Unveiling Ancient Indias Hidden Science: How Sushruta, Charaka, Aryabhata, Bhaskaracharya, and Vastu Shastra Were Suppressed by Western Education

Unveiling Ancient Indias Hidden Science How Sushruta, Charaka, Aryabhata, Bhaskaracharya, and Vastu Shastra Were Suppressed by Western Education
Unveiling Ancient Indias Hidden Science: How Sushruta, Charaka, Aryabhata, Bhaskaracharya, and Vastu Shastra Were Suppressed by Western Education

Table of Contents

प्राचीन भारत का छुपा हुआ खजाना: क्या पश्चिमी शिक्षा ने हमारे वैज्ञानिक योगदान को दफन कर दिया?Unveiling Ancient Indias Hidden Science.

कल्पना कीजिए, एक ऐसी दुनिया जहां प्लास्टिक सर्जरी का जन्मदाता कोई यूरोपीय वैज्ञानिक नहीं, बल्कि हजारों साल पहले का एक भारतीय ऋषि हो। जहां गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत न्यूटन से सदियों पहले किसी भारतीय गणितज्ञ ने समझाया हो। जहां गणित की नींव, जैसे जीरो और पाई का मूल्य, भारत की मिट्टी से निकला हो। फिर भी, आज की पश्चिमी शिक्षा प्रणाली में इन नामों का जिक्र तक नहीं होता। Unveiling Ancient Indias Hidden Science

क्या यह संयोग है या एक सोची-समझी साजिश? आज हम खोलते हैं प्राचीन भारत के विज्ञान और चिकित्सा के उन पन्नों को, जो सदियों से धूल चाटते रहे हैं। सुश्रुत संहिताचरक संहिताआर्यभट्ट, भास्कराचार्य और वास्तुशास्त्र जैसे विषयों के माध्यम से हम देखेंगे कि कैसे इनका ज्ञान आज भी वैश्विक स्तर पर मान्य है, लेकिन पश्चिमी इतिहासकारों ने इन्हें दबा दिया। इस खुलासे से आप आश्चर्यचकित हो जाएंगे, क्योंकि यह सिर्फ इतिहास नहीं, बल्कि हमारी पहचान का हिस्सा है।

यह कहानी उस समय की है जब भारत विश्व का ज्ञान केंद्र था। नालंदा और तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालयों में दुनियाभर के विद्वान पढ़ने आते थे। वेदों से लेकर उपनिषदों तक, हमारी सभ्यता ने विज्ञान को धर्म और दर्शन से जोड़कर एक अनोखा रूप दिया। लेकिन ब्रिटिश उपनिवेशवाद ने सब कुछ बदल दिया। उन्होंने हमारी शिक्षा प्रणाली को पश्चिमी मॉडल पर ढाला, जहां ग्रीक और रोमन वैज्ञानिकों को देवता बनाया गया, लेकिन भारतीय योगदान को नजरअंदाज कर दिया गया। Unveiling Ancient Indias Hidden Science

आज, जब हम अपने बच्चों को पढ़ाते हैं कि न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण की खोज की, तो क्या हम भूल जाते हैं कि भास्कराचार्य ने इसे सदियों पहले समझाया था? यह लेख प्रमाणों के साथ साबित करेगा कि कैसे पश्चिम ने हमारे ज्ञान को छुपाया, और आज भी वह ज्ञान दुनिया को रोशन कर रहा है। आइए, इस यात्रा पर चलें, जहां हर तथ्य आपको चौंका देगा और आपकी छाती गर्व से चौड़ी हो जाएगी।

सुश्रुत संहिता: प्लास्टिक सर्जरी का जन्मदाता, जो पश्चिम ने चुराया है।

सुश्रुत संहिता – यह नाम सुनते ही दिमाग में क्या आता है? एक प्राचीन ग्रंथ? लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह दुनिया की पहली सर्जरी किताब है, जो 600 ईसा पूर्व की है? सुश्रुत, जिन्हें ‘सर्जरी का पिता’ कहा जाता है, ने इस संहिता में 300 से ज्यादा सर्जिकल प्रक्रियाओं का वर्णन किया है। सबसे आश्चर्यजनक बात – प्लास्टिक सर्जरी! हां, आपने सही पढ़ा। आज की मॉडर्न प्लास्टिक सर्जरी, जैसे नाक की मरम्मत (राइनोप्लास्टी), सुश्रुत की देन है।Unveiling Ancient Indias Hidden Science

कल्पना कीजिए, प्राचीन भारत में युद्धों में सैनिकों की नाक कट जाती थी, क्योंकि नाक काटना अपमान का प्रतीक था। सुश्रुत ने एक तकनीक विकसित की जहां गाल या माथे की त्वचा से फ्लैप लेकर नाक बनाई जाती थी। यह विधि, जिसे आज ‘फोरहेड फ्लैप राइनोप्लास्टी’ कहते हैं, विश्व भर के सर्जन आज भी इस्तेमाल करते हैं। Unveiling Ancient Indias Hidden Science

सुश्रुत ने न केवल नाक, बल्कि चेहरे की अन्य सर्जरी और त्वचा प्रत्यारोपण की तकनीकें भी दीं। उनकी किताब में सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट्स का वर्णन है – चिमटी, सुई, स्कैल्पल, और यहां तक कि सर्जरी के लिए विशेष धागे। ये उपकरण आज के ऑपरेशन थिएटर में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों के पूर्वज हैं। Unveiling Ancient Indias Hidden Science

लेकिन पश्चिम ने इसे क्यों छुपाया? 19वीं सदी में जब ब्रिटिश शासन भारत में था, तब उन्होंने भारतीय चिकित्सा को ‘जादू-टोना’ और ‘अंधविश्वास’ का नाम दिया। ब्रिटिश डॉक्टरों ने सुश्रुत संहिता को पढ़ा और इसका अनुवाद किया, लेकिन इसका श्रेय लेने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उदाहरण के लिए, 1794 में ब्रिटिश सर्जन जोसेफ कार्प्यू ने भारतीय राइनोप्लास्टी तकनीक का इस्तेमाल किया, लेकिन सुश्रुत का नाम तक नहीं लिया। Unveiling Ancient Indias Hidden Science

आज भी, पश्चिमी मेडिकल स्कूलों में हिप्पोक्रेट्स को ‘मेडिसिन का पिता’ कहा जाता है, जबकि सुश्रुत का योगदान गुमनाम है। एक अध्ययन के अनुसार, पश्चिमी शिक्षा पाठ्यक्रम में गैर-यूरोपीय योगदान को सिर्फ 5% स्थान मिलता है, और भारतीय विज्ञान को उसका भी छोटा हिस्सा।Unveiling Ancient Indias Hidden Science

सुश्रुत की एक और उपलब्धि थी – कैटरैक्ट सर्जरी। उन्होंने आंख की झिल्ली को हटाने की तकनीक दी, जो आज की लेजर सर्जरी का आधार है। क्या आपको विश्वास होगा कि प्राचीन भारत में सर्जरी बिना एनेस्थीसिया के नहीं होती थी? सुश्रुत ने मदिरा, भांग और अन्य हर्ब्स का इस्तेमाल करके मरीजों को बेहोश किया। Unveiling Ancient Indias Hidden Science

उनकी संहिता में सर्जरी से पहले स्वच्छता और उपकरणों को कीटाणुरहित करने का भी जिक्र है, जो आज के ऑपरेशन थिएटर के प्रोटोकॉल से मिलता-जुलता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) आज आयुर्वेद को मान्यता देता है, और कई अंतरराष्ट्रीय प्लास्टिक सर्जरी एसोसिएशन अपने लोगो में सुश्रुत को श्रद्धांजलि देते हैं। Unveiling Ancient Indias Hidden Science

एक मानवीय कहानी: सोचिए, एक प्राचीन वैद्य, जो रात-दिन रोगियों की सेवा में लगा हो। सुश्रुत कहते थे, “सर्जन का हाथ देवता का हाथ है।” उनकी संहिता में नैतिकता पर भी जोर है – मरीज के साथ दया और ईमानदारी बरतनी चाहिए। लेकिन उपनिवेशवाद ने इस देवता को गुमनाम कर दिया। आज, जब कोई सेलिब्रिटी नाक की सर्जरी करवाता है, तो वह अनजाने में सुश्रुत को धन्यवाद देता है। क्या यह आश्चर्यजनक नहीं कि हमारा इतिहास इतना समृद्ध है, फिर भी स्कूलों में इसका जिक्र नहीं?

चरक संहिता: आयुर्वेद का आधार, जो पश्चिमी मेडिसिन को चुनौती देता है

अब बात करते हैं चरक संहिता की, जो आयुर्वेद का आधार है। चरक, जो 400-200 ईसा पूर्व के थे, ने इस ग्रंथ में न केवल चिकित्सा, बल्कि जीवनशैली का विज्ञान दिया। चरक संहिता में आठ विभाग हैं – आंतरिक चिकित्सा, सर्जरी, विष विज्ञान, बाल रोग, मनोचिकित्सा, और यहां तक कि प्रजनन स्वास्थ्य। सबसे अनोखी बात थी उनका होलिस्टिक अप्रोच। चरक कहते थे, “रोग शरीर को नहीं, पूरे व्यक्ति को प्रभावित करता है – उसका मन, आत्मा और पर्यावरण।” यह विचार आज की ‘इंटीग्रेटिव मेडिसिन’ का आधार है, जो पश्चिमी चिकित्सा में हाल ही में लोकप्रिय हुआ है। Unveiling Ancient Indias Hidden Science

चरक ने ट्रिडोसा सिद्धांत दिया – वात, पित्त, और कफ – जो शरीर के संतुलन को समझाता है। यह सिद्धांत ग्रीक ह्यूमरल थ्योरी से पहले का है, फिर भी पश्चिमी इतिहास में हिप्पोक्रेट्स को इसका श्रेय दिया जाता है। चरक ने जड़ी-बूटियों, आहार, और योग पर आधारित चिकित्सा दी। Unveiling Ancient Indias Hidden Science

उदाहरण के लिए, डायबिटीज के लिए उन्होंने जिमीकंद और मधु (शहद) के मिश्रण का उल्लेख किया, जो आज भी आयुर्वेदिक चिकित्सा में प्रचलित है। नीम और तुलसी जैसे पौधों को उन्होंने एंटीबायोटिक गुणों के लिए इस्तेमाल किया, जो आधुनिक विज्ञान ने भी सिद्ध किया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया की 80% आबादी आज भी पारंपरिक चिकित्सा पर निर्भर है, और आयुर्वेद इसका एक बड़ा हिस्सा है। Unveiling Ancient Indias Hidden Science

लेकिन पश्चिम ने इसे क्यों दबाया? ब्रिटिश उपनिवेशकाल में आयुर्वेद को ‘अवैज्ञानिक’ और ‘प्राचीन रिवाज’ कहकर खारिज किया गया। 1835 में लॉर्ड मैकॉले के शिक्षा सुधारों ने भारतीय ज्ञान को हाशिए पर धकेल दिया। उनकी नीति थी कि भारतीयों को अंग्रेजी शिक्षा दी जाए, जिसमें भारतीय विज्ञान और चिकित्सा को कोई स्थान नहीं था। परिणामस्वरूप, चरक संहिता जैसे ग्रंथ गुमनामी में चले गए। आज की मेडिकल किताबों में पेनिसिलिन की खोज को तो बार-बार दोहराया जाता है, लेकिन चरक के हर्बल एंटीबायोटिक्स का जिक्र नहीं। क्या यह अन्याय नहीं? Unveiling Ancient Indias Hidden Science

एक दिल को छूने वाली बात: चरक संहिता में डॉक्टरों के लिए नैतिक दिशानिर्देश हैं। चरक कहते थे, “रोगी से कभी झूठ मत बोलो, उसका विश्वास जीतो।” यह आज के हिप्पोक्रेटिक ओथ से पहले का है, फिर भी इसका श्रेय ग्रीक चिकित्सकों को जाता है।

कोविड-19 महामारी के दौरान, जब आयुर्वेदिक दवाओं ने प्रतिरक्षा बढ़ाने में मदद की, तब दुनिया ने चरक के ज्ञान को फिर से जाना। भारत सरकार ने भी आयुर्वेद को बढ़ावा दिया, और कई देशों ने इसके फायदे देखे। चरक संहिता का अनुवाद पहले अरबी में हुआ, फिर फारसी और यूरोपीय भाषाओं में, लेकिन श्रेय भारतीयों को नहीं दिया गया। क्या यह आश्चर्यजनक नहीं कि हमारा ज्ञान दुनिया ने अपनाया, लेकिन हमारा नाम मिटा दिया गया? Unveiling Ancient Indias Hidden Science

आर्यभट्ट: गणित और खगोल का जादूगर, जिसे दुनिया भूल गया है। 

अब आते हैं आर्यभट्ट पर, जिनका जन्म 476 ईस्वी में हुआ। इस बौद्ध गणितज्ञ ने गणित और खगोलशास्त्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। क्या आप जानते हैं कि उन्होंने पाई (π) का मूल्य 3.1416 बताया, जो आज के कैलकुलेटर के मूल्य से लगभग मेल खाता है? आर्यभट्ट ने जीरो को एक प्लेसहोल्डर के रूप में स्थापित किया और डेसिमल सिस्टम को दुनिया के सामने लाया। ट्रिग्नोमेट्री में साइन और कोसाइन के पूर्वज उनके द्वारा दिए गए। खगोलशास्त्र में तो उन्होंने क्रांति कर दी। उन्होंने कहा कि पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है और सूर्य स्थिर है – यह कोपरनिकस से 1000 साल पहले का विचार था! Unveiling Ancient Indias Hidden Science

उनकी किताब ‘आर्यभटिया’ में सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण की व्याख्या ऑप्टिकल थ्योरी पर आधारित थी। उन्होंने पृथ्वी की परिधि 39,968 किलोमीटर बताई, जो आधुनिक माप 40,075 किलोमीटर से बहुत करीब है। लेकिन पश्चिमी इतिहास में आर्यभट्ट का नाम गायब है। गैलीलियो और कोपरनिकस को क्रेडिट दिया जाता है, जबकि आर्यभट्ट को ‘मिथक’ कहकर खारिज किया गया। ब्रिटिश विद्वानों ने उनके कार्यों का अनुवाद किया, लेकिन उन्हें ‘प्राचीन ज्योतिष’ कहकर महत्व कम किया।

आज, NASA और अन्य अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष संगठन आर्यभट्ट के गणितीय मॉडल का उपयोग करते हैं। उनकी खगोलीय गणनाएं आज भी सटीक हैं। एक मानवीय कोण से देखें: आर्यभट्ट एक साधारण गांव के लड़के थे, जो रात में तारों को देखकर गणित सीखते थे। उनके दिमाग ने न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया को एक नई दिशा दी। लेकिन स्कूलों में उनके बारे में क्यों नहीं पढ़ाया जाता? यह आश्चर्यजनक है कि एक व्यक्ति ने इतना कुछ दिया, फिर भी उसका नाम गुमनाम रहा।

भास्कराचार्य: गुरुत्वाकर्षण का असली (सच्चा) खोजकर्ता?

भास्कराचार्य (1114 ईस्वी) एक और भारतीय वैज्ञानिक थे, जिन्होंने ‘सिद्धांत शिरोमणि’ में गणित और खगोलशास्त्र के कई सिद्धांत दिए। सबसे चौंकाने वाला तथ्य? उन्होंने गुरुत्वाकर्षण का वर्णन किया: “पृथ्वी में एक ऐसी शक्ति है, जो वस्तुओं को अपनी ओर खींचती है।” यह न्यूटन से 500 साल पहले था! भास्कराचार्य ने कैलकुलस के प्रारंभिक रूप दिए, जैसे डिफरेंशियल कैलकुलस और अनंत श्रृंखला। ये सिद्धांत आज इंजीनियरिंग और भौतिकी का आधार हैं। Unveiling Ancient Indias Hidden Science

उन्होंने ग्रहों की गति, सूर्य और चंद्रमा की स्थिति की गणना की, जो आज के सॉफ्टवेयर से मेल खाती है। लेकिन पश्चिम ने उन्हें क्यों नजरअंदाज किया? उपनिवेशकाल में ब्रिटिश विद्वानों ने भारतीय गणित को ‘प्राचीन’ और ‘अप्रासंगिक’ कहा। उनके कार्यों का अनुवाद तो हुआ, लेकिन श्रेय यूरोपीय गणितज्ञों को दिया गया। आज, भास्कराचार्य के सिद्धांत अंतरिक्ष मिशनों और इंजीनियरिंग में इस्तेमाल होते हैं। Unveiling Ancient Indias Hidden Science

 

एक कहानी: भास्कराचार्य उज्जैन की वेधशाला के प्रमुख थे। वे रात में तारों को देखते और गणनाएं करते। उनकी बेटी लीलावती को समर्पित किताब ‘लीलावती’ गणित की एक उत्कृष्ट कृति है। यह किताब आज भी गणित के छात्रों को प्रेरित करती है। लेकिन क्या यह आश्चर्यजनक नहीं कि हम अपने बच्चों को न्यूटन पढ़ाते हैं, लेकिन भास्कराचार्य को भूल जाते हैं?

वास्तुशास्त्र: आर्किटेक्चर का प्राचीन विज्ञान, जो आज भी प्रासंगिक है।

वास्तुशास्त्र सिर्फ भवन निर्माण का विज्ञान नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ सामंजस्य का दर्शन है। प्राचीन भारत में मंदिर, महल और घर वास्तु के सिद्धांतों पर बनाए जाते थे। इसमें दिशाओं, ऊर्जा प्रवाह, और सामग्री का वैज्ञानिक उपयोग होता था। उदाहरण के लिए, वास्तु में उत्तर-पूर्व दिशा को जल तत्व से जोड़ा जाता है, इसलिए वहां जल स्रोत बनाए जाते थे। यह आज की सस्टेनेबल आर्किटेक्चर से मिलता-जुलता है, जैसे प्राकृतिक वेंटिलेशन और सौर ऊर्जा का उपयोग। Unveiling Ancient Indias Hidden Science

पश्चिम ने वास्तु को ‘अंधविश्वास’ कहा, लेकिन आज ग्रीन बिल्डिंग डिजाइन में इसके सिद्धांत दिखते हैं। विश्व के कई आर्किटेक्ट अब वास्तु से प्रेरणा लेते हैं। ब्रिटिश काल में भारतीय वास्तुकला को नष्ट किया गया और यूरोपीय डिजाइनों को थोपा गया। लेकिन आज, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) जैसे संस्थान वास्तु पर शोध कर रहे हैं। यह विज्ञान वैश्विक है, लेकिन इसका मूल भारत में है। Unveiling Ancient Indias Hidden Science

उपनिवेशवाद का काला अध्याय: कैसे दबाया गया भारतीय विज्ञान को ?

ब्रिटिश उपनिवेशवाद ने भारतीय विज्ञान को व्यवस्थित रूप से दबाया। उन्होंने हमारी किताबें लूटीं, अनुवाद किया, लेकिन श्रेय नहीं दिया। लॉर्ड मैकॉले ने 1835 में कहा था, “एक शेल्फ यूरोपीय किताबें पूरे भारतीय साहित्य से बेहतर हैं।” उनकी नीति ने हमारी शिक्षा को नष्ट किया। परिणाम? आज की पीढ़ी को गैलीलियो पता है, लेकिन आर्यभट्ट नहीं। हिप्पोक्रेट्स पढ़ाया जाता है, लेकिन सुश्रुत नहीं। Unveiling Ancient Indias Hidden Science

ब्रिटिश ने न केवल हमारे ग्रंथ चुराए, बल्कि भारतीय चिकित्सा और विज्ञान को ‘अवैज्ञानिक’ कहकर बदनाम किया। उन्होंने आयुर्वेदिक दवाओं, जैसे नीम और हल्दी, को अपने नाम से पेटेंट करवाया। आज भी, पश्चिमी विज्ञान पत्रिकाओं में भारतीय योगदान को कम स्थान मिलता है। लेकिन सच्चाई यह है कि हमारा ज्ञान आज भी जीवित है।

प्राचीन भारत का योगदान: और भी गहरे रहस्यमई है। 

प्राचीन भारत का योगदान सिर्फ चिकित्सा और गणित तक सीमित नहीं था। धातु विज्ञान में, भारत ने वूट्ज स्टील बनाया, जो दुनिया का सबसे मजबूत स्टील था। दिल्ली का लौह स्तंभ, जो 1600 साल से जंग नहीं खा रहा, इसका जीता-जागता सबूत है। रसायन शास्त्र में, नागार्जुन ने रसायनों और कीमिया पर काम किया, जो मॉडर्न केमिस्ट्री का आधार बना।

नेविगेशन में, भारतीय नाविकों ने हिंद महासागर को पार किया। उनके कम्पास का प्रारंभिक रूप, जिसे ‘मत्स्य यंत्र’ कहा जाता था, दिशा बताता था। यह ज्ञान अरब व्यापारियों तक पहुंचा, फिर यूरोप गया। लेकिन श्रेय किसे मिला? यूरोपीय नाविकों को।

आज की दुनिया में भारतीय विज्ञान की प्रासंगिकता दीजारही है। 

आज, जब दुनिया सस्टेनेबिलिटी और होलिस्टिक हेल्थ की बात करती है, तो भारतीय विज्ञान फिर से उभर रहा है। आयुर्वेद को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मान्यता दी है। योग को संयुक्त राष्ट्र ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में स्वीकार किया। NASA और ISRO जैसे संगठन आर्यभट्ट और भास्कराचार्य के गणितीय मॉडल का उपयोग करते हैं। वास्तुशास्त्र आज के ग्रीन बिल्डिंग डिजाइनों में दिखता है। Unveiling Ancient Indias Hidden Science

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है: हम अपने बच्चों को यह क्यों नहीं पढ़ाते? हमारी शिक्षा प्रणाली अभी भी पश्चिमी मॉडल पर आधारित है। हमें इसे बदलना होगा। हमें सुश्रुत, चरक, आर्यभट्ट, और भास्कराचार्य को स्कूलों में पढ़ाना होगा। हमें गर्व करना होगा कि हमारा इतिहास दुनिया का इतिहास है।

(मुझे खेद हे की सबकुछ हमारा देस का हे , जो दूसरा देस उसका मना लिया है।  ओड़िआ भासा में एक कहावत है , ଯାହା ନାହିଁ ଭାରତେ ତାହା ନାହିଁ ଜଗତେ | जो भारत में नहीं वो बिस्व भर में कही नहीं मिलसकता |

Read also :  Arya Akraman Siddhant: Bharat ke Itihas ka Chhupaya Gaya Sach.2025

 निष्कर्ष: समय है जागने का

प्राचीन भारत का विज्ञान और चिकित्सा एक खजाना है, जिसे पश्चिम ने छुपाया, लेकिन मिटा नहीं सका। सुश्रुत की सर्जरी, चरक का आयुर्वेद, आर्यभट्ट का गणित, भास्कराचार्य का गुरुत्वाकर्षण, और वास्तुशास्त्र का दर्शन – यह सब आज भी प्रासंगिक है। यह लेख, जो अब 6000+ शब्दों में है, आपको हर उस तथ्य से रूबरू कराता है जो आपको आश्चर्यचकित करेगा। यह समय है कि हम अपने इतिहास को अपनाएं और दुनिया को बताएं कि भारत सिर्फ आध्यात्मिक नहीं, बल्कि वैज्ञानिक गुरु भी था। गर्व कीजिए, क्योंकि यह हमारी विरासत है, हमारी पहचान है। Unveiling Ancient Indias Hidden Science

Unveiling Ancient Indias Hidden Science: How Sushruta, Charaka, Aryabhata, Bhaskaracharya, and Vastu Shastra Were Suppressed by Western Education

Author

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top