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Toggleमानसिक स्वास्थ्य: आयुर्वेद की दृष्टि से सम्पूर्ण समाधान |मानसिक स्वास्थ्य |Mental Health
भूमिका
आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में मानसिक तनाव, चिंता, अवसाद और अनिद्रा जैसी समस्याएँ आम होती जा रही हैं। लेकिन भारत का प्राचीन चिकित्सा विज्ञान “आयुर्वेद” मानसिक स्वास्थ्य को केवल रोग नहीं, बल्कि मन–शरीर–आत्मा के संतुलन के रूप में देखता है।
आइए जानते हैं कि चरक संहिता, सुश्रुत संहिता और आधुनिक आयुर्वेदिक पद्धतियाँ मानसिक(mental) स्वास्थ्य को कैसे समझाती हैं और किन उपायों से हम अपने मन को शांत, स्थिर और प्रसन्न बना सकते हैं।
आयुर्वेद में ‘मन’ की परिभाषा
आयुर्वेद में मन को इंद्रियों और आत्मा के बीच सेतु (bridge) माना गया है। “मन” शरीर और आत्मा का समन्वय करता है, और उसके संतुलन पर ही हमारा मानसिक स्वास्थ्य निर्भर करता है।
मन के तीन गुण:
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- सत्त्व (शुद्धता, विवेक, स्थिरता)
- रजस् (चंचलता, अधीरता, गुस्सा)
- तमस् (जड़ता, आलस्य, अवसाद)
जब सत्त्व की प्रधानता होती है, तो व्यक्ति मानसिक रूप से स्वस्थ, शांत और प्रसन्न रहता है।
दोषों और मानसिक स्वास्थ्य का संबंध
| दोष | असंतुलन के मानसिक लक्षण | समाधान |
|---|---|---|
| वात (Vata) | चिंता, भय, अनिद्रा, बेचैनी | तेल मालिश, गरम भोजन, ब्राह्मी, शंखपुष्पी |
| पित्त (Pitta) | गुस्सा, चिड़चिड़ापन, अधीरता | ठंडा भोजन, ध्यान, शतावरी |
| कफ (Kapha) | उदासी, आलस्य, अवसाद | व्यायाम, मसालेदार आहार, अश्वगंधा |
चरक संहिता के अनुसार:
“सत्त्वस्थो हि मनः सुखं दुःखं च अनुभवति”
(मन का सत्त्वगुण ही हमें सुख या दुःख का अनुभव कराता है।)
आयुर्वेदिक उपाय मानसिक शांति के लिए |
1. रसायन और जड़ी-बूटियाँ (Herbs)
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- ब्राह्मी: याददाश्त, एकाग्रता बढ़ाए
- अश्वगंधा: तनाव और चिंता को घटाए
- शंखपुष्पी: बच्चों और बुजुर्गों के लिए उपयोगी
- शतावरी, गोटकुला: मानसिक संतुलन के लिए
इन जड़ी-बूटियों का उपयोग दूध, घी या शहद के साथ किया जाता है।
2. योग, प्राणायाम और ध्यान
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- नाड़ी शोधन प्राणायाम: मन को संतुलन देता है
- शीतली/शीतकारी प्राणायाम: क्रोध और गर्मी से राहत
- ध्यान (Meditation): मानसिक स्पष्टता व शांति
सुश्रुत संहिता कहती है — “योगेन चित्तस्य वृत्तिनिरोधः” — अर्थात योग से चित्त की वृत्तियों को नियंत्रित किया जा सकता है।
3. पंचकर्म और थेरेपी
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- अभ्यंग (तेल मालिश): वात दोष को शांत करता है
- शिरोधारा: मानसिक तनाव, अनिद्रा, चिंता में चमत्कारी
- नस्य: मस्तिष्क को ताकत देने वाली प्रक्रिया
4. दिनचर्या (Dinacharya) और जीवनशैली
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- सूर्योदय से पहले उठना
- नियमित भोजन और शुद्ध आहार
- स्क्रीन समय कम करना
- भरपूर नींद
- प्रकृति के करीब रहना
चरक संहिता कहती है:
“रोगा सर्वेअपि मन्देऽग्नौ” – जब पाचन और दिनचर्या कमजोर होती है, तो सभी रोग उत्पन्न होते हैं।
निष्कर्ष: मानसिक शांति का आयुर्वेदिक रास्ता
“मनः प्रसादः स्वास्थ्यम्” — मन की प्रसन्नता ही असली स्वास्थ्य है।
आयुर्वेद मानसिक स्वास्थ्य को केवल दवाओं से नहीं, बल्कि समग्र जीवन पद्धति से ठीक करता है। यदि हम अपनी दिनचर्या, आहार, सोच और वातावरण को संतुलित कर लें, तो मन भी स्वाभाविक रूप से स्थिर और प्रसन्न रहेगा।
अंतिम सुझाव:
यदि आप लगातार मानसिक परेशानी, चिंता या अवसाद से पीड़ित हैं, तो बिना देर किए किसी पंजीकृत आयुर्वेदाचार्य या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करें। साथ ही योग और ध्यान को जीवन का हिस्सा बनाएं।
लेखक: संकर बादत्य – आयुर्वेद प्रेमी और सामाजिक लेखक
ब्लॉग: ReadStoryline.in