ Abdul Kalam को सिखातीं कि मेहमानों की सेवा करो। परिवार में त्योहार साथ मनाते – ईद, दीवाली, क्रिसमस। यह एकता Dr. APJ Abdul Kalam को सिखाती कि भारत विविधता में एकता है। बचपन की ये यादें Dr. APJ Abdul Kalam को हमेशा प्रेरित करती रहीं।
Dr. APJ Abdul Kalam कहते थे, “मेरा बचपन गरीब था, लेकिन प्यार से भरा।” इस सादगी ने उन्हें जमीन से जुड़ा रखा, चाहे वे कितने बड़े पद पर पहुंचें। Dr. APJ Abdul Kalam के परिवार बड़ा था, लेकिन सब मिलकर खुश रहते। बड़े भाई के म करते, बहन घर संभालती। Dr. APJ Abdul Kalam सबसे छोटे थे, इसलिए सब के लाड़ला। लेकिन वे जिम्मेदार थे। सुबह अखबार बांटना, स्कूल जाना, शाम को पढ़ाई – यही रूटीन था।
एक और कहानी है बचपन की। Dr. APJ Abdul Kalam को एक बार स्कूल में सजा मिली क्योंकि वे देर से पहुंचे। लेकिन उन्होंने बहाना नहीं बनाया, सीधे माफी मांगी। इससे टीचर प्रभावित हुए। Dr. APJ Abdul Kalam हमेशा सच्चाई पर चलते थे। उनके परिवार में कोई शि के यत नहीं थी। पिता जी कहते, “अल्लाह पर भरोसा रखो, मेहनत करो।” यह विश्वास Dr. APJ Abdul Kalam को जीवन भर साथ रहा। बचपन में वे क्रिकेट खेलते, लेकिन पढ़ाई कभी नहीं छोड़ते।
रामेश्वरम की हवा में नमक की महक, समुद्र की ठंडक – सब Dr. APJ Abdul Kalam के दिल में बसी। यही बचपन की नींव थी जो बाद में ऊंची इमारत बनी। Dr. APJ Abdul Kalam कहते थे कि अगर बचपन मजबूत हो, तो जिंदगी की कोई तूफान नहीं हिला सकती। उनके परिवार की कहानियां सुनकर लगता है कि प्यार और मेहनत से कोई परिवार मजबूत बनता है।
Dr. APJ Abdul Kalam के भाई-बहन बाद में सफल हुए, लेकिन Dr. APJ Abdul Kalam सबसे चमके। यह सब परिवार की एकता की वजह से। बचपन के संघर्ष ने Dr. APJ Abdul Kalam को सिखाया कि जिंदगी आसान नहीं, लेकिन लड़ना जरूरी है।
शिक्षा: जिज्ञासा की शुरुआत
Dr. APJ Abdul Kalam की शिक्षा रामेश्वरम से ही शुरू हुई। वे Schwartz Higher Secondary School में पढ़े। वहां वे औसत छात्र थे, लेकिन गणित और विज्ञान में अच्छे। टीचर्स उन्हें पसंद करते क्योंकि वे सवाल पूछते थे। एक टीचर थे श्री सिवसुब्रमणिया अय्यर, जो Dr. APJ Abdul Kalam के मेंटर बने। एक दिन क्लास में टीचर ने पक्षियों की उड़ान समझाई। Dr. APJ Abdul Kalam ने पूछा ज्यादा सवाल, तो टीचर घर ले गए और समुद्र किनारे दिखाया। यह घटना Dr. APJ Abdul Kalam के जीवन के टर्निंग पॉइंट थी। वे कहते, “उस दिन मुझे पता चला कि विज्ञान क्या है।”
स्कूल में Dr. APJ Abdul Kalam को फीस की समस्या थी। कभी-कभी वे अखबार बेचकर पैसे जमा करते। लेकिन पढ़ाई नहीं रुकती। वे रात भर पढ़ते। 1950 में वे रामनाथपुरम से मैट्रिक पास किए। फिर, तिरुचिरापल्ली के सेंट जोसेफ कॉलेज गए। वहां 1954 में भौतिकी में बीएससी किया। कॉलेज में वे होस्टल में रहते और सादा खाना खाते। लेकिन उन के सपना बड़ा था – पायलट बनना। वे इंडियन एयर फोर्स की परीक्षा दी, लेकिन 9वें नंबर पर रह गए। सिर्फ 8 जगहें थीं। यह असफलता Dr. APJ Abdul Kalam को तोड़ नहीं सकी। वे कहते, “असफलता सीखने के मौ के है।”
फिर, वे मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) गए। वहां एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की डिग्री ली। MIT महंगा था, लेकिन Dr. APJ Abdul Kalam ने स्कॉलरशिप पाई। वहां उन्होंने हवाई जहाज के डिजाइन सीखे। एक प्रोजेक्ट था हॉवरक्राफ्ट के , जो बाद में उनके करियर में के म आया। Dr. APJ Abdul Kalam रात-रात भर लैब में रहते। उनके दोस्त कहते कि Dr. APJ Abdul Kalam कभी थकते नहीं। शिक्षा के दौरान वे किताबें पढ़ते – विज्ञान की, इतिहास की। वे विक्रम साराभाई जैसे वैज्ञानिकों से प्रेरित थे।
शिक्षा में Dr. APJ Abdul Kalam ने कई चुनौतियां झेलीं। एक बार प्रोजेक्ट में फेल हो गए, लेकिन टीचर ने मौ के दिया। Dr. APJ Abdul Kalam ने मेहनत की और पास हुए। वे कहते, “शिक्षा सिर्फ डिग्री नहीं, ज्ञान है।” MIT से निकलकर वे DRDO जॉइन किए। लेकिन शिक्षा कभी नहीं रुकी। बाद में वे कई कोर्स किए और डॉक्टरेट पाए। Dr. APJ Abdul Kalam छात्रों से कहते, “पढ़ाई में मेहनत करो, सवाल पूछो।” उनकी शिक्षा की कहानी बताती है कि असफलता से डरना नहीं, सीखना है।
कॉलेज में Dr. APJ Abdul Kalam को गरीबी के एहसास होता। दोस्त अमीर थे, लेकिन Dr. APJ Abdul Kalam सादे कपड़े पहनते। लेकिन वे कभी शर्मिंदा नहीं हुए। वे लाइब्रेरी में घंटों बिताते। एक किताब थी “द स्पिरिट ऑफ सेंट लुइस” चार्ल्स लिंडबर्ग की, जो Dr. APJ Abdul Kalam को उड़ान के शौक देती। वे सोचते कि भारत भी ऐसे हवाई जहाज बनाए। शिक्षा ने Dr. APJ Abdul Kalam को आत्मविश्वास दिया।
वे कहते, “ज्ञान वह रोशनी है जो अंधेरे को दूर करती है।” स्कूल से कॉलेज तक की यात्रा संघर्षपूर्ण थी, लेकिन मजेदार भी। दोस्तों के साथ डिबेट, स्पोर्ट्स – सब करते। लेकिन फोकस पढ़ाई पर। Dr. APJ Abdul Kalam की शिक्षा हमें सिखाती है कि सीखना जीवन भर चलता है। वे बाद में कई यूनिवर्सिटीज में लेक्चर देते और कहते, “युवा, पढ़ो और सपने देखो।”
शिक्षा के दिनों में Dr. APJ Abdul Kalam ने कई टीचर्स से सीखा। एक टीचर ने कहा, “कलाम, तुम्हारा दिमाग रॉकेट जैसा है।” यह प्रेरणा बनी। असफलता के बाद भी वे नहीं रुके। एयर फोर्स की असफलता ने उन्हें इंजीनियरिंग की ओर मोड़ा। MIT में वे टॉप स्टूडेंट बने।
प्रोजेक्ट्स में इनोवेशन करते। एक प्रोजेक्ट था ग्लाइडर के , जो सफल हुआ। यह आत्मविश्वास बढ़ाया। Dr. APJ Abdul Kalam की शिक्षा साधारण स्कूल से शुरू होकर ऊंची उड़ान तक पहुंची। वे कहते, “शिक्षा वह सीढ़ी है जो सपनों को हकीकत बनाती है।” उनकी कहानी हर छात्र के लिए है जो संघर्ष कर रहा है।
करियर की शुरुआत और DRDO-ISRO में योगदान: सपनों की उड़ान
1960 में Dr. APJ Abdul Kalam ने अपना करियर DRDO में शुरू किया। वे टेक्निकल सेंटर में सीनियर साइंटिफिक असिस्टेंट बने। पहला के म था हॉवरक्राफ्ट डिजाइन करना। हॉवरक्राफ्ट जमीन और पानी पर चलता है। Dr. APJ Abdul Kalam ने मेहनत की और सफल बनाया। लेकिन उन के मन अंतरिक्ष में था। 1969 में वे ISRO जॉइन किए। वहां विक्रम साराभाई के साथ के म किया। Dr. APJ Abdul Kalam SLV-III के प्रोजेक्ट डायरेक्टर बने। SLV भारत के पहला सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल था।
1979 में पहली लॉन्च फेल हो गई। रॉकेट समुद्र में गिरा। Dr. APJ Abdul Kalam उदास हुए, लेकिन टीम को मोटिवेट किया। वे कहते, “फेलियर एक स्टेप है सक्सेस की ओर।” अगली बार 1980 में सफलता मिली। रोहिणी सैटेलाइट ऑर्बिट में पहुंचा। भारत स्पेस पावर बना। Dr. APJ Abdul Kalam की टीम ने दिन-रात के म किया। चुनौतियां थीं – पैसे की कमी, टेक्नोलॉजी नहीं। लेकिन Dr. APJ Abdul Kalam इनोवेटिव थे। वे पुराने पार्ट्स यूज करते।
ISRO में Dr. APJ Abdul Kalam ने PSLV भी विकसित किया। यह कई सैटेलाइट लॉन्च करता। 1982 में Dr. APJ Abdul Kalam DRDO वापस आए। वहां IGMDP शुरू किया। इससे पांच मिसाइलें बनीं – अग्नि, पृथ्वी, त्रिशूल, आ के श, नाग। अग्नि लंबी दूरी की थी। 1989 में पहली लॉन्च सफल। Dr. APJ Abdul Kalam “मिसाइल मैन” बने। 1998 में पोखरण-II न्यूक्लियर टेस्ट में भूमि के । भारत न्यूक्लियर पावर बना। Dr. APJ Abdul Kalam डिफेंस एडवाइजर थे।
करियर में कई मुश्किलें आईं। एक बार प्रोजेक्ट रुक गया पैसे न होने से। Dr. APJ Abdul Kalam ने सर के र से बात की। वे टीम वर्क पर विश्वास करते। सबको साथ लेते। Dr. APJ Abdul Kalam ने टेक्नोलॉजी विजन 2020 बनाया। इसमें भारत को 2020 तक विकसित बनाने के प्लान। कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य पर फोकस। Dr. APJ Abdul Kalam कहते, “टेक्नोलॉजी देश को मजबूत बनाती है।” उनके योगदान से भारत आत्मनिर्भर हुआ। DRDO-ISRO में हजारों वैज्ञानिकों को ट्रेन किया।
एक कहानी है SLV की। फेलियर के बाद मीडिया ने क्रिटिसाइज किया। लेकिन Dr. APJ Abdul Kalam ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “हम सीख रहे हैं।” अगली सफलता ने सबको चुप कराया। Dr. APJ Abdul Kalam सादगी से के म करते। ऑफिस में चाय खुद बनाते। करियर की शुरुआत में सैलरी कम थी, लेकिन खुशी ज्यादा। वे कहते, ” के म प्यार से करो, सफलता आएगी।” ISRO में वे युवा वैज्ञानिकों को गाइड करते। एक युवा था जो फेल हो रहा था, Dr. APJ Abdul Kalam ने उसे मोटिवेट किया। बाद में वह सफल हुआ। Dr. APJ Abdul Kalam के करियर हमें सिखाता है कि धैर्य और मेहनत जरूरी है।
1992-1999 तक Dr. APJ Abdul Kalam प्रधान वैज्ञानिक सलाह के र थे। उन्होंने कई प्रोजेक्ट्स लॉन्च किए। जैसे, लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट। चुनौतियां थीं अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध, लेकिन Dr. APJ Abdul Kalam ने स्वदेशी टेक्नोलॉजी पर जोर दिया। पोखरण टेस्ट गुप्त था। Dr. APJ Abdul Kalam की टीम ने रात-दिन के म किया। सफलता के बाद दुनिया ने भारत को मान्यता दी।
Dr. APJ Abdul Kalam कहते, “विज्ञान सीमाओं से परे है।” उन के करियर 40 साल लंबा था, भरा सफलताओं से। लेकिन वे कभी घमंड नहीं किए। हमेशा टीम को क्रेडिट देते। DRDO-ISRO के योगदान ने भारत को स्पेस और डिफेंस में मजबूत बनाया। Dr. APJ Abdul Kalam की कहानी युवा इंजीनियर्स के लिए प्रेरणा है।
राष्ट्रपति बनना: लोगों के राष्ट्रपति
2002 में Dr. APJ Abdul Kalam राष्ट्रपति बने। NDA ने उन्हें कैंडिडेट बनाया। कांग्रेस ने भी सपोर्ट किया। वे लक्ष्मी सहगल को हराकर जीते। 25 जुलाई 2002 को शपथ ली। राष्ट्रपति भवन में पहुंचकर वे सादगी से रहे। महंगे कपड़े नहीं पहने, सादा कुर्ता-पायजामा। वे “पीपल्स प्रेसिडेंट” बने क्योंकि आम लोगों से मिलते। बच्चों को बुलाते, बात करते।
कार्यकाल में वे भारत 2020 विजन प्रमोट करते। युवाओं से मिलते, कहते, “तुम देश बदलो।” वे 5 लाख युवाओं से मिलने के लक्ष्य रखा। राष्ट्रपति भवन को खोला आम लोगों के लिए। एक बार एक गरीब बच्चा आया, Dr. APJ Abdul Kalam ने उसे गले लगाया। उनके कार्यकाल में कई बिल पास हुए। लेकिन कुछ पर वीटो किया अगर गलत लगे। जैसे, ऑफिस ऑफ प्रॉफिट बिल। वे कहते, “राष्ट्रपति संविधान के रक्षक है।”
राष्ट्रपति बनना आसान नहीं था। Dr. APJ Abdul Kalam मुस्लिम थे, NDA हिंदूवादी। लेकिन उनकी लोकप्रियता ने सबको एक किया। 2007 तक रहे। प्रतिभा पाटिल के बाद अपने कार्यकाल के दौरान विदेश यात्राओं पर गए और भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को और बेहतर बनाया। वे सादगी और विनम्रता के प्रतीक थे। राष्ट्रपति भवन में बगीचा लगवाया, खुद पानी डालते। वे कहते, “पद बड़ा नहीं, इंसान बड़ा होता है।” उन के कार्यकाल एकता और विकास का था।
एक घटना है। गुजरात दंगों के बाद कलाम ने शांति की अपील की। वे सभी धर्मों का सम्मान करते। राष्ट्रपति के रूप में लेक्चर देते, स्कूल जाते। बच्चे उन्हें चिट्ठी लिखते, वे जवाब देते। कलाम का राष्ट्रपति काल प्रेरणादायक था। वे कहते, “युवा, सपने देखो और पूरा करो।”
राष्ट्रपति के बाद के जीवन और शिक्षण: प्रेरणा के स्रोत
2007 में राष्ट्रपति छोड़ने के बाद DR. A.P.J ABDUL KALAMशिक्षण में लगे। वे IIM अहमदाबाद, शिलॉन्ग में प्रोफेसर बने। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस साइंस के चांसलर। वे बच्चों से मिलते, लेक्चर देते। 2011 में “व्हाट कैन आई गिव” मूवमेंट शुरू किया, जो भ्रष्टाचार के खिलाफ था। 2012 में मेडिकल टैबलेट लॉन्च किया।
Dr. APJ Abdul Kalam यात्रा करते, युवाओं को मोटिवेट करते। वे कहते, “शिक्षक राष्ट्र बनाता है।” अंतिम दिन 27 जुलाई 2015 को IIM शिलॉन्ग में लेक्चर देते हुए हार्ट अटैक से गए। मौत पर देश शोक में डूबा। लेकिन उनके विचार जीवित हैं।
Dr. APJ Abdul Kalam शिक्षण को प्यार करते। वे कहते, “बच्चों को सपने दो।” कई यूनिवर्सिटीज में गए। एक बार एक बच्चे ने पूछा, “सर, मैं फेल हो गया।” Dr. APJ Abdul Kalam ने कहा, “फेलियर सक्सेस की शुरुआत है।” उन के जीवन शिक्षण से भरा था।
किताबें और लेखन: विचारों की विरासत
Dr. APJ Abdul Kalam ने 25 किताबें लिखीं। “विंग्स ऑफ फायर” उनकी आत्मकथा, 1999 में। इसमें बचपन से करियर तक। “इग्नाइटेड माइंड्स” युवाओं के लिए। “इंडिया 2020” वि के स के विजन। अन्य – “माई जर्नी”, “ट्रांसेंडेंस”। किताबें सरल, प्रेरणादायक। लाखों कॉपियां बिकीं। Dr. APJ Abdul Kalam लेखन में विज्ञान और नैतिकता जोड़ते।
पुरस्कार और सम्मान: मान्यता की माला
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- 1981 पद्म भूषण : 1981 में भारत सर के र ने Dr. APJ Abdul Kalam को पद्म भूषण से सम्मानित किया। यह भारत के तीसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान है। यह पुरस्कार उन्हें उनके वैज्ञानिक के र्यों, खासकर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (SLV-III) के सफल प्रक्षेपण के लिए मिला
- 1990 पद्म विभूषण: 1990 में Dr. APJ Abdul Kalam को पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। यह भारत के दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान है। यह पुरस्कार उन्हें उनके मिसाइल प्रोग्राम में योगदान के लिए मिला।
- 1997 भारत रत्न : 1997 में Dr. APJ Abdul Kalam को भारत के सबसे बड़ा नागरिक सम्मान भारत रत्न मिला। यह पुरस्कार उनके वैज्ञानिक और रक्षा क्षेत्र में योगदान के लिए था। इस समय तक वे भारत के डिफेंस मिनिस्टर के साइंटिफिक एडवाइजर थे। 1998 में पोखरण-II न्यूक्लियर टेस्ट की सफलता में उनकी बड़ी भूमि के थी। भारत रत्न ने उन्हें देश के हीरो बना दिया। यह पुरस्कार पाने वाले वे पहले वैज्ञानिकों में से एक थे।
“सपना वो जो सोने न दे। असफलता से डरो नहीं।” ये शब्द जीवित हैं।
विरासत और मौत: अमर कहानी
Dr. APJ Abdul Kalam की मृत्यु 27 जुलाई 2015 को हुई, लेकिन उनकी विरासत को सम्मान मिलता रहा हे। एपीजे अब्दुल Dr. APJ Abdul Kalam के पुरस्कार उनकी मेहनत, समर्पण और देशभक्ति के प्रतीक हैं। पद्म भूषण, पद्म विभूषण, भारत रत्न और 40 से ज्यादा डॉक्टरेट – ये सब उनकी जिंदगी की कहानी के हिस्सा हैं।
लेकिन सबसे बड़ा सम्मान था लोगों के प्यार। बच्चे, युवा, वैज्ञानिक – सब उन्हें चाहते थे। Dr. APJ Abdul Kalam कहते थे, “सम्मान तब सार्थक है जब वह दूसरों को प्रेरित करे। उनकी यह सोच आज भी लाखों लोगों को प्रेरित करती है। उनके पुरस्कार न केवल उनकी उपलब्धियों की कहानी कहते हैं, बल्कि यह भी दिखाते हैं कि एक साधारण इंसान कैसे असाधारण बन सकता है।
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