The Naga Princess and the Warrior King: The Epic Saga of Jagannath’s Rise.5(1)

The Naga Princess and the Warrior King. एपिसोड 4 का संक्षिप्त सारांश (एपिसोड 5 शुरू करने से पहले).

जगन्नाथ का किशोर जीवन अब साधारण नहीं रहा। नागलोक में उसकी शक्तियाँ दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही थीं। माँ नागलता ने उसे न सिर्फ़ युद्ध कौशल और मंत्र विद्या सिखाई, बल्कि इंसानियत और करुणा का महत्व भी समझाया। इसी बीच, नागलोक पर बाहरी संकट मंडराने लगा — कुछ दुष्ट असुर और विद्रोही नाग, जगन्नाथ की बढ़ती शक्ति से भयभीत होकर षड्यंत्र रचने लगे।

दूसरी ओर, राजा विक्रमकेतु भी लगातार रहस्यमयी सपनों से परेशान थे — सपनों में एक किशोर उन्हें पिता कहकर पुकारता, और सांपों से भरा एक लोक उनकी आँखों के सामने आता। सपनों और वास्तविकता की यह कड़ी उन्हें बेचैन करने लगी।

 जगन्नाथ ने एक गुप्त गुफ़ा में छिपे एक प्राचीन शस्त्र को छुआ — और उसी क्षण पूरा नागलोक हिल उठा। उसके शरीर में ऊर्जा का तूफ़ान उमड़ पड़ा, और नाग परिषद ने यह घोषणा की: 4 3 1
“अब समय आ गया है, जगन्नाथ के भाग्य की असली परीक्षा शुरू हो चुकी है।” The Naga Princess and the Warrior King

एपिसोड 5 – भाग 1 : नियति का खेल देखो

नागलोक की गहराइयों में बीते कई सालों के बाद अब जगन्नाथ एक किशोर नहीं, बल्कि एक युवा योद्धा बन चुका था। उसकी आँखों में गहरी चमक था , चेहरे पर आत्मविश्वास, और मन में अनगिनत सवाल। उसकी माँ नागकन्या नागलता हर रोज़ उसे समझातीं—The Naga Princess and the Warrior King

नागलता: “बेटा, शक्ति का सही प्रयोग ही सबसे बड़ा धर्म है। अगर शक्ति को अहंकार में बदल दो, तो वही शक्ति विनाश का कारण बन जाती है।” The Naga Princess and the Warrior King

जगन्नाथ सुनता तो चुपचाप सिर हिला देता, लेकिन भीतर कहीं न कहीं उसका मन बेचैन था। उसे बार-बार वही सपना आता—एक विशाल किला, सुनहरी सिंहासन पर बैठा एक राजा, और उसके हाथों में खून से भीगी तलवार। उस सपने में आवाज़ गूंजती—
“जगन्नाथ, तेरा समय आ गया है…”

नाग ऋषियों की सभा आयोजित हुआ |

एक दिन नागलोक के सबसे प्राचीन मंदिर में, नाग ऋषि परिषद् की सभा बुलाई गई। सभी वृद्ध नागऋषि एक वृत्ताकार सभागृह में बैठे थे। उनका चेहरा चिंता से भरा हुआ था।

ऋषि वरुण: “जगन्नाथ अब सिर्फ नागलोक का पुत्र नहीं रहा। उसके भीतर का तेज, उसकी शक्ति… यह संकेत है कि उसका भाग्य कहीं और से जुड़ा हुआ है।” The Naga Princess and the Warrior King

ऋषि तक्षक: “मगर क्या हम उसे सच बता सकते हैं? यह रहस्य उजागर होते ही नागलोक का संतुलन बिगड़ सकता है।” The Naga Princess and the Warrior King

ऋषि वासुकी: “भाग्य को कौन रोक पाया है? समय आ गया है कि जगन्नाथ अपने वास्तविक पिता और अपनी नियति के बारे में जाने।” The Naga Princess and the Warrior King

उस रात नागलता को बुलाया गया। वे जानती थीं कि यह दिन कभी न कभी आएगा। आँसुओं से भरी आँखों के साथ उन्होंने कहा—

नागलता: “हाँ, मैं मानती हूँ… अब मैं अपने पुत्र को और अंधेरे में नहीं रख सकती। उसे जानना ही होगा कि वह सिर्फ नागलोक का पुत्र नहीं, बल्कि मानव राजवंश का भी उत्तराधिकारी है।”

नाग लता बताई अपनी पुत्र को उसका सच|

दूसरे दिन नागलता ने जगन्नाथ को अपने पास बुलाया। वह उसे नागलोक के गुप्त कक्ष में ले गईं। वहां एक स्वर्ण जटित तलवार, पुरानी ढाल और एक राजा की चित्रित मूर्ति रखी थी।

नागलता: “जगन्नाथ, यह समय है कि तू अपनी पहचान जाने। तेरे पिता कोई साधारण व्यक्ति नहीं थे। वे थे महान राजा विक्रमकेतु, जिन्होंने तुझे जन्म लेने से पहले ही खो दिया।” The Naga Princess and the Warrior King

जगन्नाथ के पैरों तले जमीन खिसक गई। उसकी आँखों में तूफ़ान उमड़ आया।

जगन्नाथ (हैरानी और क्रोध में): “क्या! मैं… मैं एक राजा का पुत्र हूँ? तो फिर माँ, आपने अब तक मुझसे यह सब क्यों छुपाया?” The Naga Princess and the Warrior King

नागलता (कंपती आवाज़ में): “क्योंकि अगर यह रहस्य उजागर होता, तो इंसानों और नागलोक के बीच युद्ध छिड़ जाता। मैं नहीं चाहती थी कि तेरा बचपन खून और द्वेष से भरा हो।” The Naga Princess and the Warrior King

लेकिन जगन्नाथ का दिल अशांत हो गया। उसने तलवार को छुआ तो एक अद्भुत ऊर्जा उसकी नसों में दौड़ गई। मानो यह तलवार उसे पहचान रही हो।

सपनों का सच पता चला |

उस रात जगन्नाथ को फिर वही सपना आया—लेकिन इस बार और भी साफ़। उसने देखा कि एक योद्धा राजा जंगल में शिकार पर निकला है। दो बाघों के बीच वह फँस जाता है और अचानक एक सुंदर नागकन्या उसे बचाती है। उसी क्षण उसने महसूस किया कि वही राजा उसका पिता है। The Naga Princess and the Warrior King

सपने से उठते ही उसने ठान लिया—
“मैं अपने पिता के राज्य को देखे बिना चैन से नहीं बैठूँगा। मुझे जानना होगा कि इंसान कौन हैं, और मेरा असली स्थान कहाँ है।”

नागलोक से बाहर जगन्नाथ रखा पहला कदम |

जगन्नाथ ने अपनी माँ से विदा ली। नागलता का दिल टूट रहा था, मगर उन्होंने अपने पुत्र के भाग्य को रोका नहीं। उन्होंने सिर्फ एक आशीर्वाद दिया—

नागलता: “याद रख बेटा, चाहे तू कहीं भी जाए, नागलोक की शक्ति और तेरी माँ की दुआ हमेशा तेरे साथ होगी।” The Naga Princess and the Warrior King

जगन्नाथ नागलोक की गहराइयों से बाहर निकला। पहली बार उसने धरती की धूप देखी, हवाओं की खुशबू महसूस की, और आकाश की अनंतता को निहारा। The Naga Princess and the Warrior King

लेकिन बाहर की दुनिया उतनी सरल नहीं थी। जंगलों में डाकुओं के गिरोह घूमते थे, गाँवों में लोग भूख और भय से जूझते थे, और राजमहल में सत्ता की साज़िशें पल रही थीं। The Naga Princess and the Warrior King

पहला संघर्ष

जैसे ही जगन्नाथ जंगल के किनारे पहुँचा, उसने देखा कि कुछ डाकू एक कारवां पर हमला कर रहे हैं। व्यापारी चिल्ला रहे थे, औरतें और बच्चे भय से रो रहे थे। The Naga Princess and the Warrior King

जगन्नाथ ने तलवार निकला और

जगन्नाथ (गर्जना में): “दुष्टों! अगर साहस है तो सामने आओ।” The Naga Princess and the Warrior King

डाकुओं ने हँसते हुए कहा—

डाकू सरदार: “कौन है यह? लगता है कोई पागल युवक है।”

लेकिन अगले ही क्षण जगन्नाथ की तलवार बिजली की तरह चली। उसने एक-एक कर डाकुओं को परास्त कर दिया। लोग आश्चर्य से उसे देखने लगे। The Naga Princess and the Warrior King

व्यापारी (कृतज्ञता से): “वीर युवक! तुम्हारा नाम क्या है? तुमने हमें मौत से बचा लिया।”

जगन्नाथ ने हल्की मुस्कान दी और बोला—
“मेरा नाम जगन्नाथ है। शायद यह नियति है कि मैं तुम्हारी रक्षा के लिए यहाँ आया।”

राजमहल की साज़िश

उधर, राजमहल में स्थिति और जटिल हो चुकी थी। राजा विक्रमकेतु बूढ़े हो चुके थे। उनकी संतानों में सत्ता के लिए संघर्ष छिड़ा था। राज्य में विद्रोह की चिंगारियाँ उठ रही थीं। The Naga Princess and the Warrior King

दरबार में मंत्री और सेनापति गुप्त बैठकें कर रहे थे।

मंत्री धर्मपाल: “राजा अब दुर्बल हैं। अगर सही उत्तराधिकारी न चुना गया, तो राज्य टूट जाएगा।”

सेनापति वीरभद्र: “लेकिन राजवंश का असली वारिस तो कहीं खो गया है। सुना है कि जंगलों में कोई रहस्यमयी युवक उभरा है।” The Naga Princess and the Warrior King

यही वह पल था जब नियति ने दोनों दुनियाओं—नागलोक और मानवलोक—को जोड़ना शुरू कर दिया।

भाग्य का संगम (भाग 1 का अंत)

जगन्नाथ को पता नहीं था कि उसके कारनामे अब धीरे-धीरे राज्य तक पहुँचने लगे थे। व्यापारी और गाँववाले उसके साहस की कहानियाँ सुनाने लगे। The Naga Princess and the Warrior King

वहीं राजमहल में राजा विक्रमकेतु अपने सपनों में बार-बार एक युवक का चेहरा देख रहे थे—और अजीब बात यह थी कि उस चेहरे में उन्हें अपना ही अक्स दिखाई देता था। The Naga Princess and the Warrior King

क्या जगन्नाथ अपनी अद्भुत शक्तियों को संभाल पाएगा, या फिर वही शक्ति उसके जीवन और भविष्य को संकट में डाल देगी?

Read Also Other story

The Naga Princess and the Warrior King

Author

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top