Valmiki Ramayana Bāla Kāṇḍa Chapter 1

Valmiki Ramayana Bāla Kāṇḍa Chapter 2
Valmiki Ramayana Bāla Kāṇḍa Chapter 1

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड 1

. रामायण कौनसा काण्ड है?

जो श्लोक आपने पढ़ने जा रहे हे  (पहले २० श्लोक), वे वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड के हैं।

      • कुल काण्ड (भाग): रामायण में काण्ड हैं: १. बालकाण्ड २. अयोध्याकाण्ड ३. अरण्यकाण्ड ४. किष्किन्धाकाण्ड ५. सुन्दरकाण्ड ६. युद्धकाण्ड (या लंकाकाण्ड) ७. उत्तरकाण्ड

      • यह श्लोक किस अध्याय (सर्ग) का है? ये बालकाण्ड के प्रथम सर्ग (अध्याय ) के हैं।
            • बालकाण्ड में कुल ७७ सर्ग हैं।
            • यानी ये रामायण की सबसे शुरुआत है।


      . मूल रचयिता कौन हैं? – महर्षि वाल्मीकि

          • नाम: आदि कवि महर्षि वाल्मीकि (पहले रत्नाकर नाम था)
          • जन्म: प्राचीन काल में, त्रेता युग से पहले।
          • पहले जीवन: डाकू थे। एक दिन नारद मुनि से मिले। नारद जी ने कहा – “अपने पाप का फल परिवार से पूछो।” परिवार ने कहा – “पाप तुम्हारा, फल हम क्यों भोगें?” रत्नाकर को गहरा झटका लगा। वे पश्चाताप करने लगे।
          • नामवाल्मीकिकैसे पड़ा? ध्यान में इतने दिन बैठे कि दीमक (वाल्मीक) ने उनका शरीर ढक लिया। बाहर निकले तो नाम पड़ा वाल्मीकि
          • रामायण लिखने की प्रेरणा: एक दिन जंगल में क्रौञ्च पक्षी का जोड़ा देखा। शिकारी ने नर को मार दिया। मादा दुख से चीखी। वाल्मीकि के मुंह से स्वतः निकला:

        मा निषाद प्रतिष्ठां त्वमगमः शाश्वतीः समाः। यत्क्रौञ्चमिथुनादेकमवधीः काममोहितम्॥ (हे शिकारी! तूने प्रेमी पक्षी जोड़े में से एक को मार डाला, इसलिए तुझे कभी शांति मिले।)

        यह पहला श्लोक था – शोक से काव्य बना। ब्रह्मा जी आए और बोले: राम की कथा इसी छन्द में लिखो। यही रामायण की शुरुआत हुई।


        . रामायण क्या है? (संक्षेप में)

            • कुल श्लोक: लगभग २४,००० श्लोक
            • भाषा: संस्कृत (अनुष्टुप छन्द)
            • कथा: भगवान विष्णु के ७वें अवतार श्रीराम की जीवन गाथा।
                  • जन्म → वनवास → सीता हरण → रावण वध → अयोध्या लौटना

              • उद्देश्य: १. धर्म की शिक्षा २. मर्यादा पुरुषोत्तम राम का आदर्श ३. अच्छाई की जीत (सत् पर असत् की विजय)


            . बालकाण्ड का सार (जहाँ से आपने पढ़ना शुरू किया)

                • कहानी की शुरुआत:
                      • वाल्मीकि नारद से पूछते हैं: दुनिया में सबसे श्रेष्ठ पुरुष कौन है?”

                      • नारद कहते हैं: राम

                      • फिर राम के गुण, रूप, जन्म, बचपन, विश्वामित्र के साथ यज्ञ रक्षा, सीता स्वयंवर तक की कहानी।

                  • मुख्य घटनाएँ (बालकाण्ड में): १. राम-लक्ष्मण का जन्म २. विश्वामित्र का आगमन ३. ताड़का वध ४. अहल्या उद्धार ५. मिथिला में सीता स्वयंवर ६. परशुराम संवाद


                . रामायण के पात्र (मुख्य):

                पात्र संबंध गुण
                श्रीराम दशरथ पुत्र मर्यादा पुरुषोत्तम
                सीता जनक दुखारी पतिव्रता, धैर्य
                लक्ष्मण राम का भाई भाई-भक्ति
                हनुमान राम भक्त शक्ति, बुद्धि, भक्ति
                रावण लंका राजा विद्या, अहंकार
                दशरथ अयोध्या राजा वचनबद्ध


                . रामायण का संदेश (सभी के लिए):

                    1. सत्य बोलो – राम ने १४ साल वनवास स्वीकार किया।
                    2. वचन निभाओ – दशरथ ने कैकेयी का वचन निभाया।
                    3. भाईभरत जैसा हो – भरत ने राम की चरण-पादुका सिंहासन पर रखी।
                    4. भक्ति करो – हनुमान जैसी।
                    5. अहंकार मत करो – रावण का अंत।


                  . पढ़ने से पहले याद रखें:

                      • रामायण केवल कहानी नहीं, जीवन दर्शन है।

                      • हर काण्ड एक संदेश देता है:
                            • बालकाण्ड → आदर्श जन्म और शिक्षा
                            • अयोध्याकाण्ड → त्याग और वचन
                            • सुन्दरकाण्ड → भक्ति और उम्मीद
                            • युद्धकाण्ड → धर्म युद्ध


                      आज हम बल कांड का १ से  २० श्लोक के ऊपर लिखेंगे अगर आपको पसंद आया आगे ये यात्रा जारी रखेंगे , लिखना सुरु करते है ,

                      श्लोक

                      तपःस्वाध्यायनिरतं तपस्वी वाग्विदां वरम् नारदं परिपप्रच्छ वाल्मीकिः मुनिपुङ्गवम् ॥१॥

                      हिन्दी अनुवाद: तप, स्वाध्याय (वेद-पाठ) में लगा रहने वाला, तपस्वियों में श्रेष्ठ और वाणी के विद्वानों में सर्वश्रेष्ठ नारद मुनि को वाल्मीकि ने प्रश्न किया।

                      सरल अर्थ: वाल्मीकि जी बहुत बड़े तपस्वी और विद्वान थे। वे हमेशा वेद पढ़ते और तप करते रहते थे। एक दिन उन्होंने महर्षि नारद से कुछ पूछने का मन बनाया।


                      श्लोक

                      को न्वस्मिन् साम्प्रतं लोके गुणवान् कश्च वीर्यवान् धर्मज्ञश्च कृतज्ञश्च सत्यवाक्यो दृढव्रतः ॥२॥

                      हिन्दी अनुवाद: इस समय इस लोक में ऐसा कौन है जो गुणवान् हो, वीर हो, धर्म को जानने वाला हो, कृतज्ञ (उपकार मानने वाला) हो, सत्य बोलने वाला हो और दृढ़ निश्चय वाला हो?

                      सरल अर्थ: वाल्मीकि जी नारद से पूछते हैं – “आजकल दुनिया में ऐसा कौन है जो बहुत अच्छे गुणों वाला, बहादुर, धर्म की पूरी समझ रखने वाला, किसी का एहसान मानने वाला, हमेशा सच बोलने वाला और अपने वचन पर अटल रहने वाला हो?”


                      श्लोक

                      चारित्रेण को युक्तः सर्वभूतेषु को हितः विद्वान् कः कः समर्थश्च कश्चैकप्रियदर्शनः ॥३॥

                      हिन्दी अनुवाद: कौन ऐसा है जो अच्छे चरित्र वाला हो, सभी प्राणियों के लिए हितकारी हो, विद्वान् हो, समर्थ (काम करने में सक्षम) हो और जिसका दर्शन एक बार करने मात्र से प्रिय लगे?

                      सरल अर्थ: “ऐसा कौन है जो बहुत अच्छा व्यवहार रखता हो, सबके लिए भला चाहता हो, बहुत ज्ञानी हो, हर काम कर सकता हो और जिसे देखते ही मन प्रसन्न हो जाए?”


                      श्लोक

                      आत्मवान् को जितक्रोधो द्युतिमान् कोऽनसूयकः कस्य बिभ्यति देवाश्च जारितरोषस्य संयुगे ॥४॥

                      हिन्दी अनुवाद: कौन आत्मसंयमी है, क्रोध पर विजय पाने वाला है, तेजस्वी है, डाह (ईर्ष्या) रहित है और युद्ध में क्रोधित होने पर देवता भी जिससे डरते हैं?

                      सरल अर्थ: “ऐसा कौन है जो अपने मन पर पूरा काबू रखता हो, गुस्सा नहीं करता, बहुत तेजस्वी (चमकदार व्यक्तित्व) वाला हो, किसी से जलन नहीं करता और गुस्सा आने पर देवता भी उससे डर जाएँ?”


                      श्लोक

                      एतदिच्छाम्यहं श्रोतुं परं कौतूहलं हि मे महर्षे त्वं समर्थोऽसि ज्ञातुमेवंविधं नरम् ॥५॥

                      हिन्दी अनुवाद: मैं ऐसे व्यक्ति के बारे में सुनना चाहता हूँ, मेरे मन में बड़ी उत्सुकता है। हे महर्षि! आप ही ऐसे मनुष्य को जानने में समर्थ हैं।

                      सरल अर्थ: “मुझे ऐसे महान व्यक्ति की कहानी सुननी है, मैं बहुत उत्सुक हूँ। हे नारद जी! सिर्फ आप ही ऐसे इंसान को जानते हैं।”


                      श्लोक

                      श्रुत्वा चैतत् त्रिलोकज्ञो वाल्मीकेर्नारदो वचः श्रूयतामिति चामन्त्र्य प्रहृष्टो वाक्यमब्रवीत् ॥६॥

                      हिन्दी अनुवाद: तीनों लोकों को जानने वाले नारद ने वाल्मीकि का यह वचन सुनकर कहा – “सुनिए” और बहुत प्रसन्न होकर बोले।

                      सरल अर्थ: नारद जी तीनों लोकों के जानकार थे। वाल्मीकि जी का सवाल सुनकर वे बहुत खुश हुए और बोले – “अच्छा, मैं बताता हूँ।”


                      श्लोक

                      बहवो दुर्लभाश्चैव ये त्वया कीर्तिता गुणाः मुने वक्ष्याम्यहं बुद्ध्वा तैर्युक्तः श्रूयतां नरः ॥७॥

                      हिन्दी अनुवाद: हे मुनि! तुमने जिन गुणों का वर्णन किया है, वे बहुत दुर्लभ हैं। मैं सोच-समझकर बताता हूँ कि ऐसा मनुष्य कौन है, सुनिए।

                      सरल अर्थ: “तुमने जो गुण बताए, वे बहुत कम लोगों में मिलते हैं। मैं सोचकर बता रहा हूँ कि ऐसा व्यक्ति है, सुनो।”


                      श्लोक

                      इक्ष्वाकुवंशप्रभवो रामो नाम जनैः श्रुतः नियतात्मा महावीर्यो द्युतिमान् धृतिमान् वशी ॥८॥

                      हिन्दी अनुवाद: इक्ष्वाकु वंश में उत्पन्न, राम नाम से प्रसिद्ध, संयमित मन वाला, महान पराक्रमी, तेजस्वी, धैर्यवान् और जितेन्द्रिय।

                      सरल अर्थ: “इक्ष्वाकु (सूर्यवंश) में पैदा हुए, नाम है राम। मन पर पूरा काबू, बहुत ताकतवर, चमकदार व्यक्तित्व, धैर्यवान् और इन्द्रियों को काबू में रखने वाले।”


                      श्लोक

                      बुद्धिमान् नीतिमान् वाग्मी श्रीमान् शत्रुनिबर्हणः विपुलांसो महाबाहुः कंबुग्रीवो महाहनुः ॥९॥

                      हिन्दी अनुवाद: बुद्धिमान्, नीतिवान्, वक्ता, श्रीमान्, शत्रुओं का नाश करने वाले, चौड़े कंधे, लंबी भुजाएँ, शंख जैसी गर्दन, बड़ा जबड़ा।

                      सरल अर्थ: “बहुत समझदार, नीति जानने वाले, अच्छा बोलने वाले, सुंदर, दुश्मनों को मारने वाले। कंधे चौड़े, बाजू लंबे, गर्दन शंख जैसी, मुँह मजबूत।”


                      श्लोक १०

                      महोरस्को महेष्वासो गूढजत्रुर्वरारिहा आजानुबाहुः सुशिराः सुललाटः सुविक्रमः ॥१०॥

                      हिन्दी अनुवाद: चौड़ी छाती, महान धनुर्धर, छिपी हुई हड्डियाँ, सुंदर नाक, घुटनों तक हाथ, सुंदर मस्तक, अच्छा पराक्रम।

                      सरल अर्थ: “छाती चौड़ी, धनुष चलाने में महान, शरीर सुडौल, नाक सुंदर, हाथ घुटनों तक लंबे, माथा सुंदर, चलने-लड़ने में बहुत तेज।”


                      नोट: ये १० श्लोक रामायण की शुरुआत हैं। यहाँ वाल्मीकि जी नारद से पूछते हैं कि दुनिया में सबसे श्रेष्ठ पुरुष कौन है? नारद जी कहते हैं – श्रीराम। अगले श्लोकों में राम जी के और गुण बताए जाते हैं।

                      श्लोक ११

                      समः समविभक्ताङ्गः स्निग्धवर्णः प्रतापवान् पीनवक्षाः विशालाक्षो लक्ष्मीवान् शुभलक्षणः ॥११॥

                      हिन्दी अनुवाद: समान अंगों वाला, सुन्दर अंग-प्रत्यंग, चिकना रंग, प्रतापी, चौड़ी छाती, बड़े नेत्र, लक्ष्मीवान्, शुभ लक्षणों से युक्त।

                      सरल अर्थ: श्रीराम का शरीर हर अंग से बराबर और सुन्दर था। रंग चमकदार और कोमल, बहुत तेजस्वी, छाती चौड़ी, आँखें बड़ी-बड़ी, सौभाग्यशाली और शरीर पर शुभ चिह्न।


                      श्लोक १२

                      धर्मज्ञः सत्यसंधश्च प्रजानां हिते रतः यशस्वी ज्ञानसम्पन्नः शुचिर्वश्यः समाधिमान् ॥१२॥

                      हिन्दी अनुवाद: धर्म को जानने वाला, सत्य पर अटल, प्रजा के हित में लगा रहने वाला, यशस्वी, ज्ञान से भरपूर, पवित्र, इन्द्रियों पर विजयी, समाधि लगाने वाला।

                      सरल अर्थ: धर्म अच्छे से समझते थे, झूठ कभी नहीं बोलते, जनता का भला चाहते थे, बहुत प्रसिद्ध, ज्ञानी, पवित्र, मन-इन्द्रियों पर काबू, ध्यान लगाते थे।


                      श्लोक १३

                      राजविद्या विनीतश्च ब्राह्मणानां सेवकः नित्यं ब्रह्मणि निष्णातो ब्रह्मण्यश्च महातपाः ॥१३॥

                      हिन्दी अनुवाद: राजनीति में निपुण, विनम्र, ब्राह्मणों की सेवा करने वाला, वेद-ज्ञान में पारंगत, ब्राह्मण-भक्त, महान तपस्वी।

                      सरल अर्थ: राजा कैसे चलाएँ, पूरी विद्या थी। बहुत विनम्र, ब्राह्मणों की सेवा करते, वेदों के बड़े जानकार, ब्राह्मणों से प्रेम, बहुत तप करते थे।


                      श्लोक १४

                      सर्वशास्त्रार्थतत्त्वज्ञः स्मृतिमान् प्रतिभानवान् सर्वलोकप्रियः साधुः अदीनात्मा विचक्षणः ॥१४॥

                      हिन्दी अनुवाद: सभी शास्त्रों के तत्त्व जानने वाला, अच्छी स्मृति, तीव्र बुद्धि, सबको प्रिय, सज्जन, उदार हृदय, कुशल।

                      सरल अर्थ: सभी किताबों-शास्त्रों का गहरा ज्ञान, याददाश्त तेज, बुद्धि बहुत तेज, सबको प्यारे, नेक इंसान, दुखी नहीं होते, हर काम में होशियार।


                      श्लोक १५

                      सर्वदा अभिगुप्तश्च स्वजनेषु प्रियंवदः वृद्धानां चैव संनादति सततं प्रियदर्शनः ॥१५॥

                      हिन्दी अनुवाद: हमेशा प्रजा की रक्षा करने वाला, अपनों से मीठा बोलने वाला, बूढ़ों से प्यार से बात करने वाला, देखने में सुन्दर।

                      सरल अर्थ: अपने लोगों की हमेशा रक्षा करते, परिवार से प्यार से बोलते, बड़ों का सम्मान करते, देखते ही मन खुश हो जाता।


                      श्लोक १६

                      जितक्रोधो महाशीलो गुणवान् सत्यवादिनः धर्मे निरतः सततं प्रजानां हिते रतः ॥१६॥

                      हिन्दी अनुवाद: क्रोध पर विजय पाने वाला, महान चरित्र, गुणवान्, सत्य बोलने वाला, धर्म में लगा रहने वाला, प्रजा के हित में तत्पर।

                      सरल अर्थ: गुस्सा कभी नहीं आता, चरित्र बहुत ऊँचा, गुणी, सच बोलते, धर्म में डूबे रहते, जनता का भला करने में लगे रहते।


                      श्लोक १७

                      सर्वविद्याविशारदः सर्वलोकहिते रतः सर्वदा प्रियवादिनः सत्यसंधः प्रतापवान् ॥१७॥

                      हिन्दी अनुवाद: सभी विद्याओं में निपुण, सबके हित में लगा रहने वाला, मीठा बोलने वाला, सत्य पर अटल, प्रतापी।

                      सरल अर्थ: हर विद्या में माहिर, सबका भला चाहते, प्यार से बोलते, सच के पक्के, बहुत प्रभावशाली।


                      श्लोक १८

                      नागराजसमः श्रीमान् वीर्ये बलवत्तरः धनुर्वेदे निपुणः सर्वशास्त्रार्थपारगः ॥१८॥

                      हिन्दी अनुवाद: सौंदर्य में नागराज (शेषनाग) जैसा, पराक्रम में सबसे बलवान, धनुर्विद्या में कुशल, सभी शास्त्रों का पारंगत।

                      सरल अर्थ: सुंदरता में शेषनाग जैसे, ताकत में सबसे आगे, धनुष चलाने में महारथी, सभी किताबों के मास्टर।


                      श्लोक १९

                      यः सदा प्रियकृत् प्राज्ञो धर्मकामार्थकोविदः सर्वलोकप्रियः साधुः सत्यवादी जितेन्द्रियः ॥१९॥

                      हिन्दी अनुवाद: हमेशा प्रिय करने वाला, बुद्धिमान, धर्म-अर्थ-काम को जानने वाला, सबको प्रिय, सज्जन, सत्यवादी, इन्द्रिय-विजयी।

                      सरल अर्थ: सबको खुश रखते, बहुत समझदार, धर्म-धन-इच्छा का सही ज्ञान, सबके चहेते, नेक, सच बोलते, मन-इन्द्रियों पर काबू।


                      श्लोक २०

                      सर्वदा दानशीलश्च सत्यसंधः प्रतापवान् नारायणसमो लोकेषु रामः श्रीमान् सदा भवेत् ॥२०॥

                      हिन्दी अनुवाद: हमेशा दान देने वाला, सत्य पर अटल, प्रतापी, लोक में श्रीमान् राम सदा नारायण (विष्णु) के समान हैं।

                      सरल अर्थ: दान करते रहते, सच के पक्के, बहुत प्रभावशाली, दुनिया में राम जी हमेशा भगवान विष्णु जैसे हैं।


                      बालकाण्ड (सर्ग ) – श्लोक से २० तक का सारांश

                      महर्षि वाल्मीकि जंगल में तप कर रहे थे। एक दिन उन्होंने सोचा – आजकल दुनिया में सबसे अच्छा इंसान कौन है?” वे नारद मुनि के पास गए। नारद तीनों लोकों के जानकार थे।

                      वाल्मीकि ने पूछा:

                          • “ऐसा कौन है जो गुणवान, बहादुर, धर्मज्ञ, कृतज्ञ (एहसान मानने वाला), सच बोलने वाला, वचन का पक्का हो?
                          • जो अच्छे चरित्र वाला, सबका भला चाहने वाला, विद्वान, ताकतवर, देखते ही प्यारा लगे?
                          • जो मन पर काबू रखे, गुस्सा करे, तेजस्वी हो, जलन करे, और गुस्सा आने पर देवता भी डरें?”

                        वाल्मीकि बोले: मुझे बहुत उत्सुकता है, आप ही बता सकते हैं।

                        नारद जी मुस्कुराए और बोले: ऐसे गुण बहुत दुर्लभ हैं, लेकिन एक व्यक्ति हैनाम है राम।

                        फिर नारद जी ने राम की तारीफ शुरू की:

                            • राम इक्ष्वाकु (सूर्यवंश) में पैदा हुए।
                            • मन पर काबू, बहुत ताकतवर, तेजस्वी, धैर्यवान, इन्द्रियों को जीतने वाले।
                            • समझदार, नीति जानने वाले, अच्छे वक्ता, सुंदर, दुश्मनों को मारने वाले।
                            • चौड़े कंधे, लंबे बाजू, शंख जैसी गर्दन, चौड़ी छाती, धनुष के महारथी।
                            • शरीर सुडौल, आँखें बड़ी, सौभाग्यशाली, शुभ चिह्नों वाला।
                            • धर्म जानते हैं, सच बोलते हैं, जनता का भला करते हैं, प्रसिद्ध, ज्ञानी, पवित्र।
                            • राजनीति के माहिर, विनम्र, ब्राह्मणों की सेवा करते हैं, वेदों के जानकार।
                            • सभी शास्त्रों के मास्टर, याददाश्त तेज, बुद्धि तेज, सबको प्यारे, नेक इंसान।
                            • अपनों की रक्षा करते हैं, मीठा बोलते हैं, बड़ों का सम्मान करते हैं।
                            • गुस्सा नहीं करते, चरित्र ऊँचा, दान करते हैं, प्रभावशाली हैं।
                            • सुंदरता में शेषनाग जैसे, ताकत में सबसे आगे।
                            • सबको खुश रखते हैं, धर्मधनइच्छा का सही ज्ञान रखते हैं।
                            • आखिर में नारद बोले: “राम भगवान विष्णु के समान हैं।

                          सारांश: ये २० श्लोक रामायण की नींव हैं। वाल्मीकि पूछते हैं – सबसे श्रेष्ठ इंसान कौन? नारद कहते हैं – राम। और राम के ३२ गुण बताते हैं। यहाँ राम को मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में पेश किया गया – जो राजा, पुत्र, भाई, पति, योद्धा, भक्त सबमें आदर्श हैं।


                          अगला मैसेज करें – “अगले २० श्लोक लिखो” – मैं पूरा विस्तार से लिख दूँगा। 🙏

                          Also read Narasimha Avatars 

                          Valmiki Ramayana Bāla Kāṇḍa Chapter 1|

                          वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड

                              • कुल श्लोक: लगभग २४,००० श्लोक
                              • भाषा: संस्कृत (अनुष्टुप छन्द)
                              • कथा: भगवान विष्णु के ७वें अवतार श्रीराम की जीवन गाथा।
                                    • जन्म → वनवास → सीता हरण → रावण वध → अयोध्या लौटना

                                • उद्देश्य: १. धर्म की शिक्षा २. मर्यादा पुरुषोत्तम राम का आदर्श ३. अच्छाई की जीत (सत् पर असत् की विजय)


                              . बालकाण्ड का सार (जहाँ से आपने पढ़ना शुरू किया)

                                  • कहानी की शुरुआत:
                                        • वाल्मीकि नारद से पूछते हैं: दुनिया में सबसे श्रेष्ठ पुरुष कौन है?”

                                        • नारद कहते हैं: राम

                                        • फिर राम के गुण, रूप, जन्म, बचपन, विश्वामित्र के साथ यज्ञ रक्षा, सीता स्वयंवर तक की कहानी।

                                    • मुख्य घटनाएँ (बालकाण्ड में): १. राम-लक्ष्मण का जन्म २. विश्वामित्र का आगमन ३. ताड़का वध ४. अहल्या उद्धार ५. मिथिला में सीता स्वयंवर ६. परशुराम संवाद


                                  . रामायण के पात्र (मुख्य):

                                  पात्र संबंध गुण
                                  श्रीराम दशरथ पुत्र मर्यादा पुरुषोत्तम
                                  सीता जनक दुखारी पतिव्रता, धैर्य
                                  लक्ष्मण राम का भाई भाई-भक्ति
                                  हनुमान राम भक्त शक्ति, बुद्धि, भक्ति
                                  रावण लंका राजा विद्या, अहंकार
                                  दशरथ अयोध्या राजा वचनबद्ध


                                  . रामायण का संदेश (सभी के लिए):

                                      1. सत्य बोलो – राम ने १४ साल वनवास स्वीकार किया।
                                      2. वचन निभाओ – दशरथ ने कैकेयी का वचन निभाया।
                                      3. भाईभरत जैसा हो – भरत ने राम की चरण-पादुका सिंहासन पर रखी।
                                      4. भक्ति करो – हनुमान जैसी।
                                      5. अहंकार मत करो – रावण का अंत।


                                    . पढ़ने से पहले याद रखें:

                                        • रामायण केवल कहानी नहीं, जीवन दर्शन है।

                                        • हर काण्ड एक संदेश देता है:
                                              • बालकाण्ड → आदर्श जन्म और शिक्षा
                                              • अयोध्याकाण्ड → त्याग और वचन
                                              • सुन्दरकाण्ड → भक्ति और उम्मीद
                                              • युद्धकाण्ड → धर्म युद्ध


                                        आज हम बल कांड का १ से  २० श्लोक के ऊपर लिखेंगे अगर आपको पसंद आया आगे ये यात्रा जारी रखेंगे , लिखना सुरु करते है ,

                                        श्लोक

                                        तपःस्वाध्यायनिरतं तपस्वी वाग्विदां वरम् नारदं परिपप्रच्छ वाल्मीकिः मुनिपुङ्गवम् ॥१॥

                                        हिन्दी अनुवाद: तप, स्वाध्याय (वेद-पाठ) में लगा रहने वाला, तपस्वियों में श्रेष्ठ और वाणी के विद्वानों में सर्वश्रेष्ठ नारद मुनि को वाल्मीकि ने प्रश्न किया।

                                        सरल अर्थ: वाल्मीकि जी बहुत बड़े तपस्वी और विद्वान थे। वे हमेशा वेद पढ़ते और तप करते रहते थे। एक दिन उन्होंने महर्षि नारद से कुछ पूछने का मन बनाया।


                                        श्लोक

                                        को न्वस्मिन् साम्प्रतं लोके गुणवान् कश्च वीर्यवान् धर्मज्ञश्च कृतज्ञश्च सत्यवाक्यो दृढव्रतः ॥२॥

                                        हिन्दी अनुवाद: इस समय इस लोक में ऐसा कौन है जो गुणवान् हो, वीर हो, धर्म को जानने वाला हो, कृतज्ञ (उपकार मानने वाला) हो, सत्य बोलने वाला हो और दृढ़ निश्चय वाला हो?

                                        सरल अर्थ: वाल्मीकि जी नारद से पूछते हैं – “आजकल दुनिया में ऐसा कौन है जो बहुत अच्छे गुणों वाला, बहादुर, धर्म की पूरी समझ रखने वाला, किसी का एहसान मानने वाला, हमेशा सच बोलने वाला और अपने वचन पर अटल रहने वाला हो?”


                                        श्लोक

                                        चारित्रेण को युक्तः सर्वभूतेषु को हितः विद्वान् कः कः समर्थश्च कश्चैकप्रियदर्शनः ॥३॥

                                        हिन्दी अनुवाद: कौन ऐसा है जो अच्छे चरित्र वाला हो, सभी प्राणियों के लिए हितकारी हो, विद्वान् हो, समर्थ (काम करने में सक्षम) हो और जिसका दर्शन एक बार करने मात्र से प्रिय लगे?

                                        सरल अर्थ: “ऐसा कौन है जो बहुत अच्छा व्यवहार रखता हो, सबके लिए भला चाहता हो, बहुत ज्ञानी हो, हर काम कर सकता हो और जिसे देखते ही मन प्रसन्न हो जाए?”


                                        श्लोक

                                        आत्मवान् को जितक्रोधो द्युतिमान् कोऽनसूयकः कस्य बिभ्यति देवाश्च जारितरोषस्य संयुगे ॥४॥

                                        हिन्दी अनुवाद: कौन आत्मसंयमी है, क्रोध पर विजय पाने वाला है, तेजस्वी है, डाह (ईर्ष्या) रहित है और युद्ध में क्रोधित होने पर देवता भी जिससे डरते हैं?

                                        सरल अर्थ: “ऐसा कौन है जो अपने मन पर पूरा काबू रखता हो, गुस्सा नहीं करता, बहुत तेजस्वी (चमकदार व्यक्तित्व) वाला हो, किसी से जलन नहीं करता और गुस्सा आने पर देवता भी उससे डर जाएँ?”


                                        श्लोक

                                        एतदिच्छाम्यहं श्रोतुं परं कौतूहलं हि मे महर्षे त्वं समर्थोऽसि ज्ञातुमेवंविधं नरम् ॥५॥

                                        हिन्दी अनुवाद: मैं ऐसे व्यक्ति के बारे में सुनना चाहता हूँ, मेरे मन में बड़ी उत्सुकता है। हे महर्षि! आप ही ऐसे मनुष्य को जानने में समर्थ हैं।

                                        सरल अर्थ: “मुझे ऐसे महान व्यक्ति की कहानी सुननी है, मैं बहुत उत्सुक हूँ। हे नारद जी! सिर्फ आप ही ऐसे इंसान को जानते हैं।”


                                        श्लोक

                                        श्रुत्वा चैतत् त्रिलोकज्ञो वाल्मीकेर्नारदो वचः श्रूयतामिति चामन्त्र्य प्रहृष्टो वाक्यमब्रवीत् ॥६॥

                                        हिन्दी अनुवाद: तीनों लोकों को जानने वाले नारद ने वाल्मीकि का यह वचन सुनकर कहा – “सुनिए” और बहुत प्रसन्न होकर बोले।

                                        सरल अर्थ: नारद जी तीनों लोकों के जानकार थे। वाल्मीकि जी का सवाल सुनकर वे बहुत खुश हुए और बोले – “अच्छा, मैं बताता हूँ।”


                                        श्लोक

                                        बहवो दुर्लभाश्चैव ये त्वया कीर्तिता गुणाः मुने वक्ष्याम्यहं बुद्ध्वा तैर्युक्तः श्रूयतां नरः ॥७॥

                                        हिन्दी अनुवाद: हे मुनि! तुमने जिन गुणों का वर्णन किया है, वे बहुत दुर्लभ हैं। मैं सोच-समझकर बताता हूँ कि ऐसा मनुष्य कौन है, सुनिए।

                                        सरल अर्थ: “तुमने जो गुण बताए, वे बहुत कम लोगों में मिलते हैं। मैं सोचकर बता रहा हूँ कि ऐसा व्यक्ति है, सुनो।”


                                        श्लोक

                                        इक्ष्वाकुवंशप्रभवो रामो नाम जनैः श्रुतः नियतात्मा महावीर्यो द्युतिमान् धृतिमान् वशी ॥८॥

                                        हिन्दी अनुवाद: इक्ष्वाकु वंश में उत्पन्न, राम नाम से प्रसिद्ध, संयमित मन वाला, महान पराक्रमी, तेजस्वी, धैर्यवान् और जितेन्द्रिय।

                                        सरल अर्थ: “इक्ष्वाकु (सूर्यवंश) में पैदा हुए, नाम है राम। मन पर पूरा काबू, बहुत ताकतवर, चमकदार व्यक्तित्व, धैर्यवान् और इन्द्रियों को काबू में रखने वाले।”


                                        श्लोक

                                        बुद्धिमान् नीतिमान् वाग्मी श्रीमान् शत्रुनिबर्हणः विपुलांसो महाबाहुः कंबुग्रीवो महाहनुः ॥९॥

                                        हिन्दी अनुवाद: बुद्धिमान्, नीतिवान्, वक्ता, श्रीमान्, शत्रुओं का नाश करने वाले, चौड़े कंधे, लंबी भुजाएँ, शंख जैसी गर्दन, बड़ा जबड़ा।

                                        सरल अर्थ: “बहुत समझदार, नीति जानने वाले, अच्छा बोलने वाले, सुंदर, दुश्मनों को मारने वाले। कंधे चौड़े, बाजू लंबे, गर्दन शंख जैसी, मुँह मजबूत।”


                                        श्लोक १०

                                        महोरस्को महेष्वासो गूढजत्रुर्वरारिहा आजानुबाहुः सुशिराः सुललाटः सुविक्रमः ॥१०॥

                                        हिन्दी अनुवाद: चौड़ी छाती, महान धनुर्धर, छिपी हुई हड्डियाँ, सुंदर नाक, घुटनों तक हाथ, सुंदर मस्तक, अच्छा पराक्रम।

                                        सरल अर्थ: “छाती चौड़ी, धनुष चलाने में महान, शरीर सुडौल, नाक सुंदर, हाथ घुटनों तक लंबे, माथा सुंदर, चलने-लड़ने में बहुत तेज।”


                                        नोट: ये १० श्लोक रामायण की शुरुआत हैं। यहाँ वाल्मीकि जी नारद से पूछते हैं कि दुनिया में सबसे श्रेष्ठ पुरुष कौन है? नारद जी कहते हैं – श्रीराम। अगले श्लोकों में राम जी के और गुण बताए जाते हैं।

                                        श्लोक ११

                                        समः समविभक्ताङ्गः स्निग्धवर्णः प्रतापवान् पीनवक्षाः विशालाक्षो लक्ष्मीवान् शुभलक्षणः ॥११॥

                                        हिन्दी अनुवाद: समान अंगों वाला, सुन्दर अंग-प्रत्यंग, चिकना रंग, प्रतापी, चौड़ी छाती, बड़े नेत्र, लक्ष्मीवान्, शुभ लक्षणों से युक्त।

                                        सरल अर्थ: श्रीराम का शरीर हर अंग से बराबर और सुन्दर था। रंग चमकदार और कोमल, बहुत तेजस्वी, छाती चौड़ी, आँखें बड़ी-बड़ी, सौभाग्यशाली और शरीर पर शुभ चिह्न।


                                        श्लोक १२

                                        धर्मज्ञः सत्यसंधश्च प्रजानां हिते रतः यशस्वी ज्ञानसम्पन्नः शुचिर्वश्यः समाधिमान् ॥१२॥

                                        हिन्दी अनुवाद: धर्म को जानने वाला, सत्य पर अटल, प्रजा के हित में लगा रहने वाला, यशस्वी, ज्ञान से भरपूर, पवित्र, इन्द्रियों पर विजयी, समाधि लगाने वाला।

                                        सरल अर्थ: धर्म अच्छे से समझते थे, झूठ कभी नहीं बोलते, जनता का भला चाहते थे, बहुत प्रसिद्ध, ज्ञानी, पवित्र, मन-इन्द्रियों पर काबू, ध्यान लगाते थे।


                                        श्लोक १३

                                        राजविद्या विनीतश्च ब्राह्मणानां सेवकः नित्यं ब्रह्मणि निष्णातो ब्रह्मण्यश्च महातपाः ॥१३॥

                                        हिन्दी अनुवाद: राजनीति में निपुण, विनम्र, ब्राह्मणों की सेवा करने वाला, वेद-ज्ञान में पारंगत, ब्राह्मण-भक्त, महान तपस्वी।

                                        सरल अर्थ: राजा कैसे चलाएँ, पूरी विद्या थी। बहुत विनम्र, ब्राह्मणों की सेवा करते, वेदों के बड़े जानकार, ब्राह्मणों से प्रेम, बहुत तप करते थे।


                                        श्लोक १४

                                        सर्वशास्त्रार्थतत्त्वज्ञः स्मृतिमान् प्रतिभानवान् सर्वलोकप्रियः साधुः अदीनात्मा विचक्षणः ॥१४॥

                                        हिन्दी अनुवाद: सभी शास्त्रों के तत्त्व जानने वाला, अच्छी स्मृति, तीव्र बुद्धि, सबको प्रिय, सज्जन, उदार हृदय, कुशल।

                                        सरल अर्थ: सभी किताबों-शास्त्रों का गहरा ज्ञान, याददाश्त तेज, बुद्धि बहुत तेज, सबको प्यारे, नेक इंसान, दुखी नहीं होते, हर काम में होशियार।


                                        श्लोक १५

                                        सर्वदा अभिगुप्तश्च स्वजनेषु प्रियंवदः वृद्धानां चैव संनादति सततं प्रियदर्शनः ॥१५॥

                                        हिन्दी अनुवाद: हमेशा प्रजा की रक्षा करने वाला, अपनों से मीठा बोलने वाला, बूढ़ों से प्यार से बात करने वाला, देखने में सुन्दर।

                                        सरल अर्थ: अपने लोगों की हमेशा रक्षा करते, परिवार से प्यार से बोलते, बड़ों का सम्मान करते, देखते ही मन खुश हो जाता।


                                        श्लोक १६

                                        जितक्रोधो महाशीलो गुणवान् सत्यवादिनः धर्मे निरतः सततं प्रजानां हिते रतः ॥१६॥

                                        हिन्दी अनुवाद: क्रोध पर विजय पाने वाला, महान चरित्र, गुणवान्, सत्य बोलने वाला, धर्म में लगा रहने वाला, प्रजा के हित में तत्पर।

                                        सरल अर्थ: गुस्सा कभी नहीं आता, चरित्र बहुत ऊँचा, गुणी, सच बोलते, धर्म में डूबे रहते, जनता का भला करने में लगे रहते।


                                        श्लोक १७

                                        सर्वविद्याविशारदः सर्वलोकहिते रतः सर्वदा प्रियवादिनः सत्यसंधः प्रतापवान् ॥१७॥

                                        हिन्दी अनुवाद: सभी विद्याओं में निपुण, सबके हित में लगा रहने वाला, मीठा बोलने वाला, सत्य पर अटल, प्रतापी।

                                        सरल अर्थ: हर विद्या में माहिर, सबका भला चाहते, प्यार से बोलते, सच के पक्के, बहुत प्रभावशाली।


                                        श्लोक १८

                                        नागराजसमः श्रीमान् वीर्ये बलवत्तरः धनुर्वेदे निपुणः सर्वशास्त्रार्थपारगः ॥१८॥

                                        हिन्दी अनुवाद: सौंदर्य में नागराज (शेषनाग) जैसा, पराक्रम में सबसे बलवान, धनुर्विद्या में कुशल, सभी शास्त्रों का पारंगत।

                                        सरल अर्थ: सुंदरता में शेषनाग जैसे, ताकत में सबसे आगे, धनुष चलाने में महारथी, सभी किताबों के मास्टर।


                                        श्लोक १९

                                        यः सदा प्रियकृत् प्राज्ञो धर्मकामार्थकोविदः सर्वलोकप्रियः साधुः सत्यवादी जितेन्द्रियः ॥१९॥

                                        हिन्दी अनुवाद: हमेशा प्रिय करने वाला, बुद्धिमान, धर्म-अर्थ-काम को जानने वाला, सबको प्रिय, सज्जन, सत्यवादी, इन्द्रिय-विजयी।

                                        सरल अर्थ: सबको खुश रखते, बहुत समझदार, धर्म-धन-इच्छा का सही ज्ञान, सबके चहेते, नेक, सच बोलते, मन-इन्द्रियों पर काबू।


                                        श्लोक २०

                                        सर्वदा दानशीलश्च सत्यसंधः प्रतापवान् नारायणसमो लोकेषु रामः श्रीमान् सदा भवेत् ॥२०॥

                                        हिन्दी अनुवाद: हमेशा दान देने वाला, सत्य पर अटल, प्रतापी, लोक में श्रीमान् राम सदा नारायण (विष्णु) के समान हैं।

                                        सरल अर्थ: दान करते रहते, सच के पक्के, बहुत प्रभावशाली, दुनिया में राम जी हमेशा भगवान विष्णु जैसे हैं।


                                        बालकाण्ड (सर्ग ) – श्लोक से २० तक का सारांश

                                        महर्षि वाल्मीकि जंगल में तप कर रहे थे। एक दिन उन्होंने सोचा – आजकल दुनिया में सबसे अच्छा इंसान कौन है?” वे नारद मुनि के पास गए। नारद तीनों लोकों के जानकार थे।

                                        वाल्मीकि ने पूछा:

                                            • “ऐसा कौन है जो गुणवान, बहादुर, धर्मज्ञ, कृतज्ञ (एहसान मानने वाला), सच बोलने वाला, वचन का पक्का हो?
                                            • जो अच्छे चरित्र वाला, सबका भला चाहने वाला, विद्वान, ताकतवर, देखते ही प्यारा लगे?
                                            • जो मन पर काबू रखे, गुस्सा करे, तेजस्वी हो, जलन करे, और गुस्सा आने पर देवता भी डरें?”

                                          वाल्मीकि बोले: मुझे बहुत उत्सुकता है, आप ही बता सकते हैं।

                                          नारद जी मुस्कुराए और बोले: ऐसे गुण बहुत दुर्लभ हैं, लेकिन एक व्यक्ति हैनाम है राम।

                                          फिर नारद जी ने राम की तारीफ शुरू की:

                                              • राम इक्ष्वाकु (सूर्यवंश) में पैदा हुए।
                                              • मन पर काबू, बहुत ताकतवर, तेजस्वी, धैर्यवान, इन्द्रियों को जीतने वाले।
                                              • समझदार, नीति जानने वाले, अच्छे वक्ता, सुंदर, दुश्मनों को मारने वाले।
                                              • चौड़े कंधे, लंबे बाजू, शंख जैसी गर्दन, चौड़ी छाती, धनुष के महारथी।
                                              • शरीर सुडौल, आँखें बड़ी, सौभाग्यशाली, शुभ चिह्नों वाला।
                                              • धर्म जानते हैं, सच बोलते हैं, जनता का भला करते हैं, प्रसिद्ध, ज्ञानी, पवित्र।
                                              • राजनीति के माहिर, विनम्र, ब्राह्मणों की सेवा करते हैं, वेदों के जानकार।
                                              • सभी शास्त्रों के मास्टर, याददाश्त तेज, बुद्धि तेज, सबको प्यारे, नेक इंसान।
                                              • अपनों की रक्षा करते हैं, मीठा बोलते हैं, बड़ों का सम्मान करते हैं।
                                              • गुस्सा नहीं करते, चरित्र ऊँचा, दान करते हैं, प्रभावशाली हैं।
                                              • सुंदरता में शेषनाग जैसे, ताकत में सबसे आगे।
                                              • सबको खुश रखते हैं, धर्मधनइच्छा का सही ज्ञान रखते हैं।
                                              • आखिर में नारद बोले: “राम भगवान विष्णु के समान हैं।

                                            सारांश: ये २० श्लोक रामायण की नींव हैं। वाल्मीकि पूछते हैं – सबसे श्रेष्ठ इंसान कौन? नारद कहते हैं – राम। और राम के ३२ गुण बताते हैं। यहाँ राम को मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में पेश किया गया – जो राजा, पुत्र, भाई, पति, योद्धा, भक्त सबमें आदर्श हैं।


                                            अगला मैसेज करें – “अगले २० श्लोक लिखो” – मैं पूरा विस्तार से लिख दूँगा। 🙏

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