बालाकोट एयर स्ट्राइक 2019 | Balakot air strike 2019.

बालाकोट एयर स्ट्राइक 2019

बालाकोट एयर स्ट्राइक 2019: एक ऐतिहासिक घटना का विस्तृत विश्लेषण|

परिचय

नमस्कार पाठकों, आज हम बात करेंगे 2019 के बालाकोट हवाई हमले की, जो भारत-पाकिस्तान संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। यह घटना न केवल सैन्य रणनीति का एक उदाहरण थी, बल्कि राजनीतिक, कूटनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी गहरे प्रभाव डालने वाली थी। 

फरवरी 2019 में, पुलवामा हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के एक प्रशिक्षण शिविर पर हवाई हमला किया। यह हमला भारत की आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का प्रतीक बना। लेकिन क्या यह वास्तव में सफल रहा? क्या इससे क्षेत्रीय शांति प्रभावित हुई? इस लेख में हम इस घटना को मानवीय दृष्टिकोण से देखेंगे, तथ्यों पर आधारित विश्लेषण करेंगे और इसके दूरगामी प्रभावों पर चर्चा करेंगे। हमारा उद्देश्य है कि यह सामग्री न केवल जानकारीपूर्ण हो, बल्कि पाठकों को सोचने पर मजबूर करे कि युद्ध और शांति के बीच की रेखा कितनी पतली होती है।

पृष्ठभूमि: कश्मीर संघर्ष और पुलवामा हमला

कश्मीर का मुद्दा भारत और पाकिस्तान के बीच 1947 से ही विवाद का केंद्र रहा है। 1989 से शुरू हुए विद्रोह ने हजारों जानें ली हैं। 2016 में हिज्बुल मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी की मौत के बाद हिंसा में वृद्धि हुई, जिसमें 2018 में 500 से अधिक लोग मारे गए, जिसमें नागरिक, सैनिक और उग्रवादी शामिल थे। इस पृष्ठभूमि में, 14 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में एक आत्मघाती हमला हुआ, जिसमें सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए। हमलावर आदिल अहमद डार, एक स्थानीय युवक था, लेकिन हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान आधारित इस्लामी उग्रवादी समूह जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) ने ली।

पुलवामा हमला कश्मीर में तीन दशकों का सबसे घातक हमला था। भारत ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि वह जेईएम जैसे समूहों को शरण देता है। पाकिस्तान ने हमले की निंदा की लेकिन अपनी संलिप्तता से इनकार किया। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि शहीदों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा, और भारत जवाब देगा। यह घटना 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले हुई, जिससे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने सुझाव दिया कि भारत की कार्रवाई चुनावी लाभ के लिए है, जिसे भारत ने खारिज कर दिया।

मानवीय दृष्टिकोण से देखें तो पुलवामा हमला सिर्फ एक सैन्य घटना नहीं था। उन 40 जवानों के परिवारों की पीड़ा, उनके सपनों का अंत – यह सब हमें याद दिलाता है कि आतंकवाद कितना अमानवीय है। एक जवान की विधवा की कहानी, जो अपने बच्चों को अकेले पाल रही है, या एक पिता जो अपने बेटे की शहादत पर गर्व करता है लेकिन रातों को रोता है – ऐसी कहानियां हमें घटना की गहराई समझाती हैं। भारत ने बार-बार पाकिस्तान से जेईएम के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। जेईएम, जिसका नेतृत्व मसूद अजहर करता है, 2001 के भारतीय संसद हमले और 2016 के पठानकोट हमले के लिए भी जिम्मेदार था।

पाकिस्तान ने दावा किया कि जेईएम को 2002 में प्रतिबंधित कर दिया गया था, लेकिन वास्तविकता में यह समूह पाकिस्तान में खुलेआम काम करता रहा। भारतीय खुफिया एजेंसियों ने चेतावनी दी थी कि जेईएम नए हमलों की योजना बना रहा है। इस संदर्भ में, भारत के लिए पूर्व-निवारक कार्रवाई आवश्यक हो गई। यह पृष्ठभूमि हमें बताती है कि बालाकोट हमला अचानक नहीं था, बल्कि वर्षों की निराशा का परिणाम था।

बालाकोट हवाई हमला: ऑपरेशन बंदर का विवरण

26 फरवरी 2019 की सुबह, भारतीय वायुसेना ने “ऑपरेशन बंदर” शुरू किया। यह नाम रामायण के हनुमान से प्रेरित था, जो दुश्मन के क्षेत्र में घुसकर हमला करते हैं। भारतीय विमान नियंत्रण रेखा (एल.ओ.सी) पार कर पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में बालाकोट के पास एक कथित जेईएम प्रशिक्षण शिविर पर हमला किया। पाकिस्तान ने पहले हमले की घोषणा की, कहा कि भारतीय विमान बम गिराकर लौट गए, जो एक निर्जन पहाड़ी क्षेत्र में गिरे। भारत ने बाद में पुष्टि की कि यह एक पूर्व-निवारक, गैर-सैन्य कार्रवाई थी, जिसमें जेईएम के “बड़े संख्या” में आतंकवादियों की मौत हुई।

भारतीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 12 मिराज 2000 जेट्स शामिल थे, जिन्हें सुखोई एसयू-30एमकेआई, नेट्रा, फाल्कन, आईएआई हेरोन यूएवी और इल्यूशिन आईएल-78 द्वारा समर्थित किया गया। भ्रमित करने वाली कार्रवाई से पाकिस्तानी लड़ाकू विमान दूर चले गए। भारत ने स्पाइस 2000 बमों का उपयोग किया, जो सटीक हमले के लिए जाने जाते हैं। 

लक्ष्य एक मदरसा था, तालीम उल-कुरान, जो मसूद अजहर के साले द्वारा चलाया जाता था, और कथित रूप से जेईएम का सक्रिय शिविर था। 2004 के अमेरिकी रक्षा विभाग की रिपोर्ट में बालाकोट में प्रशिक्षण शिविर का उल्लेख था, लेकिन 2005 के भूकंप के बाद शिविर बिखर गए थे। भारतीय खुफिया ने दावा किया कि 500-700 उग्रवादियों का एक पहाड़ी जंगली सुविधा थी, जबकि पश्चिमी अधिकारी बड़े शिविरों की संभावना पर संदेह करते थे।

विदेश सचिव विजय गोखले के बयान में कहा गया: “विश्वसनीय खुफिया जानकारी मिली कि जेईएम देश के विभिन्न हिस्सों में एक और आत्मघाती हमले की कोशिश कर रहा है… एक पूर्व-निवारक हमला बिल्कुल आवश्यक हो गया।” उन्होंने दावा किया कि बालाकोट में जेईएम का सबसे बड़ा शिविर नष्ट हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में आतंकवादी, प्रशिक्षक और कमांडर मारे गए। यह सुविधा मौलाना यूसुफ अजहर द्वारा संचालित थी। भारत ने जोर दिया कि यह नागरिक हताहतों से बचने के लिए चुना गया लक्ष्य था, जो घने जंगल में पहाड़ी पर था।

मानवीय रूप से, कल्पना कीजिए उन पायलटों की, जो रात के अंधेरे में दुश्मन क्षेत्र में घुसते हैं। उनकी बहादुरी, उनके परिवारों की चिंता – यह सब हमें याद दिलाता है कि युद्ध में इंसान ही सबसे महत्वपूर्ण होता है। लेकिन क्या हमला सफल रहा? भारत ने 200-350 आतंकवादियों की मौत का दावा किया, लेकिन सैटेलाइट इमेजरी से कोई बड़ा नुकसान नहीं दिखा।

पाकिस्तान की प्रतिक्रिया और हवाई संघर्ष

पाकिस्तान ने हमले में किसी नुकसान से इनकार किया और कहा कि बम खाली क्षेत्र में गिरे। अगले दिन, 27 फरवरी को, पाकिस्तान ने जवाबी हमले किए, भारतीय कश्मीर में लक्ष्यों पर हमला किया और एक भारतीय विमान को मार गिराया, पायलट अभिनंदन वर्थमान को कैद कर लिया। भारत ने दावा किया कि उसने एक पाकिस्तानी एफ-16 को मार गिराया, लेकिन अमेरिकी गणना और विश्लेषण से यह खारिज हो गया। उसी दिन, भारत ने अपना एक एमआई-17 हेलीकॉप्टर दोस्ताना आग से मार गिराया, जिसमें छह वायुसेना कर्मी और एक नागरिक मारे गए, जिसकी पुष्टि सात महीने बाद हुई।

अभिनंदन की रिहाई 1 मार्च को हुई, जिसे पाकिस्तान ने शांति की पहल कहा। इमरान खान ने कहा कि पाकिस्तान जवाब देगा “समय और स्थान पर अपनी पसंद से”। यह घटना दोनों देशों के बीच हवाई युद्ध का प्रतीक बनी। पाकिस्तान ने दावा किया कि उसकी “ऑपरेशन स्विफ्ट रिसोर्ट” सफल रही, जो पारंपरिक स्तर पर जवाब देने की क्षमता दिखाती है।

मानवीय कोण से, अभिनंदन की कैद और रिहाई की कहानी प्रेरणादायक है। उनकी बहादुरी, पाकिस्तानी कैद में उनका व्यवहार – यह दिखाता है कि युद्ध में भी इंसानियत बाकी रहती है। लेकिन इस संघर्ष ने दोनों पक्षों को नुकसान पहुंचाया, और क्षेत्रीय तनाव बढ़ाया।

बाद के घटनाक्रम: डी-एस्केलेशन और परिणाम

संघर्ष के बाद, दोनों देशों ने डी-एस्केलेशन की कोशिश की। अमेरिका, ब्रिटेन, रूस और अन्य देशों ने मध्यस्थता की। अमेरिका ने इसे काउंटर-टेररिज्म कार्रवाई कहा और संयम की अपील की। पाकिस्तान ने जेईएम के खिलाफ कार्रवाई की, लेकिन यह अस्थायी साबित हुई। भारत में, हमला मोदी की चुनावी जीत में मददगार साबित हुआ।

सैटेलाइट विश्लेषण से कोई बड़ा नुकसान नहीं दिखा, लेकिन भारत ने दावा किया कि 300 मोबाइल फोन सक्रिय थे, जो हमले से पहले थे। विवादों में, एक पूर्व पाकिस्तानी राजनयिक का 300 मौतों का दावा बाद में डॉक्टर्ड वीडियो पर आधारित साबित हुआ।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएँ: विश्व का दृष्टिकोण

ऑस्ट्रेलिया ने पुलवामा की निंदा की और पाकिस्तान से आतंकवादियों पर कार्रवाई की मांग की। चीन ने संयम की अपील की। फ्रांस ने भारत के आतंकवाद विरोधी कदमों का समर्थन किया। अमेरिका ने पाकिस्तान से मसूद अजहर को आतंकवादी घोषित करने की मांग की। ओआईसी ने हमले की निंदा की। यह दिखाता है कि विश्व समुदाय आतंकवाद के खिलाफ एकजुट है, लेकिन भारत-पाकिस्तान विवाद में संतुलन बनाए रखता है। मानवीय रूप से, अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता ने कई जिंदगियां बचाईं, जो अन्यथा युद्ध में खो सकती थीं।

विवाद और विश्लेषण: दोनों पक्षों के दावे

विवाद मुख्य रूप से हमले की प्रभावशीलता पर था। भारत ने बड़ी मौतों का दावा किया, पाकिस्तान ने इनकार। सैटेलाइट इमेज से कोई इमारत क्षतिग्रस्त नहीं दिखी। स्टिमसन सेंटर के अनुसार, दोनों ने जीत का दावा किया: भारत ने सीमित बल का स्थान दिखाया, पाकिस्तान ने परमाणु निरोधक। कार्नेगी रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तान का आतंकवाद समर्थन जारी है, और संकट प्रबंधनीय था लेकिन भविष्य अनिश्चित।

वॉर ऑन द रॉक्स ने कहा कि बालाकोट ने भारत की एस्केलेशन रणनीति बदल दी, लेकिन पाकिस्तान के व्यवहार में कोई बदलाव नहीं। आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन ने परमाणु जोखिम को कम बताया लेकिन मध्यस्थता की जरूरत पर जोर दिया।

सबक और प्रभाव: भविष्य के लिए सीख

बालाकोट से सीख मिली कि सीमित सैन्य कार्रवाई संभव है, लेकिन परमाणु छत्रछाया में जोखिम है। भारत की पारंपरिक श्रेष्ठता और पाकिस्तान का परमाणु निरोधक संतुलन बनाते हैं। सबक है कि आतंकवाद का मूल कारण संबोधित करें, न कि सिर्फ प्रतिक्रिया। प्रभाव में, भारत की नीति सख्त हुई, और क्षेत्रीय शांति के लिए बातचीत की जरूरत बढ़ी।

मानवीय रूप से, यह हमें शांति की कीमत सिखाता है। हजारों सैनिकों की जिंदगियां दांव पर होती हैं, और नागरिक पीड़ित होते हैं।

निष्कर्ष

बालाकोट हमला 2019 भारत की आतंकवाद विरोधी प्रतिबद्धता का प्रतीक था, लेकिन इसके परिणाम मिश्रित रहे। यह घटना हमें याद दिलाती है कि शांति ही एकमात्र रास्ता है। आशा है कि भविष्य में दोनों देश बातचीत से मुद्दे सुलझाएं।

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