Nehru’s Policies: Roots of Corruption & Black Market in India

Nehru’s Policies: Roots of Corruption & Black Market in India
Nehru's Policies: Roots of Corruption & Black Market in India

Table of Contents

कश्मीर और चीन की अनकही कहानी: Nehru’s Policies की गहरी समीक्षा

प्रस्तावना: नेहरू कौन थे और क्यों उनकी नीतियां आज भी चर्चा में हैं?

दोस्तों, जवाहरलाल नेहरू भारत के पहले प्रधानमंत्री थे। वे एक बड़े नेता थे, जिन्होंने आजादी की लड़ाई में महात्मा गांधी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। नेहरू जी का जन्म 1889 में हुआ था, और वे एक अमीर परिवार से थे। उन्होंने इंग्लैंड में पढ़ाई की और वकील बने। लेकिन देश की आजादी के लिए उन्होंने सब छोड़ दिया। 1947 में भारत आजाद हुआ, और नेहरू जी 17 साल तक प्रधानमंत्री रहे, 1964 तक। Nehru’s Policies Corruption & Black Market in India

लेकिन दोस्तों, कोई भी इंसान परफेक्ट नहीं होता। नेहरू जी ने कई अच्छे काम किए, जैसे देश को एकजुट रखना, संविधान बनाना, और विज्ञान-शिक्षा पर जोर देना। पर उनकी कुछ नीतियां ऐसी थीं, जिनकी वजह से देश को आज भी परेशानी हो रही है। खासकर कश्मीर, चीन के साथ रिश्ते, और अर्थव्यवस्था की नीतियां। ये नीतियां क्यों गलत थीं? इन्हें हम सरल भाषा में समझेंगे, जैसे कोई दोस्त घर बैठकर कहानी सुना रहा हो।Nehru’s Policies Corruption & Black Market in India

कश्मीर की कहानी बहुत पुरानी है। ये एक खूबसूरत जगह है, जहां बर्फीली पहाड़ियां, झीलें और बाग हैं। लेकिन 1947 से ये विवाद का केंद्र बन गया। नेहरू जी की नीतियां यहां क्यों आलोचना की जाती हैं? क्योंकि उनकी वजह से कश्मीर का एक बड़ा हिस्सा पाकिस्तान के पास चला गया, और समस्या आज तक नहीं सुलझी। हम इसे स्टेप बाय स्टेप समझेंगे।

कश्मीर पर नेहरू की नीतियांगलतियां जो देश को महंगी पड़ीं

कश्मीर का पुराना इतिहास: हमे समझने के लिए जरूरी हे।

दोस्तों, कश्मीर को समझने के लिए थोड़ा पीछे चलते हैं। सदियों पहले, कश्मीर में हिंदू राजा थे, फिर मुस्लिम शासक आए। 19वीं सदी में सिखों ने इसे जीता, और फिर ब्रिटिश राज में ये एक रियासत बन गई। महाराजा हरि सिंह हिंदू थे, लेकिन ज्यादातर लोग मुस्लिम थे। 1947 में भारत और पाकिस्तान बने, तो रियासतों को चुनना था कि भारत में जाएं या पाकिस्तान में।Nehru’s Policies Corruption & Black Market in India

कश्मीर के महाराजा हरि सिंह अलग रहना चाहते थे, न भारत न पाकिस्तान। लेकिन पाकिस्तान ने हमला कर दिया। पाकिस्तानी कबीलों ने अक्टूबर 1947 में कश्मीर पर आक्रमण किया। वे लूटपाट करते हुए श्रीनगर की तरफ बढ़े। महाराजा डर गए और भारत से मदद मांगी। नेहरू जी ने कहा, पहले विलय पत्र पर साइन करो, तब मदद मिलेगी। हरि सिंह ने साइन किया, और भारतीय सेना गई। लेकिन यहां नेहरू जी की पहली गलती हुई।Nehru’s Policies Corruption & Black Market in India

नेहरू के  पहला  गलती: देरी करना और सेना भेजना

कल्पना करो, तुम्हारा घर पर कोई हमला कर रहा है, और तुम मदद मांगो, लेकिन मदद वाला कहे – पहले कागज पर साइन करो। नेहरू जी ने ठीक वैसा किया। वे शेख अब्दुल्ला से बात कर रहे थे, जो कश्मीर के लोकप्रिय नेता थे। नेहरू जी को लगता था कि अब्दुल्ला मुस्लिम हैं, तो लोग उन्हें मानेंगे। लेकिन देरी की वजह से पाकिस्तान ने कश्मीर का एक तिहाई हिस्सा कब्जा कर लिया, जो आज PoK कहलाता है। अगर नेहरू जी ने तुरंत सेना भेजी होती, तो शायद पूरा कश्मीर भारत का होता।Nehru’s Policies Corruption & Black Market in India

उदाहरण के लिए, सोचो एक गांव में दो भाई हैं। एक भाई का हिस्सा दूसरे पर हमला होता है, लेकिन बड़ा भाई कहता है – पहले मुझे अपना हिस्सा दे दो, तब बचाऊंगा। इसी बीच हमलावर आधा हिस्सा ले जाता है। नेहरू जी की आदर्शवादी सोच थी कि सब कुछ कानूनी तरीके से हो। लेकिन युद्ध में देरी मौत बुलाती है। कई इतिहासकार कहते हैं कि नेहरू जी की ये गलती रणनीतिक नहीं, राजनीतिक थी। वे कश्मीर को लोकतंत्र से जोड़ना चाहते थे, लेकिन हकीकत में ये कमजोरी बनी।Nehru’s Policies Corruption & Black Market in India

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दूसरा  बड़ा  गलती: संयुक्त राष्ट्र में ले जाना

युद्ध चल रहा था, भारतीय सेना आगे बढ़ रही थी। लेकिन नेहरू जी ने 1 जनवरी 1948 को कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र (UN) में ले गए। क्यों? क्योंकि वे शांति चाहते थे, और सोचते थे कि UN निष्पक्ष फैसला करेगा। लेकिन ये गलती थी। UN ने युद्धविराम करवा दिया, और जनमत संग्रह की बात की। जनमत संग्रह मतलब लोग वोट से फैसला करें कि भारत या पाकिस्तान। लेकिन पाकिस्तान ने अपना हिस्सा खाली नहीं किया, तो जनमत संग्रह कभी नहीं हुआ।Nehru’s Policies Corruption & Black Market in India

दोस्तों, ये जैसे तुम्हारा घर कोई छीन ले, और तुम कोर्ट जाओ, लेकिन कोर्ट कहे – दोनों मिलकर फैसला करो। लेकिन चोर घर छोड़ता नहीं। नेहरू जी को ब्रिटिश विदेश मंत्री की सलाह पर UN गए, लेकिन इससे समस्या अंतरराष्ट्रीय बन गई। आज पाकिस्तान इसी UN प्रस्ताव का हवाला देता है। अगर नेहरू जी युद्ध जारी रखते, तो शायद कश्मीर पूरा भारत का होता। लेकिन उनकी शांति की सोच ने देश को नुकसान पहुंचाया।Nehru’s Policies Corruption & Black Market in India

कुछ लोग कहते हैं कि नेहरू जी ने सही किया, क्योंकि युद्ध से ज्यादा मौतें होतीं। लेकिन आलोचक कहते हैं कि ये कमजोरी थी। नेहरू जी खुद कश्मीरी थे, तो भावनात्मक रूप से जुड़े थे, लेकिन रणनीति में कमजोर।Nehru’s Policies Corruption & Black Market in India

शेख अब्दुल्ला पर अंधा भरोसा: तीसरी गलती

शेख अब्दुल्ला “शेर-ए-कश्मीर” कहलाते थे। नेहरू जी के दोस्त थे। नेहरू जी ने उन्हें कश्मीर का प्रधानमंत्री बनाया, और ज्यादा छूट दी। लेकिन अब्दुल्ला की सोच अलगाववादी थी। वे कश्मीर को अलग रखना चाहते थे। 1953 में नेहरू जी ने उन्हें गिरफ्तार किया, लेकिन तब तक नुकसान हो चुका था। अब्दुल्ला ने पाकिस्तान से बात की, और कश्मीर में अशांति बढ़ाई।Nehru’s Policies Corruption & Black Market in India

उदाहरण: जैसे तुम किसी दोस्त पर भरोसा करो, लेकिन वो पीठ पीछे धोखा दे। नेहरू जी की ये गलती थी कि उन्होंने अब्दुल्ला को ज्यादा ताकत दी। इससे कश्मीर में भारत विरोधी भावना बढ़ी। आज भी कश्मीर में आतंकवाद की जड़ें इसी में हैं। नेहरू जी की नीति थी कि कश्मीर को “सुनहरी जंजीरों” से बांधो, मतलब प्यार से जोड़ो, लेकिन व्यावहारिक रूप से ये फेल हुआ।Nehru’s Policies Corruption & Black Market in India

अनुच्छेद 370: एक और विवादास्पद फैसला

नेहरू जी ने कश्मीर को स्पेशल स्टेटस दिया, अनुच्छेद 370 के तहत। इससे कश्मीर के अपने कानून थे, झंडा था। सोच थी कि इससे कश्मीरी खुश रहेंगे। लेकिन इससे अलगाव बढ़ा। बाहरी लोग वहां जमीन नहीं खरीद सकते थे, तो विकास रुका। 2019 में ये हटा, लेकिन नेहरू जी की ये नीति दशकों तक समस्या बनी रही।Nehru’s Policies Corruption & Black Market in India

कुछ लोग कहते हैं कि 370 जरूरी था, क्योंकि कश्मीर संवेदनशील था। लेकिन आलोचक कहते हैं कि ये अल्पसंख्यकों को खुश करने की नीति थी, जो बहुसंख्यकों को नजरअंदाज करती थी। नेहरू जी की अल्पसंख्यक तुष्टिकरण की आलोचना होती है।Nehru’s Policies Corruption & Black Market in India

आज का असर: कश्मीर क्यों जल रहा है?

नेहरू जी की गलतियों की वजह से आज कश्मीर में अशांति है। हजारों सैनिक शहीद हुए, अरबों रुपये खर्च हुए। पाकिस्तान आतंकवाद भेजता है, और UN का हवाला देता है। अगर नेहरू जी रणनीतिक होते, तो शायद ये समस्या न होती। लेकिन हम ये भी मानें कि नेहरू जी ने देश को एकजुट रखा, और कश्मीर को भारत से जोड़ा। फिर भी, गलतियां साफ हैं।Nehru’s Policies Corruption & Black Market in India

इस अध्याय में हमने कश्मीर की कहानी विस्तार से देखी। अब चीन पर चलते हैं।

चीन के साथ नेहरू की नीतियां – “हिंदी-चीनी भाई-भाई” का भ्रम

चीन का बैकग्राउंड: क्यों नेहरू जी ने गलत समझा

चीन एक बड़ा देश है, पुरानी सभ्यता। 1949 में कम्युनिस्ट क्रांति हुई, माओ त्से तुंग नेता बने। नेहरू जी ने चीन को दोस्त माना। वे “हिंदी-चीनी भाई-भाई” कहते थे। लेकिन 1962 में चीन ने भारत पर हमला किया, और भारत हार गया। क्यों? क्योंकि नेहरू जी की नीतियां भ्रम पर आधारित थीं।Nehru’s Policies Corruption & Black Market in India

नेहरू जी की विदेश नीति गुटनिरपेक्ष थी, मतलब न अमेरिका न रूस के साथ। वे चीन को संयुक्त राष्ट्र में सीट दिलाना चाहते थे। लेकिन चीन की मंशा अलग थी। वे तिब्बत पर कब्जा करना चाहते थे, और भारत की सीमाओं पर आंख थी। नेहरू जी ने इसे नजरअंदाज किया।Nehru’s Policies Corruption & Black Market in India

 नेहरू के  पहला  गलती: सीमा पर ध्यान न देना |

भारत-चीन सीमा मैकमोहन लाइन है, 1914 में बनी। लेकिन चीन इसे नहीं मानता। 1950 में चीन ने तिब्बत पर कब्जा किया। नेहरू जी ने विरोध किया, लेकिन कुछ नहीं किया। दलाई लामा भारत आए, नेहरू जी ने शरण दी, लेकिन चीन नाराज हुआ।Nehru’s Policies Corruption & Black Market in India

नेहरू जी को खुफिया रिपोर्ट मिली कि चीन लद्दाख में सड़क बना रहा है (अक्साई चिन रोड)। लेकिन उन्होंने नजरअंदाज किया। सोचते थे कि चीन दोस्त है। लेकिन चीन महत्वाकांक्षी था, क्षेत्र बढ़ाना चाहता था।Nehru’s Policies Corruption & Black Market in India

उदाहरण: जैसे कोई पड़ोसी तुम्हारी जमीन पर दीवार बनाए, और तुम कहो – कोई बात नहीं, भाई है। लेकिन वो पूरी जमीन ले ले। नेहरू जी की “पंचशील” नीति थी – पांच सिद्धांत शांति के। लेकिन चीन ने इसका फायदा उठाया।Nehru’s Policies Corruption & Black Market in India

फॉरवर्ड पॉलिसी: युद्ध को न्योता

1961 में नेहरू जी ने “फॉरवर्ड पॉलिसी” अपनाई – सीमा पर भारतीय पोस्ट बनाओ। लेकिन सेना तैयार नहीं थी। हथियार कम, रोड नहीं, सैनिक ठंड में मर रहे थे। चीन ने 20 अक्टूबर 1962 को हमला किया। भारत की सेना पीछे हटी, हजारों शहीद हुए। नेहरू जी सदमे में थे।Nehru’s Policies Corruption & Black Market in India

आलोचक कहते हैं कि नेहरू जी ने सेना को मजबूत नहीं किया। बजट कम दिया, नेतृत्व कमजोर। जनरल थिमैया ने चेतावनी दी, लेकिन नेहरू जी ने नहीं सुना।Nehru’s Policies Corruption & Black Market in India

युद्ध के बाद: नेहरू जी का अपमान

युद्ध में भारत ने 38,000 वर्ग किमी जमीन गंवाई। नेहरू जी की छवि खराब हुई। संसद में बहस हुई। वे कहते थे – अक्साई चिन बंजर जमीन है। लेकिन ये राष्ट्रीय अपमान था। कुछ लोग कहते हैं कि नेहरू जी की गलती नहीं, सेना की थी। लेकिन ज्यादातर नेहरू जी को जिम्मेदार मानते हैं। उनकी आदर्शवादी सोच यथार्थ से टकराई।Nehru’s Policies Corruption & Black Market in India

आज का असर: चीन अभी भी समस्या

चलिए, “आज का असर: चीन अभी भी समस्या” वाले हिस्से को और सरल और विस्तार से समझते हैं, ताकि कोई भी आसानी से समझ सके। इस हिस्से में बात हो रही है कि नेहरू जी की नीतियों की वजह से भारत-चीन सीमा विवाद आज भी क्यों एक बड़ी समस्या है। हम इसे स्टेप-बाय-स्टेप खोलकर देखेंगे, और कुछ उदाहरणों से समझाएंगे कि 1962 के युद्ध की गलतियां आज कैसे असर डाल रही हैं।Nehru’s Policies Corruption & Black Market in India

आज का असर: LAC पर तनाव क्यों?

LAC क्या है?

LAC यानी “लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल”। ये भारत और चीन की सीमा है, जो ठीक से तय नहीं है। 1962 के युद्ध के बाद ये लाइन बनी, लेकिन दोनों देश इसकी सटीक जगह पर सहमत नहीं हैं। इसका मतलब है कि दोनों तरफ की सेनाएं अपनी-अपनी जगह पर दावा करती हैं, और इसी वजह से झड़पें होती हैं। LAC जम्मू-कश्मीर के लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक फैली है।Nehru’s Policies Corruption & Black Market in India

2020 की गलवान घाटी का हाता पाई |

2020 में गलवान घाटी में भारत और चीन की सेनाओं के बीच हिंसक झड़प हुई। ये जगह लद्दाख में है, जहां LAC पास है। दोनों तरफ के सैनिकों में मारपीट हुई, जिसमें 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए, और चीन के भी कई सैनिक मारे गए (हालांकि चीन ने सही संख्या नहीं बताई)। ये झड़प क्यों हुई? क्योंकि चीन ने LAC के पास सड़कें और बंकर बनाए, और भारत ने इसका विरोध किया।Nehru’s Policies Corruption & Black Market in India

उदाहरण के लिए: सोचो दो पड़ोसियों के बीच बाउंड्री वॉल की जगह तय नहीं है। एक पड़ोसी वहां दीवार बनाता है, और दूसरा कहता है – ये मेरी जमीन है। फिर झगड़ा शुरू हो जाता है। LAC पर भी ऐसा ही है। दोनों देश कहते हैं – ये हमारी जमीन है।Nehru’s Policies Corruption & Black Market in India

नेहरू की नीतियों का असर: 1962 से 2020 तक |

नेहरू जी की गलतियां क्या थीं?

1962 के युद्ध में भारत हारा, क्योंकि नेहरू जी ने कई गलतियां की थीं:

  1. सीमा पर ध्यान न देना: नेहरू जी को 1950s में पता था कि चीन अक्साई चिन में सड़क बना रहा है। लेकिन उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया। उनकी “पंचशील” नीति (शांति के पांच सिद्धांत) पर भरोसा था, लेकिन चीन ने इसका फायदा उठाया।
  2. सेना को कमजोर रखना: भारतीय सेना के पास हथियार, ट्रेनिंग और बुनियादी ढांचा कम था। ठंडे इलाकों में सैनिकों के लिए कपड़े तक नहीं थे। नेहरू जी ने रक्षा बजट कम रखा, और जनरल थिमैया जैसे सैन्य नेताओं की सलाह नहीं मानी।
  3. फॉरवर्ड पॉलिसी का गलत इस्तेमाल: 1961 में नेहरू जी ने सीमा पर चौकियां बनाने की नीति शुरू की, लेकिन बिना तैयारी के। इससे चीन भड़क गया, और युद्ध हुआ।

1962 की हार का आज का असर

1962 में भारत ने अक्साई चिन गंवा दिया, जो 38,000 वर्ग किमी का इलाका है। ये लद्दाख का हिस्सा है, और आज भी चीन के कब्जे में है। LAC की वजह से दोनों देशों में अविश्वास है। नेहरू जी की नीतियों ने सीमा को अस्पष्ट छोड़ा, और आज भी इसका नतीजा भुगत रहे हैं। अगर नेहरू जी ने सीमा पर सड़कें, हथियार और चौकियां बनाई होतीं, तो शायद चीन इतना आक्रामक न होता।Nehru’s Policies Corruption & Black Market in India

गलवान 2020: इतिहास की पुनरावृत्ति?

2020 की गलवान झड़प में चीन ने वही रणनीति अपनाई, जो 1962 में थी – LAC पर दबाव बनाना। चीन ने सड़कें, टेंट और बंकर बनाए, जिससे भारत को जवाब देना पड़ा। भारत ने इस बार मजबूती दिखाई, और सेना ने मोर्चा संभाला। लेकिन ये दिखाता है कि नेहरू जी के समय की कमजोरियां आज भी असर डाल रही हैं।Nehru’s Policies Corruption & Black Market in India

उदाहरण: जैसे कोई स्कूल में तुम्हें धमकाए, और तुम कमजोर पड़ जाओ। फिर वो हर बार धमकाता है। 1962 में भारत कमजोर पड़ा, तो चीन को लगता है कि वो आज भी दबाव बना सकता है।Nehru’s Policies Corruption & Black Market in India

अगर नेहरू जी ने सीमा मजबूत की होती, तो क्या होता?

  1. LAC साफ होती: अगर नेहरू जी ने 1950s में ही सीमा पर सड़कें, चौकियां और खुफिया तंत्र बनाया होता, तो LAC पर इतना विवाद न होता। आज भारत LAC पर सड़कें बना रहा है, जैसे डीबीबीओ रोड, लेकिन ये 60 साल पहले होना चाहिए था।
  2. चीन की हिम्मत न होती: अगर भारत की सेना मजबूत होती, तो चीन 1962 में हमला न करता। आज चीन LAC पर इसलिए दबाव बनाता है, क्योंकि उसे लगता है कि भारत कमजोर है।
  3. अक्साई चिन भारत का होता: अगर नेहरू जी ने शुरू में ही अक्साई चिन पर कब्जा मजबूत किया होता, तो शायद वो आज भारत का हिस्सा होता।

सीख: दोस्ती अच्छी, लेकिन तैयार रहना अनिबर्य हे।

नेहरू जी की सबसे बड़ी गलती थी “हिंदी-चीनी भाई-भाई” का भरोसा। वे सोचते थे कि चीन दोस्त है, लेकिन चीन ने धोखा दिया। आज हम सीखते हैं कि पड़ोसी से दोस्ती अच्छी है, लेकिन अपनी ताकत रखो। भारत अब रक्षा पर खर्च बढ़ा रहा है, राफेल विमान, मिसाइल जैसे अग्नि-5, और LAC पर सड़कें बना रहा है। लेकिन ये सब पहले होना चाहिए था।

उदाहरण: जैसे तुम अपने घर में ताला लगाते हो, भले ही पड़ोसी दोस्त हो। क्योंकि सावधानी जरूरी है। नेहरू जी ने ताला नहीं लगाया, और चोर (चीन) ने फायदा उठाया।Nehru’s Policies Corruption & Black Market in India

आज भारत क्या कर रहा है?

  1. सेना को मजबूत करना: भारत अब रक्षा बजट बढ़ा रहा है। 2025 में रक्षा बजट 4 लाख करोड़ से ज्यादा है। नए हथियार, ड्रोन और तकनीक ला रहे हैं।
  2. LAC पर बुनियादी ढांचा: भारत सड़कें, पुल और हवाई पट्टियां बना रहा है। गलवान के बाद भारत ने 100 से ज्यादा सड़कें LAC पर बनाईं।
  3. कूटनीति: भारत अब क्वाड (भारत, अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया) जैसे गठबंधनों से चीन को जवाब दे रहा है।

नेहरू की आर्थिक नीतियां – समाजवाद का बोझ जो देश को पिछड़ा बनाया |

नेहरू की आर्थिक सोच: समाजवाद क्यों चुना?

नेहरू जी सोवियत संघ से प्रभावित थे। वे चाहते थे कि भारत में अमीर-गरीब का फर्क कम हो। इसलिए मिश्रित अर्थव्यवस्था अपनाई – सरकारी और निजी क्षेत्र। लेकिन सरकारी क्षेत्र पर ज्यादा जोर। 1947 में भारत गरीब था। औपनिवेशिक शोषण से आय कम थी। नेहरू जी ने पांच साल की योजनाएं शुरू कीं। पहली योजना 1951 में। फोकस भारी उद्योग पर – स्टील, बिजली, मशीनें। Nehru’s Policies Corruption & Black Market in India

पहली समस्या: लाइसेंस राज और नियंत्रण |

नेहरू जी की नीति थी कि सब कुछ सरकार नियंत्रित करे। कोई फैक्ट्री लगानी हो, तो लाइसेंस लो। ये “लाइसेंस परमिट राज” बना। भ्रष्टाचार बढ़ा, क्योंकि अफसर रिश्वत लेते थे। निजी कंपनियां दबी रहीं।

उदाहरण: सोचो तुम दुकान खोलना चाहो, लेकिन सरकारी परमिशन के बिना न खोल सको। नेहरू जी सोचते थे कि इससे अमीरों का कंट्रोल कम होगा, लेकिन इससे विकास धीमा हुआ। भारत की GDP ग्रोथ 3-4% रही, जबकि दुनिया में ज्यादा थी।Nehru’s Policies Corruption & Black Market in India

कृषि को नजरअंदाज: दूसरा गलती

भारत कृषि प्रधान देश है, 70% लोग किसान हे । लेकिन नेहरू जी ने उद्योग पर फोकस किया, कृषि को नजरअंदाज किया । नेहरू-महालनोबिस मॉडल में भारी उद्योग पहले। कृषि में सुधार देर से हुए, 1960s में ग्रीन रेवोल्यूशन। लेकिन पहले भुखमरी थी।Nehru’s Policies Corruption & Black Market in India

आलोचक कहते हैं कि शिक्षा भी नजरअंदाज हुई। 1947 में साक्षरता 18% थी, लेकिन नेहरू जी ने प्राइमरी शिक्षा पर कम खर्च किया।

भ्रष्टाचार और काला बाजार: नेहरू युग की आर्थिक नीतियों का काला पक्ष

शुरुआत: लाइसेंस राज क्या था?

जवाहरलाल नेहरू जी भारत के पहले प्रधानमंत्री थे, और उनकी आर्थिक नीति समाजवादी थी। इसका मतलब था कि सरकार का अर्थव्यवस्था पर पूरा नियंत्रण हो। 1947 में भारत आजाद हुआ, तो देश गरीब था। ब्रिटिश शासन ने भारत को लूटा था, और नेहरू जी चाहते थे कि अमीर-गरीब का फर्क कम हो। इसलिए उन्होंने “लाइसेंस राज” शुरू किया।

लाइसेंस राज का मतलब था कि कोई भी नया बिजनेस शुरू करने, फैक्ट्री लगाने, या सामान आयात करने के लिए सरकार से परमिशन (लाइसेंस) लेनी पड़ती थी। ये नीति 1951 की पहली पंचवर्षीय योजना से शुरू हुई, जिसमें भारी उद्योग (जैसे स्टील, बिजली) पर जोर था।नेहरू जी की सोच थी कि सरकार सब कुछ कंट्रोल करेगी, ताकि पैसा कुछ अमीरों के पास न जाए। लेकिन इस नीति ने भ्रष्टाचार और काला बाजार को जन्म दिया।Nehru’s Policies Corruption & Black Market in India

उदाहरण: सोचो, तुम्हें एक छोटी सी दुकान खोलनी है, लेकिन इसके लिए गांव के मुखिया से कागज चाहिए। मुखिया कहता है – पहले 5000 रुपये दो, तब कागज मिलेगा। अगर तुम पैसे नहीं देते, तो दुकान नहीं खोल सकते। लाइसेंस राज में भी ऐसा ही था।Nehru’s Policies Corruption & Black Market in India

भ्रष्टाचार कैसे शुरू हुआ?

लाइसेंस राज में सरकार के पास बहुत ताकत थी। अगर कोई उद्योगपति फैक्ट्री लगाना चाहता था, तो उसे मंत्रालयों में घूमना पड़ता था। अफसरों को लाइसेंस देने का अधिकार था, और कई बार वे रिश्वत मांगते थे।उदाहरण के लिए, अगर कोई सीमेंट फैक्ट्री खोलना चाहता था, तो उसे पहले लाइसेंस के लिए अप्लाई करना पड़ता था। लेकिन लाइसेंस मिलना मुश्किल था, क्योंकि अफसर जानबूझकर देरी करते थे। रिश्वत दो, तो काम जल्दी हो जाता था।

कहानी से समझें: मान लो, रामू एक कारखाना खोलना चाहता है। वो दिल्ली जाता है, मंत्रालय में फाइल जमा करता है। अफसर कहता है, “फाइल में कुछ गड़बड़ है, 6 महीने लगेंगे।” लेकिन पीछे से कहता है, “50,000 दो, कल लाइसेंस मिलेगा।” रामू रिश्वत देता है, क्योंकि बिना लाइसेंस वो कारखाना नहीं खोल सकता। इस तरह भ्रष्टाचार बढ़ा।

नेहरू जी की नीति में ये कमी थी कि उन्होंने अफसरों पर ज्यादा भरोसा किया। लेकिन कई अफसरों ने इस ताकत का गलत इस्तेमाल किया। 1950 के दशक में ही भ्रष्टाचार की जड़ें मजबूत हो गईं। ये भ्रष्टाचार सिर्फ बड़े शहरों तक नहीं, बल्कि छोटे-छोटे कस्बों तक फैल गया, क्योंकि लाइसेंस सिस्टम हर जगह था।

काला बाजार: आयात पर रोक का नतीजा

नेहरू जी की नीति थी कि भारत अपने सामान खुद बनाए, ताकि विदेशों पर निर्भरता कम हो। इसे “आयात प्रतिस्थापन” कहते थे। इसलिए विदेश से सामान मंगाने पर सख्त पाबंदी थी। उदाहरण के लिए, अगर कोई विदेशी कार या मशीन मंगाना चाहता था, तो उसे लाइसेंस चाहिए था। लेकिन लाइसेंस मिलना मुश्किल था।

काला बाजार कैसे बना?
जब लोगो को जरूरी सामान (जैसे दवाइयां, इलेक्ट्रॉनिक्स, या मशीनें) नहीं मिलता था, तो वो गैरकानूनी तरीके से सामान मंगाने लगे। इसे तस्करी कहते हैं। तस्कर विदेश से सामान लाते थे और ऊंचे दाम पर बेचते थे। इसे काला बाजार कहते हैं, क्योंकि ये गैरकानूनी था।

उदाहरण: मान लो, 1950s में तुम्हें एक विदेशी रेडियो चाहिए। लेकिन सरकार ने आयात पर रोक लगाई है। तुम दुकान में जाओ, तो दुकानदार कहता है, “रेडियो 500 रुपये का है, लेकिन गुप्त तरीके से लाया है, 2000 दो।” तुम ज्यादा पैसे देकर खरीदते हो। ये काला बाजार था।

काला बाजार सिर्फ रेडियो या कार तक सीमित नहीं था। दवाइयां, कपड़े, खाने का सामान – सब कुछ काले बाजार में बिकता था। इससे अमीर लोग तो सामान खरीद लेते थे, लेकिन गरीब लोग परेशान रहते थे।

तस्करी का उदाहरण: मुंबई और कोलकाता जैसे बंदरगाहों पर तस्कर सक्रिय थे। वे दुबई, सिंगापुर से सामान लाते थे और काले बाजार में बेचते थे। सरकार को टैक्स का नुकसान होता था, और आम आदमी को महंगा सामान मिलता था।

नेहरू जी की नीतियों की कमियां

      1. ज्यादा नियंत्रण: नेहरू जी की सोच थी कि सरकार सब कुछ कंट्रोल करेगी। लेकिन इससे अफसरों को रिश्वत लेने का मौका मिला। अगर नियंत्रण कम होता, तो शायद भ्रष्टाचार कम होता।
      2. निजी क्षेत्र को दबाना: नेहरू जी ने सरकारी कंपनियों (जैसे SAIL, BHEL) को बढ़ावा दिया, लेकिन निजी कंपनियों (जैसे टाटा, बिरला) को लाइसेंस के चक्कर में परेशान किया। इससे उद्यमिता रुकी।
      3. काला बाजार को नजरअंदाज: नेहरू जी को पता था कि तस्करी हो रही है, लेकिन उनकी नीतियां इसे रोक नहीं पाईं। आयात पर रोक से काला बाजार बढ़ता गया।

    कहानी से समझें: एक गांव में सरपंच कहता है, “सब गेहूं मेरे पास से खरीदो, बाहर से मत लाओ।” लेकिन वो गेहूं कम देता है और महंगा। लोग चुपके से बाहर से गेहूं लाते हैं और ऊंचे दाम पर बेचते हैं। सरपंच को पता है, लेकिन वो कुछ नहीं करता। नेहरू जी की नीति भी ऐसी थी – नियंत्रण ज्यादा, निगरानी कम।

    आज का असर: भ्रष्टाचार की जड़ें

    नेहरू जी के समय शुरू हुआ भ्रष्टाचार आज भी भारत की सबसे बड़ी समस्या है। लाइसेंस राज 1991 में खत्म हुआ, जब भारत ने अर्थव्यवस्था खोली। लेकिन भ्रष्टाचार की आदत बनी रही। आज भी कई सरकारी दफ्तरों में रिश्वत चलती है।

    आज के उदाहरण:

        • राशन कार्ड: पहले राशन की दुकानों पर रिश्वत देकर सामान मिलता था। आज भी कई जगह ऐसा है।
        • पासपोर्ट और लाइसेंस: पासपोर्ट या ड्राइविंग लाइसेंस के लिए लोग दलालों को पैसे देते हैं, क्योंकि सिस्टम धीमा है।
        • ठेके और प्रोजेक्ट: बड़े सरकारी प्रोजेक्ट में आज भी रिश्वत चलती है, जो नेहरू युग की देन है।

      काला बाजार भी आज पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। उदाहरण के लिए, ड्रग्स, नकली सामान, और गैरकानूनी आयात अभी भी होता है। नेहरू जी की नीतियों ने भ्रष्टाचार को सिस्टम का हिस्सा बना दिया, और ये आज तक चला आ रहा है।

      नेहरू जी की अच्छाई भी थी

      कुछ लोग कहते हैं कि नेहरू जी की नीतियां जरूरी थीं, क्योंकि भारत नया देश था। लाइसेंस राज से सरकारी कंपनियां बनीं, जैसे भिलाई स्टील प्लांट। इनसे रोजगार मिला। लेकिन आलोचक कहते हैं कि ये फायदा कम था, नुकसान ज्यादा। अगर नेहरू जी ने बाजार को खुला छोड़ा होता, तो भ्रष्टाचार और काला बाजार कम होता।

      सीख: भ्रष्टाचार से कैसे बचें?

          1. नियंत्रण कम करें: सरकार को बिजनेस में कम दखल देना चाहिए। आज भारत डिजिटल सिस्टम (जैसे UPI, ऑनलाइन लाइसेंस) ला रहा है, जिससे भ्रष्टाचार कम हो रहा है।
          2. पारदर्शिता: सरकारी प्रक्रिया खुली होनी चाहिए। RTI (राइट टू इन्फॉर्मेशन) जैसे कानून ने मदद की।
          3. जागरूकता: आम लोगो को अपने अधिकार जानने चाहिए। अगर रिश्वत मांगी जाए, तो शिकायत करें।

        आज का असर: क्यों भारत पिछड़ा रहा

        नेहरू जी की नीतियों की वजह से भारत 40 साल पिछड़ा रहा। आज हम दुनिया की 5वीं अर्थव्यवस्था हैं, लेकिन नेहरू युग में धीमी गति थी। अगर बाजार आधारित नीतियां होतीं, तो पहले ही अमीर होते। लेकिन हम मानें कि नेहरू जी ने बुनियाद रखी।

        निष्कर्ष: नेहरू से क्या सीखें?

        नेहरू जी महान थे, लेकिन गलतियां हुईं। कश्मीर में देरी, UN जाना; चीन में भ्रम, युद्ध; अर्थव्यवस्था में नियंत्रण – ये सब देश को महंगे पड़े। आज हम इनसे सीखें: आदर्श अच्छे, लेकिन यथार्थ जरूरी। रणनीति हो, सेना मजबूत हो, अर्थव्यवस्था खुली हो।

        (टिप्पणी: यह किताब इकबाल चंद मल्होत्रा और मारूफ रजा की किताब “कश्मीर की अनकही कहानी: डीक्लासिफाइड” से प्रेरित है | यह किताब पढ़कर उम्मीद है आप इतिहास समझेंगे। नेहरू जी की विरासत मिश्रित है – अच्छाई और कमियां। भविष्य के नेता इनसे बचें। )

        Nehru’s Policies: Roots of Corruption & Black Market in India

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        2 thoughts on “Nehru’s Policies: Roots of Corruption & Black Market in India”

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