जो श्लोक आपने पढ़ने जा रहे हे (पहले २० श्लोक), वे वाल्मीकिरामायण के बालकाण्ड के हैं।
कुलकाण्ड (भाग): रामायण में ७काण्ड हैं: १. बालकाण्ड २. अयोध्याकाण्ड ३. अरण्यकाण्ड ४. किष्किन्धाकाण्ड ५. सुन्दरकाण्ड ६. युद्धकाण्ड (या लंकाकाण्ड) ७. उत्तरकाण्ड
यहश्लोककिसअध्याय (सर्ग) काहै? ये बालकाण्डकेप्रथमसर्ग (अध्याय१) के हैं।
बालकाण्ड में कुल ७७सर्ग हैं।
यानी ये रामायण की सबसेशुरुआत है।
२. मूलरचयिताकौनहैं? – महर्षिवाल्मीकि
नाम: आदि कवि महर्षिवाल्मीकि (पहले रत्नाकर नाम था)
जन्म: प्राचीन काल में, त्रेता युग से पहले।
पहलेजीवन: डाकू थे। एक दिन नारद मुनि से मिले। नारद जी ने कहा – “अपने पाप का फल परिवार से पूछो।” परिवार ने कहा – “पाप तुम्हारा, फल हम क्यों भोगें?” रत्नाकर को गहरा झटका लगा। वे पश्चाताप करने लगे।
नाम “वाल्मीकि” कैसेपड़ा? ध्यान में इतने दिन बैठे कि दीमक (वाल्मीक) ने उनका शरीर ढक लिया। बाहर निकले तो नाम पड़ा वाल्मीकि।
रामायणलिखनेकीप्रेरणा: एक दिन जंगल में क्रौञ्च पक्षी का जोड़ा देखा। शिकारी ने नर को मार दिया। मादा दुख से चीखी। वाल्मीकि के मुंह से स्वतः निकला:
“मानिषादप्रतिष्ठांत्वमगमःशाश्वतीःसमाः।यत्क्रौञ्चमिथुनादेकमवधीःकाममोहितम्॥”(हे शिकारी! तूने प्रेमी पक्षी जोड़े में से एक को मार डाला, इसलिए तुझे कभी शांति न मिले।)
यह पहलाश्लोक था – शोकसेकाव्यबना। ब्रह्मा जी आए और बोले: “रामकीकथाइसीछन्दमेंलिखो।” यही रामायणकीशुरुआत हुई।
३. रामायणक्याहै? (संक्षेपमें)
कुलश्लोक: लगभग २४,०००श्लोक
भाषा: संस्कृत (अनुष्टुप छन्द)
कथा: भगवान विष्णु के ७वेंअवतारश्रीराम की जीवन गाथा।
जन्म → वनवास → सीता हरण → रावण वध → अयोध्या लौटना
उद्देश्य: १. धर्म की शिक्षा २. मर्यादापुरुषोत्तम राम का आदर्श ३. अच्छाईकीजीत (सत् पर असत् की विजय)
४. बालकाण्डकासार (जहाँसेआपनेपढ़नाशुरूकिया)
कहानीकीशुरुआत:
वाल्मीकि नारद से पूछते हैं: “दुनियामेंसबसेश्रेष्ठपुरुषकौनहै?”
नारद कहते हैं: “राम”
फिर राम के गुण, रूप, जन्म, बचपन, विश्वामित्रकेसाथयज्ञरक्षा, सीतास्वयंवर तक की कहानी।
मुख्यघटनाएँ (बालकाण्डमें): १. राम-लक्ष्मण का जन्म २. विश्वामित्र का आगमन ३. ताड़का वध ४. अहल्या उद्धार ५. मिथिला में सीता स्वयंवर ६. परशुराम संवाद
५. रामायणकेपात्र (मुख्य):
पात्र
संबंध
गुण
श्रीराम
दशरथ पुत्र
मर्यादा पुरुषोत्तम
सीता
जनक दुखारी
पतिव्रता, धैर्य
लक्ष्मण
राम का भाई
भाई-भक्ति
हनुमान
राम भक्त
शक्ति, बुद्धि, भक्ति
रावण
लंका राजा
विद्या, अहंकार
दशरथ
अयोध्या राजा
वचनबद्ध
६. रामायणकासंदेश (सभीकेलिए):
सत्यबोलो – राम ने १४ साल वनवास स्वीकार किया।
वचननिभाओ – दशरथ ने कैकेयी का वचन निभाया।
भाई–भरतजैसाहो – भरत ने राम की चरण-पादुका सिंहासन पर रखी।
भक्तिकरो – हनुमान जैसी।
अहंकारमतकरो – रावण का अंत।
७. पढ़नेसेपहलेयादरखें:
रामायण केवलकहानीनहीं, जीवनदर्शन है।
हर काण्ड एक संदेश देता है:
बालकाण्ड → आदर्शजन्मऔरशिक्षा
अयोध्याकाण्ड → त्यागऔरवचन
सुन्दरकाण्ड → भक्तिऔरउम्मीद
युद्धकाण्ड → धर्मयुद्ध
आज हम बल कांड का १ से २० श्लोक के ऊपर लिखेंगे अगर आपको पसंद आया आगे ये यात्रा जारी रखेंगे ,लिखना सुरु करते है ,
हिन्दीअनुवाद: तप, स्वाध्याय (वेद-पाठ) में लगा रहने वाला, तपस्वियों में श्रेष्ठ और वाणी के विद्वानों में सर्वश्रेष्ठ नारद मुनि को वाल्मीकि ने प्रश्न किया।
सरलअर्थ: वाल्मीकि जी बहुत बड़े तपस्वी और विद्वान थे। वे हमेशा वेद पढ़ते और तप करते रहते थे। एक दिन उन्होंने महर्षि नारद से कुछ पूछने का मन बनाया।
हिन्दीअनुवाद: इस समय इस लोक में ऐसा कौन है जो गुणवान् हो, वीर हो, धर्म को जानने वाला हो, कृतज्ञ (उपकार मानने वाला) हो, सत्य बोलने वाला हो और दृढ़ निश्चय वाला हो?
सरलअर्थ: वाल्मीकि जी नारद से पूछते हैं – “आजकल दुनिया में ऐसा कौन है जो बहुत अच्छे गुणों वाला, बहादुर, धर्म की पूरी समझ रखने वाला, किसी का एहसान मानने वाला, हमेशा सच बोलने वाला और अपने वचन पर अटल रहने वाला हो?”
हिन्दीअनुवाद: कौन ऐसा है जो अच्छे चरित्र वाला हो, सभी प्राणियों के लिए हितकारी हो, विद्वान् हो, समर्थ (काम करने में सक्षम) हो और जिसका दर्शन एक बार करने मात्र से प्रिय लगे?
सरलअर्थ: “ऐसा कौन है जो बहुत अच्छा व्यवहार रखता हो, सबके लिए भला चाहता हो, बहुत ज्ञानी हो, हर काम कर सकता हो और जिसे देखते ही मन प्रसन्न हो जाए?”
हिन्दीअनुवाद: कौन आत्मसंयमी है, क्रोध पर विजय पाने वाला है, तेजस्वी है, डाह (ईर्ष्या) रहित है और युद्ध में क्रोधित होने पर देवता भी जिससे डरते हैं?
सरलअर्थ: “ऐसा कौन है जो अपने मन पर पूरा काबू रखता हो, गुस्सा नहीं करता, बहुत तेजस्वी (चमकदार व्यक्तित्व) वाला हो, किसी से जलन नहीं करता और गुस्सा आने पर देवता भी उससे डर जाएँ?”
हिन्दीअनुवाद: इक्ष्वाकु वंश में उत्पन्न, राम नाम से प्रसिद्ध, संयमित मन वाला, महान पराक्रमी, तेजस्वी, धैर्यवान् और जितेन्द्रिय।
सरलअर्थ: “इक्ष्वाकु (सूर्यवंश) में पैदा हुए, नाम है राम। मन पर पूरा काबू, बहुत ताकतवर, चमकदार व्यक्तित्व, धैर्यवान् और इन्द्रियों को काबू में रखने वाले।”
हिन्दीअनुवाद: चौड़ी छाती, महान धनुर्धर, छिपी हुई हड्डियाँ, सुंदर नाक, घुटनों तक हाथ, सुंदर मस्तक, अच्छा पराक्रम।
सरलअर्थ: “छाती चौड़ी, धनुष चलाने में महान, शरीर सुडौल, नाक सुंदर, हाथ घुटनों तक लंबे, माथा सुंदर, चलने-लड़ने में बहुत तेज।”
नोट: ये १० श्लोक रामायणकीशुरुआत हैं। यहाँ वाल्मीकि जी नारद से पूछते हैं कि दुनिया में सबसे श्रेष्ठ पुरुष कौन है? नारद जी कहते हैं – श्रीराम। अगले श्लोकों में राम जी के और गुण बताए जाते हैं।
हिन्दीअनुवाद: समान अंगों वाला, सुन्दर अंग-प्रत्यंग, चिकना रंग, प्रतापी, चौड़ी छाती, बड़े नेत्र, लक्ष्मीवान्, शुभ लक्षणों से युक्त।
सरलअर्थ: श्रीराम का शरीर हर अंग से बराबर और सुन्दर था। रंग चमकदार और कोमल, बहुत तेजस्वी, छाती चौड़ी, आँखें बड़ी-बड़ी, सौभाग्यशाली और शरीर पर शुभ चिह्न।
हिन्दीअनुवाद: हमेशा दान देने वाला, सत्य पर अटल, प्रतापी, लोक में श्रीमान् राम सदा नारायण (विष्णु) के समान हैं।
सरलअर्थ: दान करते रहते, सच के पक्के, बहुत प्रभावशाली, दुनिया में रामजी हमेशा भगवानविष्णु जैसे हैं।
बालकाण्ड (सर्ग१) – श्लोक१से२०तककासारांश
महर्षि वाल्मीकि जंगल में तप कर रहे थे। एक दिन उन्होंने सोचा – “आजकलदुनियामेंसबसेअच्छाइंसानकौनहै?” वे नारद मुनि के पास गए। नारद तीनों लोकों के जानकार थे।
वाल्मीकि ने पूछा:
“ऐसा कौन है जो गुणवान, बहादुर, धर्मज्ञ, कृतज्ञ (एहसानमाननेवाला), सचबोलनेवाला, वचनकापक्का हो?
जो अच्छेचरित्रवाला, सबकाभलाचाहनेवाला, विद्वान, ताकतवर, देखतेहीप्यारालगे?
जो मनपरकाबूरखे, गुस्सानकरे, तेजस्वीहो, जलननकरे, औरगुस्साआनेपरदेवताभीडरें?”
सारांश: ये २० श्लोक रामायणकीनींव हैं। वाल्मीकि पूछते हैं – सबसेश्रेष्ठइंसानकौन? नारद कहते हैं – राम। और राम के ३२गुण बताते हैं। यहाँ राम को मर्यादापुरुषोत्तम के रूप में पेश किया गया – जो राजा, पुत्र, भाई, पति, योद्धा, भक्त सबमें आदर्श हैं।
हिन्दीअनुवाद: तप, स्वाध्याय (वेद-पाठ) में लगा रहने वाला, तपस्वियों में श्रेष्ठ और वाणी के विद्वानों में सर्वश्रेष्ठ नारद मुनि को वाल्मीकि ने प्रश्न किया।
सरलअर्थ: वाल्मीकि जी बहुत बड़े तपस्वी और विद्वान थे। वे हमेशा वेद पढ़ते और तप करते रहते थे। एक दिन उन्होंने महर्षि नारद से कुछ पूछने का मन बनाया।
हिन्दीअनुवाद: इस समय इस लोक में ऐसा कौन है जो गुणवान् हो, वीर हो, धर्म को जानने वाला हो, कृतज्ञ (उपकार मानने वाला) हो, सत्य बोलने वाला हो और दृढ़ निश्चय वाला हो?
सरलअर्थ: वाल्मीकि जी नारद से पूछते हैं – “आजकल दुनिया में ऐसा कौन है जो बहुत अच्छे गुणों वाला, बहादुर, धर्म की पूरी समझ रखने वाला, किसी का एहसान मानने वाला, हमेशा सच बोलने वाला और अपने वचन पर अटल रहने वाला हो?”
हिन्दीअनुवाद: कौन ऐसा है जो अच्छे चरित्र वाला हो, सभी प्राणियों के लिए हितकारी हो, विद्वान् हो, समर्थ (काम करने में सक्षम) हो और जिसका दर्शन एक बार करने मात्र से प्रिय लगे?
सरलअर्थ: “ऐसा कौन है जो बहुत अच्छा व्यवहार रखता हो, सबके लिए भला चाहता हो, बहुत ज्ञानी हो, हर काम कर सकता हो और जिसे देखते ही मन प्रसन्न हो जाए?”
हिन्दीअनुवाद: कौन आत्मसंयमी है, क्रोध पर विजय पाने वाला है, तेजस्वी है, डाह (ईर्ष्या) रहित है और युद्ध में क्रोधित होने पर देवता भी जिससे डरते हैं?
सरलअर्थ: “ऐसा कौन है जो अपने मन पर पूरा काबू रखता हो, गुस्सा नहीं करता, बहुत तेजस्वी (चमकदार व्यक्तित्व) वाला हो, किसी से जलन नहीं करता और गुस्सा आने पर देवता भी उससे डर जाएँ?”
हिन्दीअनुवाद: इक्ष्वाकु वंश में उत्पन्न, राम नाम से प्रसिद्ध, संयमित मन वाला, महान पराक्रमी, तेजस्वी, धैर्यवान् और जितेन्द्रिय।
सरलअर्थ: “इक्ष्वाकु (सूर्यवंश) में पैदा हुए, नाम है राम। मन पर पूरा काबू, बहुत ताकतवर, चमकदार व्यक्तित्व, धैर्यवान् और इन्द्रियों को काबू में रखने वाले।”
हिन्दीअनुवाद: चौड़ी छाती, महान धनुर्धर, छिपी हुई हड्डियाँ, सुंदर नाक, घुटनों तक हाथ, सुंदर मस्तक, अच्छा पराक्रम।
सरलअर्थ: “छाती चौड़ी, धनुष चलाने में महान, शरीर सुडौल, नाक सुंदर, हाथ घुटनों तक लंबे, माथा सुंदर, चलने-लड़ने में बहुत तेज।”
नोट: ये १० श्लोक रामायणकीशुरुआत हैं। यहाँ वाल्मीकि जी नारद से पूछते हैं कि दुनिया में सबसे श्रेष्ठ पुरुष कौन है? नारद जी कहते हैं – श्रीराम। अगले श्लोकों में राम जी के और गुण बताए जाते हैं।
हिन्दीअनुवाद: समान अंगों वाला, सुन्दर अंग-प्रत्यंग, चिकना रंग, प्रतापी, चौड़ी छाती, बड़े नेत्र, लक्ष्मीवान्, शुभ लक्षणों से युक्त।
सरलअर्थ: श्रीराम का शरीर हर अंग से बराबर और सुन्दर था। रंग चमकदार और कोमल, बहुत तेजस्वी, छाती चौड़ी, आँखें बड़ी-बड़ी, सौभाग्यशाली और शरीर पर शुभ चिह्न।
हिन्दीअनुवाद: हमेशा दान देने वाला, सत्य पर अटल, प्रतापी, लोक में श्रीमान् राम सदा नारायण (विष्णु) के समान हैं।
सरलअर्थ: दान करते रहते, सच के पक्के, बहुत प्रभावशाली, दुनिया में रामजी हमेशा भगवानविष्णु जैसे हैं।
बालकाण्ड (सर्ग१) – श्लोक१से२०तककासारांश
महर्षि वाल्मीकि जंगल में तप कर रहे थे। एक दिन उन्होंने सोचा – “आजकलदुनियामेंसबसेअच्छाइंसानकौनहै?” वे नारद मुनि के पास गए। नारद तीनों लोकों के जानकार थे।
वाल्मीकि ने पूछा:
“ऐसा कौन है जो गुणवान, बहादुर, धर्मज्ञ, कृतज्ञ (एहसानमाननेवाला), सचबोलनेवाला, वचनकापक्का हो?
जो अच्छेचरित्रवाला, सबकाभलाचाहनेवाला, विद्वान, ताकतवर, देखतेहीप्यारालगे?
जो मनपरकाबूरखे, गुस्सानकरे, तेजस्वीहो, जलननकरे, औरगुस्साआनेपरदेवताभीडरें?”
सारांश: ये २० श्लोक रामायणकीनींव हैं। वाल्मीकि पूछते हैं – सबसेश्रेष्ठइंसानकौन? नारद कहते हैं – राम। और राम के ३२गुण बताते हैं। यहाँ राम को मर्यादापुरुषोत्तम के रूप में पेश किया गया – जो राजा, पुत्र, भाई, पति, योद्धा, भक्त सबमें आदर्श हैं।
Welcome to Story Line, a creative storytelling platform founded by SANKAR BADATYA , Author and writer . At www.readstoryline.in, we share powerful stories that educate, inspire and also share News Article and connect people across cultures.